LPG की टेंशन होगी खत्म! भारत ने निकाल लिया इसका विकल्प, कैबिनेट मीटिंग में बड़ा फैसला
वैश्विक ऊर्जा संकट और बढ़ती आयात निर्भरता के बीच केंद्र सरकार ने देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. दरअसल अब देशवासियों के लिए LPG की चिंता दूर हो जाएगी. जी हां केंद्र सरकार ने एलपीजी को लेकर अहम कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने कोल और लिग्नाइट गैसीफिकेशन परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है.
इसका मतलब है कि देश में एलपीजी का उत्पादन होगा. सरकार का दावा है कि इस पहल से आने वाले वर्षों में करीब 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होगा और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी.
क्या है कोल गैसीफिकेशन?
कोल गैसीफिकेशन एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें कोयले को उच्च तापमान और दबाव के जरिए ऑक्सीजन और भाप के साथ रिएक्ट कराया जाता है. इस प्रक्रिया से सिंथेसिस गैस यानी ‘सिनगैस’ तैयार होती है. इस गैस का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, उर्वरक, पेट्रोकेमिकल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक यह तकनीक पारंपरिक तरीके से कोयला जलाने की तुलना में ज्यादा उपयोगी और अपेक्षाकृत स्वच्छ मानी जाती है.
75 मिलियन टन कोयले के गैसीफिकेशन का लक्ष्य
सरकार ने इस योजना के तहत हर साल लगभग 75 मिलियन टन कोयला और लिग्नाइट गैसीफिकेशन का लक्ष्य रखा है. भारत के पास करीब 401 अरब टन कोयला और 47 अरब टन लिग्नाइट भंडार मौजूद है. ऐसे में सरकार इन संसाधनों का उपयोग सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें गैस, रसायन और उर्वरक उत्पादन में भी इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है.
आयात पर निर्भरता होगी कम
भारत फिलहाल LNG, मेथेनॉल, अमोनिया और यूरिया जैसी कई जरूरी ऊर्जा और रासायनिक जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भर है. सरकार का मानना है कि कोल गैसीफिकेशन परियोजनाएं इन आयातों को कम करने में मदद करेंगी. खासतौर पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच यह फैसला रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है.
कंपनियों को मिलेगा वित्तीय प्रोत्साहन
योजना के तहत सरकार प्लांट और मशीनरी लागत का 20 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन देगी. यह राशि चरणबद्ध तरीके से परियोजनाओं को दी जाएगी. प्रति परियोजना अधिकतम 5,000 करोड़ रुपये तक की सहायता का प्रावधान रखा गया है. सरकार का उद्देश्य निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों की कंपनियों को इस सेक्टर में निवेश के लिए आकर्षित करना है.
रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा
सरकार के अनुसार इस योजना से करीब 50 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. कोयला उत्पादक क्षेत्रों में उद्योगों के विस्तार से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. इसके अलावा विदेशी मुद्रा की बचत और घरेलू उद्योगों को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने में भी यह योजना अहम भूमिका निभा सकती है.
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मारुति सुजुकी ने रेलवे के जरिए 30 लाख वाहनों की डिलीवरी का बनाया रिकॉर्ड
नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। भारत की सबसे बड़ी पैसेंजर व्हीकल निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने बुधवार को कहा कि उसने भारतीय रेलवे नेटवर्क के जरिए 30 लाख से अधिक वाहनों की डिलीवरी करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जो ग्रीन और अधिक टिकाऊ लॉजिस्टिक्स संचालन की दिशा में उसके प्रयासों को रेखांकित करता है।
कंपनी ने कहा कि पिछले एक दशक में उसने अपने कुल आउटबाउंड लॉजिस्टिक्स में रेल परिवहन की हिस्सेदारी लगातार बढ़ाई है।
वित्त वर्ष 2014-15 में कुल वाहन डिस्पैच में रेल आधारित परिवहन की हिस्सेदारी केवल 5 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 26.5 प्रतिशत हो गई है।
मारुति सुजुकी ने बताया कि रेल द्वारा कुल 20 लाख से 30 लाख वाहनों की ढुलाई का सफर मात्र 21 महीनों में पूरा किया गया, जो कंपनी के इतिहास में रेलवे के जरिए 10 लाख अतिरिक्त वाहनों की सबसे तेज वृद्धि है।
इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए हिसाशी ताकेउची ने कहा कि यह उपलब्धि कंपनी की ग्रीन लॉजिस्टिक्स यात्रा में एक अहम कदम है।
उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से रेल आधारित माल ढुलाई लगभग नौ गुना बढ़ चुका है और अब यह कंपनी के कुल वाहन परिवहन का एक चौथाई से अधिक हिस्सा बन चुका है।
उन्होंने बताया कि कंपनी ने समर्पित ग्रीन लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 13,720 मिलियन रुपए से अधिक का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है।
ताकेउची ने सरकार की पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इस योजना ने इंटीग्रेटेड और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स के लिए मजबूत ढांचा तैयार किया है, जिससे उद्योगों को रेल आधारित माल परिवहन अपनाने में मदद मिली है।
आगे की योजना पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कंपनी वित्त वर्ष 2030-31 तक रेल आधारित वाहन डिस्पैच की हिस्सेदारी को 35 प्रतिशत तक बढ़ाना चाहती है।
इसके अलावा, कंपनी अपनी आगामी खरखोदा मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में इन-प्लांट रेलवे साइडिंग भी स्थापित करेगी। कंपनी का कहना है कि इससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा, ईंधन की बचत होगी और सड़कों पर ट्रैफिक दबाव भी घटेगा।
मारुति सुजुकी ने कहा कि वह भारत की पहली और एकमात्र पैसेंजर व्हीकल निर्माता कंपनी है, जिसके दो मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स (गुजरात के हंसलपुर और हरियाणा के मानेसर) में रेलवे साइडिंग की सुविधा मौजूद है।
ये दोनों सुविधाएं पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विकसित की गई हैं।
कंपनी के अनुसार, इन दोनों इन-प्लांट रेलवे साइडिंग्स की संयुक्त वार्षिक डिस्पैच क्षमता 7.5 लाख वाहनों की है।
फिलहाल कंपनी का रेल नेटवर्क हब-एंड-स्पोक लॉजिस्टिक्स मॉडल के तहत 22 हब्स के जरिए देश के 600 से अधिक शहरों को सेवाएं प्रदान कर रहा है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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