तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय का प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह, कपास उत्पादकों पर दें ध्यान
चेन्नई, 14 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कपास पर लगने वाले 11 प्रतिशत आयात शुल्क को तत्काल हटाने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण राज्य का कपड़ा और परिधान क्षेत्र गंभीर संकट का सामना कर रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी को लिखे एक पत्र में सीएम विजय ने कहा कि कपास और धागे की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी ने कपड़ों के निर्माताओं पर जबरदस्त दबाव डाल दिया है और इस क्षेत्र पर निर्भर लाखों मजदूरों की रोजी-रोटी को खतरे में डाल दिया है।
तमिलनाडु को भारत का सबसे बड़ा कपड़ा और परिधान निर्यात करने वाला राज्य बताते हुए मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह उद्योग लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है।
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि तमिलनाडु का कपड़ा और परिधान उद्योग, कपास और धागे की कीमतों में हुई अभूतपूर्व बढ़ोतरी के कारण एक गंभीर संकट से गुजर रहा है।
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से घरेलू कपास उत्पादन में कमी और पूरे देश में बढ़ी हुई व्यापारिक गतिविधियों के कारण हुई है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है और कपड़ा निर्माताओं पर असर पड़ा है।
उन्होंने आगे कहा कि कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति अब केवल आयात के माध्यम से ही सुनिश्चित की जा सकती है, लेकिन कपास पर मौजूदा 11 प्रतिशत आयात शुल्क के कारण आयात महंगा और उद्योग के लिए अलाभकारी साबित हो रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले दो महीनों में कपास की कीमत 54,700 रुपए से बढ़कर 67,700 रुपए प्रति कैंडी हो गई है, जिसमें लगभग 25 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी अवधि के दौरान, धागे की कीमतें भी 301 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 330 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं।
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से घरेलू कपास उत्पादन में कमी और पूरे देश में बढ़ी हुई व्यापारिक गतिविधियों के कारण हुई है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है और कपड़ा निर्माताओं पर असर पड़ा है।
--आईएएनएस
पीएसके/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
बलूचिस्तान में मानवाधिकार का उल्लंघन, नागरिक की हत्या और छात्र के अपहरण का आरोप
क्वेटा, 14 मई (आईएएनएस)। बलूचिस्तान भर में नागरिकों के खिलाफ हिंसा लगातार जारी है। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने गुरुवार को एक नागरिक की कथित गैर-न्यायिक हत्या और दूसरे व्यक्ति के जबरन गायब किए जाने की जानकारी दी है, जिसके लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को जिम्मेदार बताया गया।
बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग पांक ने बताया कि जान मोहम्मद का गोलियों से छलनी शव बुधवार को केच जिले के बानोक-ए-चदाई इलाके में पड़ा मिला। जान मोहम्मद को करीब चार महीने पहले जबरन गायब कर दिया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, जैन मोहम्मद को 24 जनवरी को केच के टुम्प इलाके में उसके घर से उठाया गया था और उसे कथित तौर पर पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वॉड ने अगवा किया था।
इसी दिन एक अलग घटना में पांक ने बताया कि 18 साल के एक छात्र शहाब बलूच को वाशुक जिले में उसके घर से पाकिस्तान के फ्रंटियर कॉर्प्स ने जबरन उठा लिया।
बुधवार को मानवाधिकार कार्यकर्ता और बलूच यकजेहती कमेटी की प्रमुख आयोजक महरंग बलूच ने हाल के दिनों में बढ़ती जबरन गुमशुदगियों, गैर-न्यायिक हत्याओं और बलूचिस्तान में फर्जी प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर गंभीर चिंता जताई।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किए गए अपने बयान में महरंग ने कहा, “शांतिपूर्ण राजनीतिक अभिव्यक्ति और मानवाधिकारों की आवाज उठाने की जगह दिन-ब-दिन कम होती जा रही है, जबकि न्याय की मांग करने वालों को डर और धमकी देकर लगातार चुप कराया जा रहा है।”
बलूच कार्यकर्ता ने कहा कि बलूच यकजेहती कमेटी के सदस्यों के परिवारों को परेशान करने, शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं को गायब करने और खुलेआम लोगों की हत्या करने जैसी नई रणनीतियां दिखाती हैं कि बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति कितनी खराब हो चुकी है।
उन्होंने कहा, “शांतिपूर्ण आंदोलन को अपराध बनाया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार लोग बिना किसी जवाबदेही के काम कर रहे हैं। राज्य खुद ऐसी कहानियां बना रहा है, ताकि विरोध की आवाज को दबाया जा सके।”
उन्होंने कहा, “हम साफ करना चाहते हैं कि बलूच यकजेहती कमेटी हमेशा शांतिपूर्ण थी, है और आगे भी रहेगी। हम बलूचिस्तान में अत्याचार, जबरन गायब किए जाने और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।”
महरंग ने सभी मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील की कि वे बलूचिस्तान की स्थिति पर गंभीर ध्यान दें और पाकिस्तान को वहां शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने और चल रहे मानवाधिकार संकट के लिए जवाबदेह ठहराएं।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation



















