Sikar में पैतृक जमीन विवाद में युवक संजय नेहरा ने खाया ज़हर, अस्पताल में भर्ती
राजस्थान के सीकर जिले में पैतृक जमीन को लेकर पारिवारिक विवाद के बीच मंगलवार को 24 वर्षीय व्यक्ति पानी की टंकी पर चढ़ गया। बाद में उसने कथित तौर पर विषाक्त पदार्थ खा लिया, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि यह घटना बीरोड़ी गांव में हुई। युवक की पहचान संजय नेहरा के रूप में हुई है। उसका अपने रिश्तेदारों के साथ पैतृक जमीन को लेकर विवाद चल रहा है।
उसके माता-पिता का निधन हो चुका है और जमीन विवाद के संबंध में उसके एक चाचा ने अदालत से स्थगन आदेश ले रखा है। पुलिस ने बताया कि नेहरा मंगलवार सुबह पानी, नाश्ता और विषाक्त पदार्थ लेकर गांव की पानी की टंकी पर चढ़ गया। सूचना मिलने पर तहसीलदार मुकेश चौधरी और बलारां थानाधिकारी कैलाश यादव अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे और उसे नीचे उतरने के लिए समझाने का प्रयास किया।
नेहरा ने अधिकारियों से अपनी बहनों को बुलाने को कहा। इसके बाद उसके साथ रहने वाली छोटी बहन और थोरासी गांव में रह रही बड़ी बहन को मौके पर बुलाया गया। पुलिस ने बताया कि उसे नीचे उतारने के प्रयास किए जा रहे थे, तभी टंकी से नीचे उतरते समय नेहरा ने कथित तौर पर विषाक्त पदार्थ खा लिया।
उसे तुरंत नीचे उतारकर एंबुलेंस से नवलगढ़ के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। बाद में बेहतर उपचार के लिए उसे सीकर के एसके अस्पताल रेफर कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
Meghalaya voter list: 6.51 लाख नाम जांच के दायरे में आए, उचित सत्यापन के बाद ही होगा निर्णय
मेघालय के एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि मतदाता सूचियों के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत राज्य के 6.51 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम जांच के दायरे में आए हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उचित सत्यापन के बिना कोई भी नाम हटाया नहीं जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) बी डी आर तिवारी ने बताया कि एसआईआर के दायरे में आने वाले कुल 23.49 लाख मतदाताओं में से, 6,51,644 मतदाताओं को आगे की जांच के लिए वर्गीकृत किया गया है, ऐसा मुख्य रूप से रिकॉर्ड में विसंगतियों या विवरण का मिलान न होने के कारण हुआ है।
तिवारी ने कहा, जांच का मतलब नाम हटाना नहीं है। प्रत्येक मतदाता को अपनी पात्रता साबित करने का अवसर दिया जाएगा और कोई भी निर्णय लेने से पहले उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग का उद्देश्य वैध मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करते हुए यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची पूरी तरह सटीक हो।
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