Prajwal Revanna Jail Raid: बंगलूरू की परप्पना अग्रहारा जेल में बड़ी कार्रवाई, पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना की बैरक से मिला एंड्रॉयड फोन
बंगलूरू की उच्च सुरक्षा वाली परप्पना अग्रहारा केंद्रीय जेल में मंगलवार दोपहर सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) की टीम ने अचानक धावा बोला। करीब चार से पांच घंटे तक चले इस व्यापक तलाशी अभियान में जेल में बंद कई हाई-प्रोफाइल कैदियों और अन्य बंदियों की बैरकों की गहन जांच की गई। इसी दौरान अधिकारियों को पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना के पास से एक चालू एंड्रॉयड स्मार्टफोन मिला, जिसे तुरंत जब्त कर लिया गया। पुलिस महानिदेशक आलोक कुमार ने बुधवार को इस घटना की आधिकारिक पुष्टि की।
6 अगस्त की चेकिंग में नहीं मिला था फोन, परप्पना अग्रहारा थाने में दर्ज हो रही FIR
कारागार महानिदेशक आलोक कुमार ने बताया कि महज़ कुछ दिन पहले 6 अगस्त को भी जेल प्रशासन द्वारा रेवन्ना की बैरक का निरीक्षण किया गया था, लेकिन उस समय वहां कोई भी प्रतिबंधित वस्तु बरामद नहीं हुई थी। ऐसे में महज कुछ दिनों के भीतर जेल के अति-सुरक्षित घेरे को तोड़कर स्मार्टफोन का बैरक तक पहुंचना सुरक्षा तंत्र में बड़ी सेंध की ओर इशारा करता है। सीसीबी की ओर से इस मामले में परप्पना अग्रहारा पुलिस स्टेशन में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
सहायक जेल अधीक्षक निलंबित, जेल अधीक्षक से मांगा गया जवाब
हाई-प्रोफाइल कैदी के पास से प्रतिबंधित एंड्रॉयड फोन मिलने के बाद गृह विभाग और कारागार प्रशासन हरकत में आ गया है। डीआईजी (दक्षिण) की जांच रिपोर्ट और सिफारिश के आधार पर ऑन-ड्यूटी लापरवाही बरतने के आरोप में सहायक जेल अधीक्षक श्री इरन्ना रंगपुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा, बंगलूरू केंद्रीय कारागार के मुख्य अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फोन जेल के भीतर पहुंचाने में मदद करने वाले कर्मचारियों की पहचान के लिए विस्तृत जांच की जा रही है।
यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं पूर्व सांसद
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पोते और जेडीएस (JDS) नेता एचडी रेवन्ना के बेटे प्रज्वल रेवन्ना 2019 से 2024 तक कर्नाटक की हसन लोकसभा सीट से सांसद रहे हैं। मई 2024 में कई महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के गंभीर मामलों के उजागर होने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। बंगलूरू की एक विशेष अदालत ने अगस्त 2025 में उन्हें मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके बाद से वे परप्पना अग्रहारा जेल के कैदी वार्ड में बंद हैं।
PM Modi: पूर्व राष्ट्रपति कोविंद की आत्मकथा के विमोचन पर भावुक हुए पीएम मोदी, बोले- 'मैं आज भी मां की कमी महसूस करता हूं'
Ram Nath Kovind Autobiography: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कोविंद के जीवन संघर्ष, उनकी सादगी और सार्वजनिक जीवन में योगदान की जमकर सराहना की। कार्यक्रम के दौरान जब उन्होंने अपनी मां का जिक्र किया तो उनका भावुक पक्ष भी सामने आया।
पीएम मोदी ने की रामनाथ कोविंद की तारीफ
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का नाम ‘Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles’ है। किताब में उनके बचपन और शुरुआती जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन और देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल तक के अनुभवों को समेटा गया है।
पुस्तक के विमोचन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति के तौर पर रामनाथ कोविंद का मार्गदर्शन, स्नेह और आत्मीयता उनके लिए बड़ी पूंजी रही है। उन्होंने कहा कि कोविंद का जीवन संघर्षों के बीच आगे बढ़ने और परिस्थितियों को अवसर में बदलने की प्रेरणा देता है।
‘यह किताब भारतीय लोकतंत्र की धरोहर बनेगी’
पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने रामनाथ कोविंद के जीवन और उनकी कार्यक्षमताओं को करीब से समझा है। उनके मुताबिक, कोविंद की आत्मकथा सिर्फ उनके व्यक्तिगत जीवन की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र और समाज के लिए महत्वपूर्ण धरोहर साबित हो सकती है। आत्मकथा में रामनाथ कोविंद के जीवन के अलग-अलग पड़ावों, संघर्षों, सार्वजनिक सेवा और राष्ट्रपति पद के अनुभवों को जगह दी गई है।
मां को याद कर भावुक हुए पीएम मोदी
अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने रामनाथ कोविंद के बचपन के संघर्ष का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने कम उम्र में ही अपनी मां को खो दिया था। इसके बाद पीएम मोदी ने अपनी मां का जिक्र किया और भावुक हो गए।
पीएम मोदी ने कहा कि वह इस मामले में खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि उनकी मां 100 वर्ष से अधिक समय तक जीवित रहीं और उन्हें उनका आशीर्वाद मिलता रहा। इसके बावजूद वह आज भी अपनी मां की कमी महसूस करते हैं।
उन्होंने कहा कि कम उम्र में मां को खो देना किसी भी व्यक्ति को भीतर से तोड़ सकता है, लेकिन रामनाथ कोविंद ने मुश्किल परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। बल्कि इन्हीं परिस्थितियों ने उन्हें और मजबूत बनाया।
संघर्ष से राष्ट्रपति भवन तक का सफर
रामनाथ कोविंद का जीवन सामान्य परिस्थितियों से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की कहानी है। उनकी आत्मकथा में इसी सफर के अनुभवों और चुनौतियों को दर्ज किया गया है। पुस्तक के जरिए पाठकों को उनके निजी जीवन के साथ-साथ सार्वजनिक सेवा के दौरान सामने आई परिस्थितियों को भी जानने का मौका मिलेगा।
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