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Summer Fashion: गर्मियों में दिखना है कंफर्टेबल और स्टाइलिश, तो इन आरामदायक फैब्रिक के कपड़ों को चुनें

Summer Fashion: अप्रैल का महीना शुरू होते ही गर्मी का प्रभाव बढ़ने लगा है। ऐसे सीजन में सबसे मुश्किल आती है, अपने लिए परफेक्ट ड्रेस सेलेक्ट करने में। इस सीजन में आपको ऐसे फैब्रिक की ड्रेस पहननी चाहिए, जो कंफर्टेबल होने के साथ-साथ गर्मी से भी राहत दिलवाए। हम आपको यहां कुछ ऐसे ही ड्रेस फैब्रिक के ऑप्शंस के बारे में बता रहे हैं।

कॉटन
गर्मी के मौसम के लिए कॉटन के आउटफिट्स, बेस्ट माने जाते हैं। इनमें पसीना काफी जल्दी सूख जाता है, इसलिए ये गर्मी के मौसम में काफी आराम पहुंचाते हैं। इस फैब्रिक में त्वचा को हवा मिलती रहती है, जिससे पसीना जल्दी सूख जाता है और शरीर ठंडा रहता है। इसीलिए कॉटन कुर्तियां या टॉप्स, इस सीजन के लिए सबसे अच्छे ऑप्शन माने जाते हैं। इसके अलावा आप कॉटन की साड़ियां भी कैरी कर सकती हैं। ये आपको ट्रेडिशनल लुक देने के साथ-साथ कंफर्टेबल भी होती हैं। 

शिफॉन
शिफॉन फैब्रिक पहनने में काफी थिन, सॉफ्ट और लाइट फीलिंग देता है। हालांकि यह फैब्रिक स्वेट-फ्री नहीं होता, यानी इसमें पसीना तो आता है लेकिन इसका फ्लोई नेचर आपको गर्मी से राहत देता है। यह फैब्रिक साड़ी, सूट, पार्टी वियर ड्रेस और कुर्तियों के लिए परफेक्ट माना जाता है। इसमें आपको स्टाइलिश लुक मिलता है। 

लिनेन
लिनेन भी ऐसा फैब्रिक है, जिससे बनी ड्रेसेस को इस सीजन में बहुत पसंद किया जाता है। आजकल यह फैब्रिक काफी ट्रेंड में भी है। यह कॉटन फैब्रिक से भी लाइटर होता है, और पहनने के बाद एलिगेंट लुक देता है। इस फैब्रिक के आउटफिट पहनने से ज्यादा गर्मी महसूस नहीं होती और साथ ही यह पसीना सोखने में भी असरदार साबित होता है। इस फैब्रिक के ट्राउजर, शर्ट, कुर्ता, साड़ियां और अन्य ड्रेसेस इस सीजन के लिए एक अच्छा ऑप्शन माने जाते हैं। 

खादी
गर्मी से राहत पाने के लिए खादी को सुपर कंफर्टेबल फैब्रिक माना जाता है। गर्मी में यह आसानी से पसीने को सोख लेता है और शरीर को ठंडक का अहसास कराता है। ऐसे में खादी के कुर्ते, सूट, साड़ी, शर्ट, स्कर्ट कैरी कर सकती हैं। खादी का फैब्रिक, कॉटन फैब्रिक से थोड़ा मोटा होता है। साथ ही यह ईकोफ्रेंडली भी होता है। खादी भारतीय परंपरा का हिस्सा होने के साथ-साथ बेहद आरामदायक भी होता है। यह नेचुरल फाइबर्स से बना होता है, जिससे सेंसिटिव स्किन वाली महिलाएं भी खादी से बनी ड्रेसेस बिना किसी परेशानी के पहन सकती हैं। 

रेयॉन
हालांकि रेयॉन एक सिंथेटिक फाइबर है, लेकिन इसकी बनावट नेचुरल फाइबर्स जैसी होती है, जिससे यह बेहद सॉफ्ट  और कंफर्टेबल लगता है। गर्मी के मौसम के लिए रेयॉन के टॉप्स या अन्य ड्रेसेस का चयन, पार्टी वियर या रोजमर्रा के उपयोग के लिए किया जा सकता है। क्योंकि यह पसीना जल्दी सोख लेता है। इस फैब्रिक की ड्रेसेस, न केवल स्टाइलिश लुक देती हैं। बल्कि लाइटर भी होती हैं। देखने में यह बिल्कुल सिल्क जैसा लगता है। इस फैब्रिक से अनारकली, मैक्सी और वेस्टर्न आउटफिट तैयार कराए जा सकते हैं। 

जॉर्जेट
जॉर्जेट एक लाइट और फ्लोई फैब्रिक होता है। यह फैब्रिक शिफॉन जैसा दिखता है, इसे साड़ियों के अलावा टॉप्स सूट ड्रेस, शर्ट और कुर्ते के रूप में पहना जा सकता है। यह समर सीजन के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह लाइट फैब्रिक गर्मियों में खूबसूरत लगने के साथ-साथ काफी सुकून भी देता है।

