Kerala CM Name: लो हो गया फैसला, कल सामने आएगा केरल के सीएम का नाम
केरल विधानसभा चुनाव में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की शानदार जीत के बाद भी राज्य में मुख्यमंत्री के नाम को लेकर बना सस्पेंस अब खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है. चुनाव परिणाम आए करीब 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन कांग्रेस अब तक किसी एक चेहरे पर अंतिम मुहर नहीं लगा पाई थी. अब पार्टी सूत्रों और वरिष्ठ नेताओं के संकेतों के मुताबिक गुरुवार को नए मुख्यमंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस बात की पुष्टि की है कि जल्द फैसला सामने आएगा. इसके बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं और तेज हो गई हैं.
राहुल गांधी और खरगे के बीच हुई अहम बैठक
मुख्यमंत्री चयन को लेकर बुधवार को दिल्ली में बड़ी बैठक हुई. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ उनके आवास पर करीब 40 मिनट तक चर्चा की. इस दौरान केरल की राजनीतिक स्थिति, विधायकों की राय और संगठन के भीतर की परिस्थितियों पर विस्तार से मंथन किया गया.
बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व किसी भी तरह के विवाद या असंतोष से बचना चाहता है. यही वजह है कि मुख्यमंत्री चयन में जल्दबाजी करने के बजाय सभी पक्षों की राय ली गई.
जमीनी फीडबैक जुटाने में जुटे राहुल गांधी
सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने सिर्फ वरिष्ठ नेताओं से ही नहीं बल्कि राज्य के कई पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और संगठन से जुड़े नेताओं से भी बातचीत की. उन्होंने करीब आठ पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों से फीडबैक लिया ताकि कार्यकर्ताओं और जनता की वास्तविक भावना को समझा जा सके.
दरअसल चुनाव जीतने के बाद राज्य के कुछ हिस्सों में कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन और गुटबाजी की खबरें सामने आई थीं. कांग्रेस हाईकमान नहीं चाहता कि मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान के बाद कोई बड़ा असंतोष पैदा हो. इसी कारण नेतृत्व हर पहलू को ध्यान से परख रहा है.
मुख्यमंत्री पद की रेस में कई बड़े चेहरे
इस बार केरल में मुख्यमंत्री पद की दौड़ बेहद दिलचस्प मानी जा रही है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एआईसीसी महासचिव केसी वेनुगोपाल को बड़ी संख्या में विधायकों का समर्थन मिलने की चर्चा है. वहीं विपक्ष के पूर्व नेता वीडी सथीसन भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं.
इसके अलावा अनुभवी नेता रमेश चेन्नीथला भी मुख्यमंत्री पद की रेस में शामिल हैं. पार्टी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाने की है, ताकि अनुभव, संगठन और विधायकों की पसंद तीनों को साथ रखा जा सके.
गुरुवार को साफ होगी तस्वीर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस आलाकमान ने लगभग अपना फैसला तय कर लिया है और गुरुवार दोपहर तक आधिकारिक घोषणा हो सकती है. इसके साथ ही केरल की राजनीति में पिछले कई दिनों से जारी अनिश्चितता पर विराम लग जाएगा.
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LPG की टेंशन होगी खत्म! भारत ने निकाल लिया इसका विकल्प, कैबिनेट मीटिंग में बड़ा फैसला
वैश्विक ऊर्जा संकट और बढ़ती आयात निर्भरता के बीच केंद्र सरकार ने देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. दरअसल अब देशवासियों के लिए LPG की चिंता दूर हो जाएगी. जी हां केंद्र सरकार ने एलपीजी को लेकर अहम कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने कोल और लिग्नाइट गैसीफिकेशन परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है.
इसका मतलब है कि देश में एलपीजी का उत्पादन होगा. सरकार का दावा है कि इस पहल से आने वाले वर्षों में करीब 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होगा और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी.
क्या है कोल गैसीफिकेशन?
कोल गैसीफिकेशन एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें कोयले को उच्च तापमान और दबाव के जरिए ऑक्सीजन और भाप के साथ रिएक्ट कराया जाता है. इस प्रक्रिया से सिंथेसिस गैस यानी ‘सिनगैस’ तैयार होती है. इस गैस का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, उर्वरक, पेट्रोकेमिकल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक यह तकनीक पारंपरिक तरीके से कोयला जलाने की तुलना में ज्यादा उपयोगी और अपेक्षाकृत स्वच्छ मानी जाती है.
75 मिलियन टन कोयले के गैसीफिकेशन का लक्ष्य
सरकार ने इस योजना के तहत हर साल लगभग 75 मिलियन टन कोयला और लिग्नाइट गैसीफिकेशन का लक्ष्य रखा है. भारत के पास करीब 401 अरब टन कोयला और 47 अरब टन लिग्नाइट भंडार मौजूद है. ऐसे में सरकार इन संसाधनों का उपयोग सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें गैस, रसायन और उर्वरक उत्पादन में भी इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है.
आयात पर निर्भरता होगी कम
भारत फिलहाल LNG, मेथेनॉल, अमोनिया और यूरिया जैसी कई जरूरी ऊर्जा और रासायनिक जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भर है. सरकार का मानना है कि कोल गैसीफिकेशन परियोजनाएं इन आयातों को कम करने में मदद करेंगी. खासतौर पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच यह फैसला रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है.
कंपनियों को मिलेगा वित्तीय प्रोत्साहन
योजना के तहत सरकार प्लांट और मशीनरी लागत का 20 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन देगी. यह राशि चरणबद्ध तरीके से परियोजनाओं को दी जाएगी. प्रति परियोजना अधिकतम 5,000 करोड़ रुपये तक की सहायता का प्रावधान रखा गया है. सरकार का उद्देश्य निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों की कंपनियों को इस सेक्टर में निवेश के लिए आकर्षित करना है.
रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा
सरकार के अनुसार इस योजना से करीब 50 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. कोयला उत्पादक क्षेत्रों में उद्योगों के विस्तार से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. इसके अलावा विदेशी मुद्रा की बचत और घरेलू उद्योगों को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने में भी यह योजना अहम भूमिका निभा सकती है.
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