ऑरेंज कैप की रेस भी हुई दिलचस्प, इन 5 प्लेयर्स ने बना दिए 500 से ज्यादा रन, एक ही टीम के 2 खिलाड़ियों के बीच में जंग
IPL 2026 Orange Cap Updated: इंडियन प्रीमियर लीग 2026 अब अपने सबसे रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है. एक और जहां प्लेऑफ की रेस दिलचस्प हो गई है, तो वहीं दूसरी ओर ऑरेंज कैप के लिए भी खिलाड़ियों के बीच जंग चल रही है. अब तक 5 खिलाड़ियों ने 500 रनों के आंकड़े को पार कर लिया है. खास बात यह है कि एक ही टीम के 2 खिलाड़ी ऑरैंज कैप की रेस में पहले और दूसरे नंबर पर है. ये खिलाड़ी गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल और ओपनर साई सुदर्शन हैं.
ऑरेंज कैप के लिए शुभमन गिल और साई सुदर्शन के बीच जबरदस्त जंग
आईपीएल 2026 में इस वक्त सबसे ज्यादा रन बनाकर साई सुदर्शन ने ऑरेंज कैप को अपने पास रखा है. गुजरात टाइटंस के लिए ओपनिंग करते हुए साई सुदर्शन ने अब तक 13 मुकाबलों में खेलते हुए कुल 554 रन बना चुके हैं. वहीं दूसरे नंबर पर गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल हैं. गिल ने ओपनिंग करते हुए 12 मैचों में कुल 552 रन बनाए हैं. इन दोनों खिलाड़ियों ने सीजन के शुरुआत में कुछ खास नहीं किया था, जिसकी वजह से गुजरात टाइटंस का प्रदर्शन भी खराब रहा, लेकिन जैसे ही दोनों प्लेयर्स का बल्ला चलने लगा प्लेऑफ की रेस में आगे निकल गई.
नंबर-3 पर विराट कोहली, नंबर-4 पर हैं केएल राहुल
विराट कोहली आईपीएल 2026 में सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में तीसरे नंबर पर हैं. कोहली ने 13 मैचों में बल्लेबाजी करते हुए कुल 542 रन बनाए हैं. वहीं दिल्ली कैपिटल्स के ओपनर केएल राहुल ऑरैंज कैप की लिस्ट में चौथे नंबर पर हैं. राहुल ने 13 मैचों में खेलते हुए 533 रन बनाए हैं. वहीं पांचवे नंबर पर सनराइजर्स हैदराबाद के विस्फोटक बल्लेबाज हेनरिक क्लासेन हैं, जिन्होंने 12 मैचों में 508 रन बनाए हैं. बता दें कि टॉप के सभी 4 खिलाड़ी ओपनिंग करते हैं, जबकि क्लासेन नंबर-4 या 5 पर बल्लेबाजी करने आते हैं. वो इस सीजन सबसे ज्यादा रन बनाने वाले विदेशी खिलाड़ी हैं.
वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा ऑरेंज कैप की रेस में पिछड़े
15 साल के वैभव सूर्यवंशी शुरुआत में ऑरैंज कैप की रेस में शामिल थे, लेकिन अब वो पिछड़ गए हैं. सूर्यवंशी ने 12 मैचों में बल्लेबाजी करते हुए 486 रन बनाए हैं. वहीं सनराइजर्स हैदराबाद के ओपनर अभिषेक शर्मा भी रेस से बाहर लग रहे हैं. उन्होंने 12 मैचों में 481 रन बनाए हैं. हालांकि इन दोनों खिलाड़ियों के पास मौका है, क्योंकि अब ज्यादा लीग मैच नहीं बचा है. दोनों प्लेयर्स एक 2 बड़ी पारी खेलते हैं तो फिर से रेस में वापसी कर लेंगे.
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जल्द घटेंगी पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें? जानें क्यों पीएम मोदी के विदेश दौरे को लेकर हो रही चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हालिया पांच देशों का दौरा भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक साझेदारी और वैश्विक रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, पश्चिम एशिया में तनाव और आपूर्ति श्रृंखला पर बढ़ते दबाव के बीच यह दौरा भारत के लिए दूरगामी फायदे लेकर आ सकता है. माना जा रहा है कि इन समझौतों का असर आने वाले समय में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है. ऐसे में ये माना जा रहा है कि पीएम मोदी की विदेश यात्रा के बाद आने वाले समय में जो समझौते हो रहे हैं उससे पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम घट सकते हैं.
ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर करने पर सबसे ज्यादा जोर
प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ऊर्जा सहयोग रहा. भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है और अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है. ऐसे में वैश्विक बाजार में किसी भी तरह की अस्थिरता सीधे भारतीय उपभोक्ताओं को प्रभावित करती है.
यात्रा के दौरान कई देशों के साथ दीर्घकालिक तेल और गैस आपूर्ति को लेकर चर्चा हुई. खास तौर पर खाड़ी देशों के साथ हुए समझौते भारत के लिए राहत भरे माने जा रहे हैं. इन समझौतों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक संकट के समय भी भारत को ऊर्जा की नियमित आपूर्ति मिलती रहे.
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को लंबे समय के लिए स्थिर दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध होता है तो घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की आशंका कम हो जाएगी. इससे आम लोगों और परिवहन क्षेत्र दोनों को राहत मिल सकती है.
इसके अलावा सरकार रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को भी मजबूत करने पर काम कर रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय संकट की स्थिति में देश के पास पर्याप्त तेल भंडारण उपलब्ध रहे. इससे भविष्य में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है.
एलपीजी उपभोक्ताओं को भी मिल सकती है राहत
भारत में करोड़ों परिवार घरेलू गैस सिलेंडर पर निर्भर हैं. विदेशी कंपनियों के साथ हुए नए ऊर्जा समझौतों से एलपीजी की आपूर्ति अधिक स्थिर हो सकती है. यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का दबाव कम हुआ तो घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में राहत मिलने की संभावना भी बढ़ेगी.
सरकार का प्रयास है कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर महंगाई का बोझ कम किया जा सके. इसी रणनीति के तहत ऊर्जा आयात को विविध देशों में फैलाने पर भी जोर दिया जा रहा है.
व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
ऊर्जा सहयोग के अलावा इस दौरे में इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल क्षेत्र में भी कई अहम समझौते हुए. भारत विदेशी निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ खुद को वैश्विक सप्लाई चेन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल कूटनीतिक यात्रा नहीं बल्कि भारत की आर्थिक मजबूती और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की बड़ी रणनीति का हिस्सा है. आने वाले महीनों में इसके सकारात्मक परिणाम आम लोगों तक भी पहुंच सकते हैं.
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