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भारत को टेक्सटाइल कचरे का डंपिंग ग्राउंड बताना गलत, 97 प्रतिशत वेस्ट का होता है रीसाइक्लिंग: सरकार

नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने भारत के टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग सिस्टम का बचाव करते हुए कहा है कि देश को कपड़ा कचरे का डंपिंग ग्राउंड बताना भ्रामक और गलत है। वस्त्र मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े टेक्सटाइल रिकवरी और रीसाइक्लिंग नेटवर्क में से एक है, जो लंबे समय से चल रही दोबारा उपयोग और पुनःप्रयोग की व्यवस्था पर आधारित है।

सरकार ने कहा कि हाल में विदेशी मीडिया में आई कुछ रिपोर्ट्स, खासकर पानीपत जैसे क्लस्टर्स को लेकर, केवल पर्यावरण और श्रमिकों से जुड़ी समस्याओं पर फोकस कर रही हैं, जबकि इस सेक्टर में स्थिरता, नियमों के पालन और नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में हुई प्रगति को नजरअंदाज किया गया है।

मंत्रालय ने कहा, भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को पर्यावरण के प्रति लापरवाह या संरचनात्मक रूप से शोषणकारी बताना सही नहीं है। यह मौजूदा सुधारों और स्थिरता को बढ़ावा देने वाले प्रयासों की अनदेखी करता है।

सरकार के अनुसार, भारत हर साल लगभग 7,073 किलो टन टेक्सटाइल कचरा पैदा करता है।

सरकार ने मैपिंग ऑफ टेक्सटाइल वेस्ट वैल्यू चेन इन इंडिया 2026 स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि मैन्युफैक्चरिंग के दौरान पैदा होने वाले करीब 97 प्रतिशत प्री-कंज्यूमर टेक्सटाइल कचरे को रीसाइकिल कर लिया जाता है।

इसके अलावा, सरकार ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि भारत मुख्य रूप से पश्चिमी देशों के फास्ट-फैशन कचरे का डंपिंग ग्राउंड बन गया है। सरकार ने कहा कि हर साल मैनेज किए जाने वाले लगभग 7.8 मिलियन टन टेक्सटाइल कचरे में से 90 प्रतिशत से ज्यादा घरेलू स्तर पर पैदा होता है, जबकि आयातित कचरे की हिस्सेदारी केवल करीब 7 प्रतिशत है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मंत्रालय ने कहा कि टेक्सटाइल वेस्ट इकोसिस्टम हर साल लगभग 22,000 करोड़ रुपए की आर्थिक गतिविधि पैदा करता है।

इसके साथ ही सरकार ने आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं की एक स्टडी का भी जिक्र किया। पानीपत क्लस्टर के आंकड़ों पर आधारित इस अध्ययन में पाया गया कि टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधन की खपत जैसे पर्यावरणीय प्रभावों में 40 प्रतिशत तक कमी आती है, जब इसकी तुलना नए फाइबर उत्पादन से की जाती है।

हालांकि सरकार ने पोस्ट-कंज्यूमर वेस्ट मैनेजमेंट, अनौपचारिक इकाइयों और श्रमिक सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को स्वीकार किया, लेकिन उसने कहा कि उद्योग धीरे-धीरे अधिक औपचारिक व्यवस्था, स्वच्छ तकनीकों और मजबूत पर्यावरणीय नियमों की ओर बढ़ रहा है।

सरकार ने दोहराया कि टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग यूनिट्स तय पर्यावरण और श्रम कानूनों के तहत काम करती हैं। साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल जैसी नियामक एजेंसियां नियमों का पालन न करने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई भी जारी रखे हुए हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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MS Dhoni की वापसी पर सस्पेंस गहराया, Lucknow मैच से पहले CSK को लगा बड़ा झटका, जानें वजह

आईपीएल 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स के प्रशंसकों को इस सीजन अब तक महेंद्र सिंह धोनी को मैदान पर देखने का इंतजार ही करना पड़ा है। सीजन शुरू होने से पहले चोटिल हुए धोनी अभी तक एक भी मुकाबला नहीं खेल पाए हैं। हालांकि उनकी फिटनेस में सुधार की खबरें लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन इसके बावजूद वह टीम के साथ मैदान पर वापसी नहीं कर सके हैं। अब लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ होने वाले मुकाबले से पहले एक और बड़ी खबर सामने आई है, जिसने फैंस की चिंता बढ़ा दी है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, चेन्नई सुपर किंग्स की टीम शुक्रवार को लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ मुकाबला खेलने लखनऊ पहुंच रही है, लेकिन महेंद्र सिंह धोनी इस दौरे पर टीम के साथ नहीं गए हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि फ्रेंचाइजी ने उनके लिए यात्रा की व्यवस्था भी की थी, लेकिन उन्होंने खुद इस दौरे पर नहीं जाने का फैसला लिया हैं।

बता दें कि आईपीएल 2026 शुरू होने से पहले अभ्यास सत्र के दौरान महेंद्र सिंह धोनी को पिंडली में चोट लग गई थी। शुरुआत में माना जा रहा था कि वह केवल शुरुआती कुछ मुकाबले मिस करेंगे, लेकिन अब लगभग दो महीने बीत चुके हैं और वह अभी तक मैदान पर नहीं लौट सके। गौरतलब है कि इस दौरान धोनी चेन्नई सुपर किंग्स के किसी भी बाहर के मुकाबले में टीम के साथ नजर नहीं आए हैं। यहां तक कि चेन्नई में खेले गए घरेलू मैचों में भी वह मैच डे स्क्वॉड से दूरी बनाए हुए दिखाई दिए हैं।

चेन्नई सुपर किंग्स के मुख्य कोच स्टीफन फ्लेमिंग ने इससे पहले बताया था कि धोनी की रिकवरी के दौरान उन्हें एक बार फिर परेशानी हुई थी, जिसके कारण उनकी वापसी में देरी हुई हैं। वहीं बल्लेबाजी कोच माइकल हसी ने भी कई बार कहा कि धोनी बल्लेबाजी के लिए काफी हद तक फिट हैं, लेकिन दौड़ने और विकेटों के बीच तेजी से मूवमेंट करने को लेकर अभी पूरी तरह सहज महसूस नहीं कर रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, टीम प्रबंधन भी इस बात को लेकर सतर्क है कि अच्छी लय में चल रही प्लेइंग इलेवन में किसी तरह का बदलाव न किया जाए। चेन्नई सुपर किंग्स फिलहाल अंक तालिका में पांचवें स्थान पर बनी हुई है और टीम प्लेऑफ की दौड़ में मजबूती से बनी हुई हैं। ऐसे में धोनी भी शायद मौजूदा संतुलन को बिगाड़ना नहीं चाहते हैं।

गौरतलब है कि महेंद्र सिंह धोनी लंबे समय से चेन्नई सुपर किंग्स की पहचान रहे हैं और उनके मैदान पर उतरने का इंतजार हर मैच में फैंस को रहता है। हालांकि इस सीजन उनका लगातार बाहर रहना टीम के समर्थकों के लिए निराशाजनक साबित हो रहा हैं। अब देखना होगा कि आगामी मुकाबलों में धोनी वापसी कर पाते हैं या नहीं।
Thu, 14 May 2026 20:21:09 +0530

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