Responsive Scrollable Menu

'कहां गया आपका PDA? बीजेपी की सरकार होती तो अब तक लगा चुके होते कई चक्कर', रांची छात्र आंदोलन को लेकर अखिलेश यादव पर भड़के ओपी राजभर

ओपी राजभर ने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए उनसे रांची छात्र आंदोलन में शामिल होने से जुड़ा सवाल किया। साथ ही तंज कसा कि वे वहां नहीं जाएंगे, लेकिन अगर बीजेपी की सरकार होती तो घड़ियाली आंसू बहाने के लिए अब तक कई चक्कर लगा चुके होते।

Continue reading on the app

Explainer: ट्रंप 2028 में फिर लड़ना चाहते हैं, लेकिन कानून सख्त... क्या बदल सकता है अमेरिका का संविधान?

US President Donald Trump: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कई मौकों पर यह संकेत दिया है कि वह अपने दूसरे कार्यकाल के बाद 2028 में भी व्हाइट हाउस की दौड़ में शामिल होना चाहते हैं. व्हाइट हाउस के एक कार्यक्रम में उन्होंने मजाकिया अंदाज में 'ट्रम्प 2028' लिखी हुई टोपी पहनकर चौथी बार चुनाव लड़ने की बात भी कही. उनके इन बयानों से यह सवाल उठने लगा है कि क्या वास्तव में कोई अमेरिकी राष्ट्रपति तीसरी बार सत्ता में आ सकता है. इसका सीधा और स्पष्ट जवाब यह है कि मौजूदा अमेरिकी कानून के तहत ऐसा करना संभव नहीं है.

क्या कहता है अमेरिकी संविधान का 22वां संशोधन

अमेरिकी संविधान के 22वें संशोधन में यह साफ तौर पर दर्ज है कि कोई भी व्यक्ति दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित नहीं हो सकता. इस संशोधन को साल 1951 में लागू किया गया था ताकि भविष्य के सभी राष्ट्रपतियों के लिए कार्यकाल की एक स्पष्ट सीमा तय की जा सके. डोनाल्ड ट्रंप 2016 और 2024 में चुनाव जीत चुके हैं, जिसका अर्थ है कि वह अपने दो कार्यकाल पूरे कर लेंगे. ऐसे में उनका 2028 में फिर से चुनाव लड़ना सीधे तौर पर संवैधानिक नियमों का उल्लंघन माना जाएगा.

क्या संविधान में बदलाव करना संभव है

तकनीकी रूप से अमेरिकी संविधान में बदलाव किया जा सकता है, लेकिन यह प्रक्रिया बेहद मुश्किल है. 22वें संशोधन को रद्द करने या बदलने के लिए सीनेट और प्रतिनिधि सभा दोनों में कम से कम दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है. इसके अलावा अमेरिका के पचास में से कम से कम अड़तीस राज्यों की मंजूरी भी अनिवार्य है. वर्तमान राजनीतिक समीकरणों और देश में गहरे वैचारिक विभाजन को देखते हुए रिपब्लिकन पार्टी इन दोनों ही पैमानों पर काफी पीछे है. संसद के दोनों सदनों में सदस्यों की संख्या और राज्यों में रिपब्लिकन गवर्नरों के आंकड़ों को देखते हुए इस तरह के किसी भी संविधान संशोधन की संभावना न के बराबर है.

ये भी पढ़ें: जलते नोट मिलने के विवाद से घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा: लोकसभा में रखी जाएगी जांच रिपोर्ट, हटाने की प्रक्रिया पर टिकी निगाहें

क्या कोई कानूनी खामी या अपवाद  कर सकता है ट्रंप की मदद

कुछ लोगों का यह मानना रहता है कि राष्ट्रीय आपातकाल या युद्ध की स्थिति में राष्ट्रपति अपना पद बनाए रख सकते हैं, लेकिन अमेरिकी संविधान के अनुसार ऐसी स्थितियों में भी कार्यकाल की सीमा सख्ती से लागू रहती है. कानूनी हलकों में एक बहस यह भी है कि क्या दो कार्यकाल पूरा कर चुका कोई पूर्व राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति के रूप में लौट सकता है और बाद में किसी भी कारण से राष्ट्रपति का पद खाली होने पर सत्ता संभाल सकता है. रूस में व्लादिमीर पुतिन ने इसी तरह की रणनीति अपनाकर सत्ता में वापसी की थी. लेकिन अमेरिका के मामले में 12वां संशोधन इस रास्ते को भी बंद कर देता है. इसके अनुसार जो व्यक्ति राष्ट्रपति बनने के अयोग्य है, वह उपराष्ट्रपति का पद भी नहीं संभाल सकता. इसलिए अदालतें इस तरह के किसी भी प्रयास को खारिज कर देंगी.

