'कॉकरोच' वाले बयान पर CJI सूर्याकांत की सफाई: बोले- तोड़-मरोड़ कर पेश की बात, युवाओं से नहीं, फर्जी डिग्री वालों से नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट में एक दिन पहले हुई तीखी सुनवाई के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। खबरों में यह दिखाया गया था कि चीफ जस्टिस ने देश के बेरोजगार युवाओं की तुलना 'कॉकरोच' और 'परजीवी' से की है। इस चौतरफा बहस और विवाद के बढ़ने के बाद शनिवार को CJI सूर्याकांत ने खुद सामने आकर इस मामले पर अपना स्पष्टीकरण दिया और बताया कि उनके गुस्से का असली निशाना कौन था।
"मेरी बात को गलत तरीके से पेश किया गया"
चीफ जस्टिस सूर्याकांत ने कहा कि मीडिया के एक हिस्से ने अदालत कक्ष में की गई उनकी मौखिक टिप्पणियों को पूरी तरह गलत संदर्भ में पेश किया। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि इस बयान को जानबूझकर देश के युवाओं पर किया गया हमला बनाकर दिखाया गया, जो कि पूरी तरह से असत्य है। CJI ने साफ किया कि उनके मन में देश के युवाओं के लिए कोई दुर्भावना नहीं है।
STORY | CJI Surya Kant clarifies 'parasites' remarks, says 'pained' over media reports
— Press Trust of India (@PTI_News) May 16, 2026
Chief Justice of India Surya Kant on Saturday issued a strongly worded clarification on his 'parasites' remarks, saying he was "pained" by media reports that suggested he criticised youth.
"I… pic.twitter.com/TzrRRXOVBK
फर्जी और नकली डिग्री लेकर वकालत में घुसने वाले थे निशाने पर
अपने स्पष्टीकरण में चीफ जस्टिस ने साफ किया कि उनकी यह तल्ख टिप्पणी देश के ईमानदार और मेहनती युवाओं के खिलाफ बिल्कुल नहीं थी। उन्होंने कहा:
"मुझे इस बात का दुख है कि मेरी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से दिखाया गया। मैंने खास तौर पर उन लोगों की आलोचना की थी जो फर्जी और नकली डिग्री के सहारे वकालत में प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे लोग न केवल वकालत बल्कि मीडिया, सोशल मीडिया और दूसरे सम्मानित पेशों में भी घुस गए हैं और परजीवियों की तरह सिस्टम पर हमला करते हैं।"
यह विवाद कैसे शुरू हुआ?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब CJI सूर्याकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की बेंच दिल्ली हाई कोर्ट के एक वकील से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। वह वकील सीनियर एडवोकेट का दर्जा पाने के लिए जरूरत से ज्यादा दबाव बनाने की कोशिश कर रहा था। अदालत ने वकील के पेशेवर आचरण, सोशल मीडिया व्यवहार और फेसबुक पर इस्तेमाल की गई भाषा पर गंभीर सवाल उठाए थे।
बेंच ने वकील को फटकार लगाते हुए यहाँ तक कहा था कि 'दुनिया का हर व्यक्ति सीनियर एडवोकेट बनने के योग्य हो सकता है, लेकिन कम से कम आप इसके हकदार नहीं हैं।' इसके बाद वकील ने माफी मांगते हुए अपनी याचिका वापस ले ली थी।
वकीलों की डिग्रियों की CBI जांच और BCI पर तंज
इसी सुनवाई के दौरान बेंच ने वकीलों की डिग्रियों की सत्यता पर गहरी चिंता जताई थी। CJI ने कहा था कि अदालत इस बात पर गंभीरता से विचार कर रही है कि कई वकीलों की डिग्रियों की प्रामाणिकता की जांच CBI से कराई जाए, क्योंकि कई डिग्रियों पर बड़े सवाल हैं।
उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) पर भी तंज कसा था कि वे वोटों की राजनीति के कारण ऐसे तत्वों पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं करते हैं।
"भारतीय युवाओं पर गर्व, वे देश का स्तंभ"
विवाद पर विराम लगाते हुए चीफ जस्टिस ने देश के युवाओं की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि उन्हें भारत के युवाओं पर पूरा गर्व है और वे उन्हें विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत और स्तंभ के रूप में देखते हैं। उन्होंने आगे जोड़ा कि वह न सिर्फ देश की वर्तमान और भविष्य की मानव संसाधन क्षमता पर गर्व करते हैं, बल्कि भारत का हर युवा उन्हें खुद आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
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