क्या आने वाले दिनों में गाड़ी में तेल भरवाने पर लिमिट लगेगी? जानें पीएम मोदी के ऐलान क्या बदला
क्या आने वाले दिनों में गाड़ी में तेल भरवाने पर लिमिट लग जाएगी? क्या सरकार कोटा सिस्टम लागू करने जा रही है? यह सवाल इस वक्त हर आदमी के दिमाग में घूम रहे हैं। वजह है। पीएम मोदी की ईंधन बचाने की अपील और वैश्विक हालात। लेकिन अब सरकार ने इन तमाम आशंकाओं पर बड़ा साफ जवाब दे दिया है। दरअसल ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया में तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कई देशों में हालात ऐसे बने हैं कि वहां फ्यूल राशनिंग लागू करनी पड़ी। यानी पेट्रोल डीजल तय मात्रा में ही मिल रहा है। इस बीच भारत में भी चर्चाएं तेज हो गई।
60 दिन का पेट्रोल और डीजल स्टॉक मौजूद
क्या यहां भी कोटा सिस्टम लागू होगा? लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय के टॉप अधिकारियों ने साफ कहा है कि भारत में ऐसी कोई योजना नहीं है। सरकार के मुताबिक देश में ईंधन की सप्लाई पूरी तरह स्थिर है और घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। सरकार ने यह भी बताया है कि मौजूदा वैश्विक संकट के बावजूद भारत ने अपनी तैयारी मजबूत रखी है। देश के पास करीब 60 दिन का पेट्रोल और डीजल स्टॉक मौजूद है। जबकि एलपीजी का भंडार लगभग 45 दिन का है यानी अगर सप्लाई कुछ समय के लिए प्रभावित भी होती है तो आम लोगों पर तुरंत इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही सरकार लगातार नए स्रोतों से तेल खरीद रही है और पुराने सप्लायर से भी आयात बढ़ाया जा रहा है।
बांग्लादेश जैसे देशों में पेट्रोल पर लिमिट तय कर दी
यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में पेट्रोल डीजल की कीमतें काफी हद तक स्थिर रखी गई है। हालांकि इसके चलते तेल कंपनियों को रोजाना भारी नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। अगर दुनिया के हालात देखें तो कई देशों में स्थिति काफी अलग है। श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे देशों में पेट्रोल पर लिमिट तय कर दी गई है। कहीं 5 लीटर तो कहीं 20 लीटर प्रति हफ्ता तक की सीमा लागू है। कुछ देशों में तो क्यूआर कोड सिस्टम से पेट्रोल दिया जा रहा है। यानी बिना सिस्टम के एक बूंद भी ईंधन नहीं मिल सकता। लेकिन भारत में हालात फिलहाल नियंत्रण में है।
NEET UG 2026: 'कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं' नीट पेपर लीक पर NTA का बयान!
NEET UG 2026: नीट यूजी 2026 परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद रद्द कर दी गई है. 3 मई को हुई इस परीक्षा में देशभर से 22 लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया था. परीक्षा रद्द होने के बाद एनटीए ने साफ किया है कि छात्रों को दोबारा रजिस्ट्रेशन नहीं कराना होगा और कोई अतिरिक्त फीस भी नहीं ली जाएगी. पहले से चुने गए परीक्षा केंद्र और रजिस्ट्रेशन मान्य रहेंगे. नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित की जाएगी.
CBI करेगी मामले की जांच
पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है. कई राज्यों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन भी किए. उत्तराखंड में करीब 21 हजार छात्रों ने परीक्षा दी थी. छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि बार-बार पेपर लीक होने से मेहनती विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है. इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. विपक्ष ने सरकार पर परीक्षा प्रणाली में लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि बीजेपी ने कहा कि सरकार दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर रही है और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए परीक्षा रद्द की गई.
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