कराची में पाबंदियों के बावजूद 'औरत मार्च' में जुटी भीड़, अधिकारों को लेकर उठाई आवाज
कराची, 13 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से कराची में औरत मार्च पर पाबंदियां लगाए जाने के बावजूद, सैकड़ों लोग सी-व्यू पर इकट्ठा हुए, ताकि उन मुद्दों पर आवाज उठाई जा सके जो आज भी देश की अनगिनत महिलाओं को प्रभावित करते हैं। वर्षों से औरत मार्च पाकिस्तान में महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक न्याय पर चर्चा का एक बड़ा और अहम मंच बन चुका है।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के एक संपादकीय में कहा गया कि सबसे भावुक पलों में से एक था शांति को दी गई श्रद्धांजलि। शांति लियारी की 19 साल की दुल्हन थी, जिसकी कथित यौन हिंसा के बाद हुई दुखद मौत ने वैवाहिक हिंसा और उस पर छाई चुप्पी जैसे कठिन लेकिन जरूरी मुद्दों पर फिर से बहस छेड़ दी। ऐसे आयोजनों की अहमियत इस बात में है कि वे समाज को उन विषयों पर खुलकर बात करने की जगह देते हैं, जिन पर आमतौर पर लोग चर्चा करने से कतराते हैं।
पाकिस्तान का संविधान अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण तरीके से एक जगह इकट्ठा होने का अधिकार देता है। ये अधिकार सिर्फ किसी एक वर्ग के लिए नहीं हैं, बल्कि हर नागरिक के लिए हैं, चाहे उसकी राय लोकप्रिय हो या विवादित।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों की जिम्मेदारी हर सार्वजनिक सभा के संदेश का समर्थन करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि लोग सुरक्षित और जिम्मेदारी से अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें।
छह मई को, ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (एचआरसीपी) ने कराची प्रेस क्लब के बाहर औरत मार्च की आयोजकों और स्वयंसेवकों को हिरासत में लेने की निंदा की। वहां वे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए इकट्ठा हुए थे।
पाकिस्तान के प्रमुख समाचार नेटवर्क जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकार संगठन ने कहा कि लोगों को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से रोकना शासन के बढ़ते दमनकारी रवैये को दिखाता है, जहां असहमति को लोकतंत्र की जरूरत मानने के बजाय खतरे की तरह देखा जाता है।
एचआरसीपी का बयान उस घटना के बाद आया, जब पुलिस ने कराची प्रेस क्लब के बाहर औरत मार्च की कई नेताओं को थोड़ी देर के लिए गिरफ्तार कर लिया। इनमें एक्टिविस्ट और कलाकार शीमा किरमानी भी शामिल थीं।
एचआरसीपी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, हम कराची प्रेस क्लब के बाहर औरत मार्च के कई आयोजकों और स्वयंसेवकों की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हैं। वे वहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने वाले थे। यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि नागरिकों को अपने अधिकारों की बात रखने के लिए सार्वजनिक जगहों से व्यवस्थित तरीके से दूर रखने का हिस्सा है।
उसने आगे कहा, “शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की आजादी संविधान द्वारा दिए गए अधिकार हैं। खासकर महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले समूहों को प्रेस कॉन्फ्रेंस तक करने से रोकना यह दिखाता है कि शासन का रवैया लगातार ज्यादा दमनकारी होता जा रहा है, जहां असहमति को लोकतंत्र की जरूरत नहीं बल्कि खतरे की तरह देखा जाता है।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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Kerala CM Name: लो हो गया फैसला, कल सामने आएगा केरल के सीएम का नाम
केरल विधानसभा चुनाव में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की शानदार जीत के बाद भी राज्य में मुख्यमंत्री के नाम को लेकर बना सस्पेंस अब खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है. चुनाव परिणाम आए करीब 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन कांग्रेस अब तक किसी एक चेहरे पर अंतिम मुहर नहीं लगा पाई थी. अब पार्टी सूत्रों और वरिष्ठ नेताओं के संकेतों के मुताबिक गुरुवार को नए मुख्यमंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस बात की पुष्टि की है कि जल्द फैसला सामने आएगा. इसके बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं और तेज हो गई हैं.
राहुल गांधी और खरगे के बीच हुई अहम बैठक
मुख्यमंत्री चयन को लेकर बुधवार को दिल्ली में बड़ी बैठक हुई. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ उनके आवास पर करीब 40 मिनट तक चर्चा की. इस दौरान केरल की राजनीतिक स्थिति, विधायकों की राय और संगठन के भीतर की परिस्थितियों पर विस्तार से मंथन किया गया.
बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व किसी भी तरह के विवाद या असंतोष से बचना चाहता है. यही वजह है कि मुख्यमंत्री चयन में जल्दबाजी करने के बजाय सभी पक्षों की राय ली गई.
जमीनी फीडबैक जुटाने में जुटे राहुल गांधी
सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने सिर्फ वरिष्ठ नेताओं से ही नहीं बल्कि राज्य के कई पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और संगठन से जुड़े नेताओं से भी बातचीत की. उन्होंने करीब आठ पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों से फीडबैक लिया ताकि कार्यकर्ताओं और जनता की वास्तविक भावना को समझा जा सके.
दरअसल चुनाव जीतने के बाद राज्य के कुछ हिस्सों में कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन और गुटबाजी की खबरें सामने आई थीं. कांग्रेस हाईकमान नहीं चाहता कि मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान के बाद कोई बड़ा असंतोष पैदा हो. इसी कारण नेतृत्व हर पहलू को ध्यान से परख रहा है.
मुख्यमंत्री पद की रेस में कई बड़े चेहरे
इस बार केरल में मुख्यमंत्री पद की दौड़ बेहद दिलचस्प मानी जा रही है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एआईसीसी महासचिव केसी वेनुगोपाल को बड़ी संख्या में विधायकों का समर्थन मिलने की चर्चा है. वहीं विपक्ष के पूर्व नेता वीडी सथीसन भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं.
इसके अलावा अनुभवी नेता रमेश चेन्नीथला भी मुख्यमंत्री पद की रेस में शामिल हैं. पार्टी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाने की है, ताकि अनुभव, संगठन और विधायकों की पसंद तीनों को साथ रखा जा सके.
गुरुवार को साफ होगी तस्वीर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस आलाकमान ने लगभग अपना फैसला तय कर लिया है और गुरुवार दोपहर तक आधिकारिक घोषणा हो सकती है. इसके साथ ही केरल की राजनीति में पिछले कई दिनों से जारी अनिश्चितता पर विराम लग जाएगा.
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