शॉम्ब्रे
शॉम्ब्रे काफी हद तक लिनेन और कॉटन जैसा ही होता है। यह दिखने में डेनिम की तरह होता है। लेकिन यह उससे अधिक लाइटर होता है। इस फैब्रिक की बॉटम्स, शर्ट्स और ड्रेस बनवाई जा सकती हैं या फिर बाजार से रेडिमेड ड्रेस खरीदी जा सकती हैं। गर्मियों में इसे पहनने से कूल लुक मिलता है।

(यह जानकारी फैशन स्टाइलिस्ट पल्लवी अग्रवाल से ललिता गोयल की बातचीत पर आधारित है)

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Health Tips: खानपान का रखें ख्याल, डाइट में शामिल करें ये चीज; शरीर के साथ ब्रेन रहेगा हेल्दी 

Health Tips: उम्र के हिसाब से मेंटल हेल्थ के लिए हर किसी को अलग तरह की डाइट की आवश्यकता होती है। इस बारे में आपको यहां बता रहे हैं। 

टीनएजर्स-यंगस्टर्स 
किशोरावस्था और युवावस्था में मस्तिष्क तेजी से विकसित होता है, इसलिए इनको सही पोषण न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता, मूड और स्ट्रेस मैनेजमेंट के लिए भी जरूरी होता है। इन्हें अपनी डाइट में ओमेगा 3 फैटी एसिड जरूर लेना चाहिए। यह ब्रेन के न्यूरांस के निर्माण और संचार में मदद करता है। यह डिप्रेशन, चिंता और याददाश्त की समस्याओं को नियंत्रित करने में सहायक है। मछली, अलसी (फ्लैक्स सीड्स), चिया सीड, अखरोट और डॉक्टर की सलाह पर फिश ऑयल का सेवन कर सकते हैं। इससे ब्रेन की कोशिकाओं की झिल्ली मजबूत होती है और सीखने की क्षमता बढ़ती है। 

एंटीऑक्सिडेंट्स, मस्तिष्क को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन से बचाते हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जामुन (ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी, ब्लैकबेरी), हरी पत्तेदार सब्जियां, डार्क चॉकलेट, टमाटर, गाजर, शकरकंद में एंटी ऑक्सीडेंट्स तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थ ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में सुधार करते हैं। इनके लिए प्रोटीन भी जरूरी है क्योंकि यह न्यूरोट्रांसमीटर्स (जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन) के निर्माण में मदद करता है, जो मूड को स्थिर रखते हैं। अंडे, दाल, छोले, राजमा, चिकन, मछली, दही, पनीर और टोफू इसके प्रमुख स्रोत हैं। 

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प्रोटीन से युवाओं के ब्रेन को तेजी से काम करने की एनर्जी मिलती है और मानसिक थकान कम होती है। इनके अलावा कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स से ब्रेन को एनर्जी मिलती है। साबुत अनाज, दलिया, ओट्स, ब्राउन राइस, क्विनोवा, रोटी, दालें और शकरकंद इसके प्रमुख स्रोत हैं। ये ब्लड शुगर को स्थिर रखते हैं, जिससे चिड़चिड़ापन और थकान कम होती है। विटामिंस और मिनरल्स, न्यूरोट्रांसमीटर्स के उत्पादन को बढ़ाने और तनाव को कम करने में मदद करते हैं। केला, साबुत अनाज, ड्राई फ्रूट्स, हरी सब्जियां, मछली और अंडे इसके प्रमुख स्रोत हैं।

मिडिल एज
मिडिल एज के लोगों को दिमागी कार्यक्षमता, याददाश्त और एकाग्रता बढ़ाने वाली डाइट लेनी चाहिए। आमतौर पर टीनएजर्स के लिए यहां जिन चीजों का उल्लेख किया गया है, वे मिडिलएज लोगों और बुजुर्गों के लिए भी फायदेमंद होती हैं। इनके अलावा कुछ ऐसे तत्वों को भी डाइट में शामिल करना चाहिए, जो इस उम्र में ब्रेन की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। जैसे-विटामिन ई। यह बादाम, सूरजमुखी के बीज और हरी सब्जियों में पाया जाता है, जो इस उम्र में न्यूरांस की सुरक्षा करता है। मैग्नीशियम भी फायदेमंद है। 

यह काजू, पालक और डार्क चॉकलेट में होता है, जो तनाव को कम करता है। इसके अलावा रोजाना एक मुट्ठी नट्स (बादाम, अखरोट) खाएं। रोजाना भोजन में हल्दी का इस्तेमाल करें, क्योंकि इसमें मौजूद करक्यूमिन एंटी-इंफ्लेमेटरी और न्यूरोप्रोटेक्टिव गुणों से भरपूर होता है। ग्रीन टी या कॉफी सीमित मात्रा में लें, क्योंकि इनमें एंटीऑक्सिडेंट्स और कैफीन दिमाग को अलर्ट रखते हैं। संतुलित डाइट के साथ अच्छी नींद और नियमित व्यायाम भी जरूरी है।

