सूर्य ग्रहण को लेकर न हों परेशान, भारत में नहीं दिखेगा और न लगेगा सूतक
Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण को लेकर कई तरह की मान्यताएं और चर्चाएं होती हैं. इस बार ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. ऐसे में सूतक काल को लेकर क्या नियम होंगे और ज्योतिर्विद ने लोगों को क्या सलाह दी है, जानें इस खबर में.
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Jaipur News: खतरे में है जयपुर की विरासत, अवैध निर्माण और पुरानी हवेलियों का कायाकल्प कहीं छीन न लें UNESCO का सम्मान
Jaipur News: जयपुर की विरासत खतरे में पड़ गई है. शहर में हो रहे अवैध निर्माण के चलते माना जा रहा है कि यूनेस्को द्वारा मिला सम्मान भी न छिन जाए. इस पर हाईकोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि पुरानी शैलियों में बनाए गए किलों और नगरों के आसपास निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से रोक दिए जाए. पिंक सिटी के लिए अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि परकोटा क्षेत्र में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के कारण जयपुर का मूल हैरिटेज स्वरूप लगातार प्रभावित होता रहा, तो शहर के यूनेस्को विश्व विरासत दर्जे पर भी खतरा पैदा हो सकता है.
कोर्ट ने कहा गुलाबी नगरी जयपुर की पहचान सिर्फ उसके गुलाबी रंग से नहीं है बल्कि परकोटे के भीतर मौजूद ऐतिहासिक हवेलियों, पारंपरिक स्थापत्य, झरोखों, छज्जों और बाजारों की अनूठी बनावट से भी है. लेकिन अब यही ऐतिहासिक पहचान तेजी से बदलती दिखाई दे रही है. परकोटा इलाकों में अवैध निर्माण, अतिक्रमण और बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों ने शहर की विरासत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुरानी हवेलियों में बदलाव से लेकर बेसमेंट, दुकानों और पार्किंग के लिए किए जा रहे कंस्ट्रक्शन कार्यों तक, ऐसी गतिविधियां जयपुर के मूल स्वरूप को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं.
राजस्थान हाईकोर्ट ने नगर निगम को दिए आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने भी इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. अदालत ने स्पष्ट किया कि परकोटा क्षेत्र में बिना सक्षम स्वीकृति के किए जा रहे निर्माणों पर तत्काल कार्रवाई जरूरी है. कोर्ट ने निगम प्रशासन से अवैध निर्माणों को रोकने और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने को कहा है.
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हाईकोर्ट ने निगम की जवाबदेही तय की
जितेंद्र शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने जयपुर के ऐतिहासिक स्वरूप को बनाए रखने पर जोर दिया है. कोर्ट ने कहा कि परकोटा इलाके की पारंपरिक स्थापत्य शैली और मूल हैरिटेज लुक को किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होने दिया जाएं. अदालत ने नगर निगम आयुक्त की जवाबदेही तय करते हुए बिना अनुमति के किए जा रहे निर्माणों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. साथ ही ऐतिहासिक स्वरूप को बहाल करने की दिशा में भी जरूरी कदम उठाने को कहा गया है. हाई कोर्ट का यह रुख बताता है कि जयपुर की विरासत को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर कोई भी लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी.
इन चार प्रमुख मार्गों पर पहले होगी कार्रवाई
हाईकोर्ट ने शुरुआती चरण में परकोटे के चार प्रमुख और व्यस्त मार्गों पर विशेष कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. इनमें किशनपोल बाजार, चौड़ा रास्ता, जौहरी बाजार और चांदपोल बाजार से छोटी चौपड़ होते हुए त्रिपोलिया गेट और बड़ी चौपड़ तक का मुख्य मार्ग शामिल हैं. इन इलाकों में बिना अनुमति किए गए निर्माण और ऐसे बदलावों की जांच होनी चाहिए, जो भवनों के पारंपरिक स्वरूप को प्रभावित कर रहे हैं. अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि कार्रवाई में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए.
हवेलियों में बदलाव से बदल रही विरासत
जयपुर के परकोटा क्षेत्र में कई पुराने भवन और हवेलियां शहर की ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. मगर समय के साथ-साथ इनमें से कई इमारतों का प्रयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जाना लगा है. कहीं अतिरिक्त मंजिलें बनाई जा रही हैं तो कहीं बेसमेंट, दुकान और पार्किंग की जरूरत के अनुसार, पुराने ढांचे में बदलाव किए जा रहे हैं.
पारंपरिक झरोखों, छज्जों और वास्तुशैली की जगह कई स्थानों पर कांच के फ्रंट, बड़े शटर और आधुनिक व्यावसायिक ढांचे दिखाई देने लगे हैं. इससे जयपुर का बाहरी गुलाबी रंग तो बरकरार है, लेकिन अंदर से उसकी ऐतिहासिक पहचान धीरे-धीरे कमजोर हो रही है.
हैरिटेज सेल की भूमिका पर भी सवाल
जयपुर के ऐतिहासिक भवनों और परकोटा क्षेत्र की विरासत को सुरक्षित रखने के लिए हैरिटेज सेल की व्यवस्था मौजूद है. इसके बावजूद पुराने भवनों में लगातार हो रहे बदलाव और नए व्यावसायिक निर्माणों की शिकायतें सामने आना इसकी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा हैं. जरूरत इस बात की है कि सिर्फ अवैध निर्माण सामने आने के बाद कार्रवाई करने के बजाय नियमित रूप से इन जगहों का निरीक्षण और प्रभावी निगरानी की व्यवस्था मजबूत की जाए. पुराने भवनों के मूल स्वरूप में बदलाव से पहले अनुमति और नियमों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए.
UNESCO विरासत दर्जे पर भी चिंता
शहर में परकोटा क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक और आर्किटेक्च्यूरल विशेषताओं के कारण ग्लोबल लेवल पर पहचान की है. यूनेस्को की ओर से भी शहर की विरासत के संरक्षण को लेकर चिंता जताई गई है. ऐसे में अगर अवैध निर्माण और अनियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियां इसी तरह बढ़ती रहेंगी तो जयपुर की विश्व विरासत होने की पहचान पर भी सवाल खड़े होंगे.
जयपुर की विरासत सिर्फ पुरानी इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहर की स्थापत्य परंपरा, बाजारों की व्यवस्था और ऐतिहासिक स्वरूप का विशाल ताना-बाना है. इसलिए, परकोटे में विकास और व्यावसायिक जरूरतों के साथ विरासत संरक्षण के बीच संतुलन बनाना जरूरी है. हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद अब देखना होगा कि नगर निगम और संबंधित विभाग जमीन पर कितनी प्रभावी कार्रवाई करते हैं और गुलाबी नगरी के मूल स्वरूप को बचाने के लिए भजनलाल सरकार कितने गंभीर कदम उठाएगी.
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