कमजोर अर्थव्यवस्था और कौशल की कमी से दक्षिण अफ्रीका में गहराया बेरोजगारी संकट: नायडू
जोहान्सबर्ग, 14 मई (आईएएनएस)। दक्षिण अफ्रीका में बढ़ती बेरोजगारी का मुख्य कारण कमजोर आर्थिक विकास और शिक्षा और कौशल विकास की प्रणाली में खामियां हैं, जिसके चलते सबसे ज्यादा असर युवाओं पर पड़ रहा है। यह बात यूथ एम्प्लॉयमेंट सर्विस (वाईईएस) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि नायडू ने कही है।
वाईईएस कार्यक्रम एक बिजनेस-आधारित पहल है, जिसे 2018 में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने युवाओं की बेरोजगारी कम करने के लिए शुरू किया था।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, हाल ही में एक इंटरव्यू में नायडू ने कहा कि धीमी आर्थिक वृद्धि, काम के लिए जरूरी तैयारी की कमी और सीमित नौकरी के अवसरों के कारण लाखों युवा औपचारिक नौकरी बाजार से बाहर हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मांग (डिमांड) की तरफ देखें तो दक्षिण अफ्रीका की आर्थिक वृद्धि काफी कमजोर रही है। स्टैटिस्टिक्स साउथ अफ्रीका के अनुसार, देश की जीडीपी 2025 में सिर्फ 1.1 प्रतिशत बढ़ी।
नायडू ने कहा कि शिक्षा और ट्रेनिंग पर काफी खर्च के बावजूद, बहुत से युवा काम करने के लिए ठीक से तैयार नहीं हैं। उनके अनुसार, “शिक्षा और कौशल विकास युवाओं को पर्याप्त रूप से नौकरी के लिए तैयार नहीं कर पाए हैं।”
उन्होंने यह भी कहा, “युवा लोगों को उन नौकरियों के लिए बहुत ज्यादा प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है जो आम तौर पर एंट्री-लेवल होती हैं। इसके अलावा, वे काम के लिए तैयार भी नहीं होते, क्योंकि न तो शिक्षा प्रणाली और न ही परिवार उन्हें फॉर्मल नौकरी के लिए ठीक से तैयार कर पाते हैं।”
उन्होंने बताया कि जो युवा विश्वविद्यालय की डिग्री रखते हैं, उन्हें नौकरी मिलने की संभावना थोड़ी बेहतर होती है, लेकिन ज्यादातर युवा कॉलेज या यूनिवर्सिटी तक नहीं पहुंच पाते, जिससे उनके अवसर और भी कम हो जाते हैं।
नायडू ने यह भी कहा कि आने वाले समय में नई तकनीकें नौकरियों को और कम कर सकती हैं और रोजगार के अवसर और भी सीमित हो सकते हैं।
स्टैटिस्टिक्स साउथ अफ्रीका के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में देश की आधिकारिक बेरोजगारी दर बढ़कर 32.7 प्रतिशत हो गई, जो 2025 की आखिरी तिमाही में 31.4 प्रतिशत थी। इस दौरान 3,45,000 नौकरियां खत्म हो गईं, जिससे बेरोजगार लोगों की कुल संख्या 81 लाख से भी ज्यादा हो गई।
युवाओं में बेरोजगारी की स्थिति और भी गंभीर है। युवाओं में बेरोज़गारी की बढ़ी हुई दर 45.8 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो दिखाती है कि नौकरी तलाशने वाले युवाओं के लिए हालात लगातार मुश्किल हो रहे हैं।
अर्थशास्त्रियों और श्रम विशेषज्ञों ने लंबे समय से चेतावनी दी है कि लगातार ऊंची युवा बेरोजगारी से सामाजिक और आर्थिक जोखिम बढ़ सकते हैं, जैसे असमानता, गरीबी और सामाजिक अस्थिरता।
इन समस्याओं से निपटने के लिए नायडू ने सरकार से अपील की कि वह निजी क्षेत्र के साथ मिलकर निवेश बढ़ाए और अर्थव्यवस्था में भरोसा वापस लाए।
उन्होंने कहा कि सरकार को बंदरगाह, रेलवे, सड़क, ऊर्जा, पानी और डिजिटल नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में सुधार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देना चाहिए, ताकि विकास को बढ़ावा मिल सके।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अमेरिका में इस हफ्ते खत्म हो सकते हैं गौतम अदाणी के खिलाफ केस : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। अमेरिका में अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी के खिलाफ लगे धोखाधड़ी के आरोप जल्द ही खत्म हो सकते हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने इस मामले को सुलझाने और केस को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस तरह से पिछले एक साल से जारी कानूनी विवाद खत्म हो सकता है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी लीगल डिपार्टमेंट (न्याय विभाग) इसी हफ्ते अदाणी के खिलाफ लगे आरोपों को वापस लिए जाने की घोषणा कर सकता है। अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (एसईसी) भी गौतम अदाणी और अन्य के खिलाफ नागरिक धोखाधड़ी (सिविल फ्रॉड) के मामले को निपटाने की तैयारी कर रहा है। यह मामला नवंबर 2024 में शुरू किया गया था।
हालांकि, अदाणी ग्रुप शुरुआत से इन आरोपों का खंडन करता रहा है। इन मामलों के अंत से अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार अदाणी ग्रुप के लिए फिर से खुल जाएंगे, जिससे ग्रुप को अपनी योजनाओं को विस्तार देने के लिए आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि अमेरिकी लीगल डिपार्टमेंट देश के बाहर घटित घटनाक्रम से संबंधित मामले में आरोपों को खत्म करने की प्रक्रिया को अपना सकता है। लेकिन, एसईसी के प्रस्ताव में केस को निपटाने के लिए जुर्माने के प्रावधान को शामिल किया जा सकता है।
हालांकि अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने इस मामले में कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया है। वहीं, एसईसी और अदाणी ग्रुप के प्रवक्ता ने भी इस मामले में कोई ऑफिशियल बयान नहीं दिया है।
बता दें कि अटॉर्नी कार्यालय की तरफ से अदाणी और उनके सहयोगियों पर इंडिया में सौर ऊर्जा कॉन्ट्रैक्ट लेने के लिए 250 मिलियन डॉलर की रिश्वतखोरी का आरोप लगाया गया था। आरोप था कि अमेरिकी निवेशकों से इस बात को छिपाया गया था। हालांकि, अदाणी ग्रुप ने इस बात को सिरे से खारिज किया है। वहीं, इस मामले में अदाणी और उनके भतीजे सागर समेत कोई भी आरोपी अमेरिकी कोर्ट में पेश नहीं हुआ है।
इस क्रम में अदाणी ग्रुप ने दस्तावेजों के माध्यम से एसईसी से फ्रॉड केस खारिज करने की मांग की थी, क्योंकि अमेरिकी रेग्युलेटर के पास आवश्यक क्षेत्राधिकार की कमी है।
--आईएएनएस
एमएस/एबीएम
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