ओल्ड एजर्स
बुजुर्गों के लिए ब्रेन की अच्छी सेहत बनाए रखने के लिए एक संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट बहुत जरूरी है। ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी, पालक और ब्रोकली जैसे फल और सब्जियां एंटीऑक्सीडेंट्स (विटामिन सी और ई) से भरपूर होते हैं, जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और ब्रेन सेल्स के नुकसान को कम करते हैं। पालक, केला और सरसों के साग में विटामिन के, फोलेट और बीटा-कैरोटीन होता है, जो दिमागी गिरावट को धीमा करने में मदद करता है। ब्राउन राइस, ओट्स, क्विनोआ और होल व्हीट ब्रेड जैसे साबुत अनाज ब्लड शुगर को स्थिर रखते हैं और दिमाग को लगातार ऊर्जा देते हैं। 

अंडे, दाल, बींस और लीन मीट (जैसे चिकन) में प्रोटीन और विटामिन बी12 होता है, जो न्यूरोट्रांसमीटर्स के उत्पादन में मदद करता है। हल्दी में करक्यूमिन होता है, जो एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण ब्रेन की सेहत के लिए अच्छा है। इस उम्र में कार्ब और फैट से दूर रहना चाहिए, ये दोनों तत्व ब्रेन के लिए नुकसानदेह होते हैं। इससे बचने के लिए घी, तेल, मक्खन और मैदे से बनी चीजों से परहेज करें। ज्यादा मीठा और प्रोसेस्ड फूड भी दिमाग पर बुरा असर डाल सकता है, इसलिए ऐसी चीजों से दूर रहना चाहिए।

प्रस्तुति: विनीता
डाइट सजेशन: डॉ. अदिति शर्मा 
कंसल्टेंट डाइटीशियन, नोएडा

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  Sports

Northampton में टॉस हुआ पर खेल नहीं, बारिश के कारण England-New Zealand दूसरा वनडे रद्द

इंग्लैंड और न्यूजीलैंड महिला टीमों के बीच खेली जा रही तीन मैचों की एकदिवसीय सीरीज का दूसरा मुकाबला लगातार बारिश की वजह से रद्द हो गया। नॉर्थहैम्पटन में बुधवार को खेले जाने वाले इस मुकाबले में एक भी गेंद नहीं फेंकी जा सकी, जिससे दोनों टीमों और क्रिकेट प्रशंसकों को निराशा हाथ लगी है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, खराब मौसम के कारण मैच की शुरुआत पहले ही देरी से हुई थी। लगातार रुक-रुक कर हो रही बारिश के चलते निर्धारित समय दोपहर एक बजे की बजाय मुकाबला शाम चार बजे शुरू करने का फैसला लिया गया था। साथ ही मैच को घटाकर 32-32 ओवर का कर दिया गया था।

गौरतलब है कि देरी के बाद न्यूजीलैंड महिला टीम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया था, लेकिन टॉस के कुछ ही देर बाद फिर से तेज बारिश शुरू हो गई। मैदान पर पानी भरने और मौसम में सुधार नहीं होने के कारण अंपायरों ने आखिरकार शाम करीब 4 बजकर 40 मिनट पर मुकाबला रद्द घोषित कर दिया हैं।

बता दें कि इंग्लैंड की टीम इस तीन मैचों की सीरीज में फिलहाल 1-0 से आगे चल रही है। पहले मुकाबले में इंग्लैंड ने बेहद रोमांचक जीत दर्ज की थी। डरहम में खेले गए उस मैच में इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड को एक विकेट से हराया था। उस मुकाबले में युवा खिलाड़ी टिली कोर्टीन-कोलमैन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था और शानदार गेंदबाजी करते हुए दो विकेट अपने नाम किए थे। उन्होंने चार्ली डीन के साथ आखिरी विकेट के लिए अहम साझेदारी भी निभाई थी।

दूसरे मुकाबले के लिए इंग्लैंड टीम में दो बदलाव किए गए थे। अनुभवी स्पिन गेंदबाज सोफी एक्लेस्टोन की टीम में वापसी हुई थी। उन्होंने पहला मुकाबला नहीं खेला था। वहीं एलिस कैप्सी भी बीमारी से उबरने के बाद टीम में शामिल होने वाली थीं। उनकी जगह जोडी ग्रूकॉक को बाहर किया गया था, जिन्होंने पिछले मैच में पदार्पण किया था। तेज गेंदबाज लॉरेन फाइलर को भी अंतिम एकादश से बाहर रखा गया था।

दूसरी तरफ न्यूजीलैंड महिला टीम ने अपने विजयी संयोजन में कोई बदलाव नहीं किया था। हालांकि बारिश की वजह से दोनों टीमों को मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिल सका हैं।

अब सीरीज का तीसरा और अंतिम एकदिवसीय मुकाबला शनिवार को कार्डिफ में खेला जाएगा। इसके बाद दोनों टीमों के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज भी खेली जानी हैं।
Thu, 14 May 2026 20:57:06 +0530

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