अमेरिका के इतिहास में पहले कभी ऐसा हुआ है

अमेरिकी इतिहास में केवल फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ही एक ऐसे राष्ट्रपति रहे हैं जिन्होंने दो से ज्यादा बार यह पद संभाला. उन्होंने 4 मार्च 1933 से 12 अप्रैल 1945 तक लगातार चार बार राष्ट्रपति चुनाव जीते थे. उनकी तीसरी और चौथी जीत ऐसे समय में हुई थी जब यूरोप द्वितीय विश्व युद्ध का सामना कर रहा था और बाद में अमेरिका भी उस युद्ध में शामिल हो गया था. उस समय देश को निरंतरता और मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता थी, जिसे अमेरिकी जनता ने स्वीकार किया. हालांकि उनके इन चार अभूतपूर्व कार्यकालों के बाद अमेरिकी सांसदों को यह महसूस हुआ कि भविष्य में सत्ता का ऐसा केंद्रीकरण रोकना जरूरी है. इसी चिंता के परिणामस्वरूप 22वां संशोधन लाया गया ताकि भविष्य में कोई भी अन्य राजनेता दो से अधिक बार अमेरिका का राष्ट्रपति न बन सके.

ये भी पढ़ें: अभी होर्मुज पर किसका है 100% कंट्रोल? राष्ट्रपति ट्रंप ने किया बड़ा दावा, भड़का ईरान

कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हो गया था निधन

चौथा कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उनका निधन हो गया. जब रूजवेल्ट चौथी बार चुने गए, तब तक युद्ध का रुख मित्र देशों के पक्ष में मुड़ चुका था, लेकिन उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही थी. युद्ध के समय राष्ट्रपति के तौर पर काम करने के दबाव के कारण उनकी धमनियां सख्त हो गई थीं. अप्रैल 1945 में स्ट्रोक के कारण उनकी मौत हो गई; यह घटना मित्र देशों की जीत के साथ युद्ध खत्म होने से ठीक चार महीने पहले हुई थी. रूजवेल्ट के बाद राष्ट्रपति के कार्यकाल से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया; 1947 में, जब रूजवेल्ट के उपराष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन पद पर थे, तब कांग्रेस ने एक कानून का प्रस्ताव रखा जिसके तहत राष्ट्रपति लगातार दो कार्यकाल तक ही पद पर रह सकते थे. उससे पहले तक, राष्ट्रपति या तो स्वेच्छा से जॉर्ज वॉशिंगटन की परंपरा का पालन करते हुए ज्यादा से ज्यादा दो कार्यकाल तक पद पर रहते थे या फिर तीसरा कार्यकाल जीतने में नाकाम रहते थे.

ये भी पढ़ें: लाल सागर में हूती विद्रोहियों का खूनी 'डबल-टैप' हमला, छह की मौत, नए रक्षा समझौते पर उठे सवाल

ये भी पढ़ें: 'ईरान ने मजबूर किया...', अमेरिका को लेकर विदेश मंत्री अराघची ने किया बड़ा दावा

 

Continue reading on the app

  Sports

विराट कोहली ने इन देशों के खिलाफ लगाए हैं सबसे ज्यादा शतक, किस नंबर पर पाकिस्तान?

virat kohli centuries: इंटरनेशनल क्रिकेट में दूसरे सबसे ज्यादा शतकों की बात होती है तो दिग्गज भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली दूसरे नंबर पर आए हैं. सचिन तेंदुलकर के 100 इंटरनेशनल शतकों के बाद विराट कोहली ने अब तक तीनों फॉर्मेट में 85 सेंचुरी बनाई हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्होंने किस देश के खिलाफ सबसे ज्यादा बार सैकड़ा जमाने का कारनामा किया है. इस मामले में पाकिस्तान किस नंबर पर है? आइए जानते हैं... Wed, 12 Aug 2026 07:30:58 +0530

  Videos
See all

Parliament Monsoon Session Live : Loksabha से लाइव | PM Modi | Rahul Gandhi | Hindi News | FCRA Bill #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-12T03:42:06+00:00

France में अल्लाह हुकबार बोलकर पुलिसकर्मियों और महिलाओं पर हमला #terrorism #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-12T03:45:09+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers