किर्गिस्तान में एससीओ मीटिंग में शामिल हुए डिप्टी एनएसए पवन कपूर, द्विपक्षीय बातचीत की
बिश्केक, 14 मई (आईएएनएस)। भारत के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) पवन कपूर ने बिश्केक में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एसीसीओ) की सुरक्षा परिषद के सचिव की 21वीं मीटिंग के मौके पर शीर्ष वैश्विक सुरक्षा अधिकारियों के साथ कई द्विपक्षीय बैठक की।
उन्होंने ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (एसएनएससी) में बुधवार को अंतरराष्ट्रीय मामलों के डिप्टी पवन कपूर ने अपने ईरानी समकक्ष अली बाघेरी कानी से मुलाकात की। यहां दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय और क्षेत्रीय विकास पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
बिश्केक में भारतीय दूतावास ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, डिप्टी एनएसए पवन कपूर ने 13 मई 2026 को बिश्केक में सुरक्षा परिषद के सचिव की एससीओ मीटिंग के दौरान अपने ईरानी समकक्ष, एसएनएससी में अंतरराष्ट्रीय मामलों के डिप्टी अली बाघेरी कानी से मुलाकात की। बातचीत द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर केंद्रित थी।
कपूर ने किर्गिस्तान की सुरक्षा परिषद के सचिव आदिलेट ओरोजबेकोव के साथ भी बातचीत की। इस बातचीत का मकसद द्विपक्षीय साझेदारी को गहरा करना था।
डिप्टी एनएसए बुधवार को किर्गिस्तान पहुंचे, जहां वे एससीओ सदस्य देशों की सुरक्षा परिषद के सचिव की 21वीं मीटिंग में हिस्सा ले रहे हैं। यह मीटिंग 13 से 14 मई तक बिश्केक में हो रही है।
यहां पहुंचने पर सुरक्षा परिषद के पहले किर्गिज उपसचिव मेलिस सत्यबाल्डीव और किर्गिस्तान में भारतीय राजदूत बीरेंद्र सिंह यादव ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
पिछले महीने, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बिश्केक में एससीओ रक्षा मंत्रियों की मीटिंग को संबोधित किया था। उन्होंने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद जैसी बुराइयों से निपटने के लिए एक साथ मिलकर और बिना किसी समझौते के कदम उठाने की तुरंत जरूरत पर जोर दिया था। इसके लिए सुरक्षित ठिकानों को खत्म किया जाना चाहिए और ऐसे कामों के लिए किसी भी राजनीतिक वजह को खारिज किया जाना चाहिए।
एससीओ की मीटिंग को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर ने भारत के इस पक्के इरादे को दिखाया कि आतंकवाद के सेंटर अब सही सजा से बच नहीं सकते।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया भर के लोगों को सरकार की तरफ से चलाए जा रहे क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद से होने वाले खतरे के बारे में पता होना चाहिए, जो देशों की आजादी को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि ऐसी चुनौतियों से निपटने में किसी खास तरीके या दोहरे मापदंड के लिए कोई जगह नहीं है।
सिंह ने जोर देकर कहा कि एससीओ को उन लोगों के खिलाफ कड़े कदम उठाने चाहिए जो आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन करते हैं, पनाह देते हैं या मदद करते हैं। उन्होंने कहा, बिना किसी छूट के आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ से निपटकर, हम क्षेत्रीय सुरक्षा को एक चुनौती से शांति और खुशहाली की नींव में बदल रहे हैं।
--आईएएनएस
केके/पीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत को टेक्सटाइल कचरे का डंपिंग ग्राउंड बताना गलत, 97 प्रतिशत वेस्ट का होता है रीसाइक्लिंग: सरकार
नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने भारत के टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग सिस्टम का बचाव करते हुए कहा है कि देश को कपड़ा कचरे का डंपिंग ग्राउंड बताना भ्रामक और गलत है। वस्त्र मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े टेक्सटाइल रिकवरी और रीसाइक्लिंग नेटवर्क में से एक है, जो लंबे समय से चल रही दोबारा उपयोग और पुनःप्रयोग की व्यवस्था पर आधारित है।
सरकार ने कहा कि हाल में विदेशी मीडिया में आई कुछ रिपोर्ट्स, खासकर पानीपत जैसे क्लस्टर्स को लेकर, केवल पर्यावरण और श्रमिकों से जुड़ी समस्याओं पर फोकस कर रही हैं, जबकि इस सेक्टर में स्थिरता, नियमों के पालन और नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में हुई प्रगति को नजरअंदाज किया गया है।
मंत्रालय ने कहा, भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को पर्यावरण के प्रति लापरवाह या संरचनात्मक रूप से शोषणकारी बताना सही नहीं है। यह मौजूदा सुधारों और स्थिरता को बढ़ावा देने वाले प्रयासों की अनदेखी करता है।
सरकार के अनुसार, भारत हर साल लगभग 7,073 किलो टन टेक्सटाइल कचरा पैदा करता है।
सरकार ने मैपिंग ऑफ टेक्सटाइल वेस्ट वैल्यू चेन इन इंडिया 2026 स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि मैन्युफैक्चरिंग के दौरान पैदा होने वाले करीब 97 प्रतिशत प्री-कंज्यूमर टेक्सटाइल कचरे को रीसाइकिल कर लिया जाता है।
इसके अलावा, सरकार ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि भारत मुख्य रूप से पश्चिमी देशों के फास्ट-फैशन कचरे का डंपिंग ग्राउंड बन गया है। सरकार ने कहा कि हर साल मैनेज किए जाने वाले लगभग 7.8 मिलियन टन टेक्सटाइल कचरे में से 90 प्रतिशत से ज्यादा घरेलू स्तर पर पैदा होता है, जबकि आयातित कचरे की हिस्सेदारी केवल करीब 7 प्रतिशत है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मंत्रालय ने कहा कि टेक्सटाइल वेस्ट इकोसिस्टम हर साल लगभग 22,000 करोड़ रुपए की आर्थिक गतिविधि पैदा करता है।
इसके साथ ही सरकार ने आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं की एक स्टडी का भी जिक्र किया। पानीपत क्लस्टर के आंकड़ों पर आधारित इस अध्ययन में पाया गया कि टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधन की खपत जैसे पर्यावरणीय प्रभावों में 40 प्रतिशत तक कमी आती है, जब इसकी तुलना नए फाइबर उत्पादन से की जाती है।
हालांकि सरकार ने पोस्ट-कंज्यूमर वेस्ट मैनेजमेंट, अनौपचारिक इकाइयों और श्रमिक सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को स्वीकार किया, लेकिन उसने कहा कि उद्योग धीरे-धीरे अधिक औपचारिक व्यवस्था, स्वच्छ तकनीकों और मजबूत पर्यावरणीय नियमों की ओर बढ़ रहा है।
सरकार ने दोहराया कि टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग यूनिट्स तय पर्यावरण और श्रम कानूनों के तहत काम करती हैं। साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल जैसी नियामक एजेंसियां नियमों का पालन न करने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई भी जारी रखे हुए हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation





















