NEET UG 2026: 'कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं' नीट पेपर लीक पर NTA का बयान!
NEET UG 2026: नीट यूजी 2026 परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद रद्द कर दी गई है. 3 मई को हुई इस परीक्षा में देशभर से 22 लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया था. परीक्षा रद्द होने के बाद एनटीए ने साफ किया है कि छात्रों को दोबारा रजिस्ट्रेशन नहीं कराना होगा और कोई अतिरिक्त फीस भी नहीं ली जाएगी. पहले से चुने गए परीक्षा केंद्र और रजिस्ट्रेशन मान्य रहेंगे. नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित की जाएगी.
CBI करेगी मामले की जांच
पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है. कई राज्यों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन भी किए. उत्तराखंड में करीब 21 हजार छात्रों ने परीक्षा दी थी. छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि बार-बार पेपर लीक होने से मेहनती विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है. इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. विपक्ष ने सरकार पर परीक्षा प्रणाली में लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि बीजेपी ने कहा कि सरकार दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर रही है और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए परीक्षा रद्द की गई.
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Punjab News: ईडी गिरफ्तारी पर मंत्री संजीव अरोड़ा की याचिका हाईकोर्ट में , मंत्री ने खुद को निर्दोष बताया
Punjab News: पंजाब में इस समय एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक मामला चर्चा में है, जिसमें राज्य के मंत्री संजीव अरोड़ा का नाम सामने आया है. यह मामला धन शोधन यानी पैसे के लेन-देन से जुड़े आरोपों की जांच से जुड़ा बताया जा रहा है. इस पूरे मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी कर रही है. ईडी ने इस केस में कार्रवाई करते हुए संजीव अरोड़ा को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंच गया. अब मंत्री ने अपनी गिरफ्तारी को गलत बताते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है और रिहाई की मांग की है.
सुनवाई के दौरान क्या बोले संजीव अरोड़ा?
सुनवाई के दौरान मंत्री संजीव अरोड़ा ने अदालत में अपनी बात रखते हुए कहा कि यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक रंग भी ले रहा है. उन्होंने कहा कि पंजाब में राजनीतिक स्तर पर एक तरह की टकराव की स्थिति बनी हुई है और इसी के चलते उनके खिलाफ कार्रवाई को देखा जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि वे केवल एक पक्ष में हैं और उनके साथ अन्याय हो रहा है. अदालत में उन्होंने अपनी हिरासत से रिहाई की मांग की ताकि वे अपने पक्ष को ठीक से रख सकें और मामले की पूरी सच्चाई सामने आ सके.
आगे की सुनवाई पर सबकी नजर
इस मामले ने तब और ध्यान खींचा जब मंत्री ने यह भी कहा कि कुछ अन्य मामलों में कुछ लोगों को राहत या सुरक्षा मिली है, जबकि उनके साथ अलग तरह का व्यवहार किया जा रहा है. हालांकि यह अदालत में उनकी दलील का हिस्सा है और अंतिम निर्णय अदालत को ही लेना है. कानूनी प्रक्रिया में दोनों पक्षों की बात सुनी जाती है, उसके बाद ही कोई फैसला आता है. इस वजह से यह मामला अभी शुरुआती चरण में ही माना जा रहा है और आगे की सुनवाई पर सबकी नजर है.
ईडी ने क्या कहा?
दूसरी तरफ जांच एजेंसी ईडी का कहना है कि यह मामला गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़ा हुआ है और इसकी जांच नियमों के तहत की जा रही है. ईडी का काम ऐसे मामलों में पैसों के लेन-देन की जांच करना होता है, ताकि अगर कहीं गलत तरीके से पैसा कमाया गया हो तो उसकी जानकारी सामने आ सके. जांच एजेंसियों की भूमिका यह सुनिश्चित करना होती है कि कानून के अनुसार कार्रवाई हो और किसी भी तरह के वित्तीय अनियमितता के मामले में सही प्रक्रिया अपनाई जाए.
अंतिम फैसला अदालत के हाथ
अब इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि अंतिम फैसला अदालत के हाथ में है. अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही यह तय करेगी कि आगे क्या कदम उठाया जाए. अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि किस पक्ष की बात सही है या गलत, क्योंकि मामला न्यायिक प्रक्रिया में है. फिलहाल यह केस राजनीतिक और कानूनी दोनों ही नजरिए से चर्चा में है और आने वाले समय में इसकी सुनवाई काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
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