खाद और तेल संकट के बीच यूएन प्रमुख की चेतावनी, दोबारा लड़ाई के होंगे गंभीर नतीजे, शांति की अपील की
नैरोबी, 11 मई (आईएएनएस)। केन्या की राजधानी नैरोबी में सोमवार को संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के लिए एक कॉन्फ्रेंस सुविधा के शिलान्यास कार्यक्रम में बोलते हुए संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने अपील की कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुला रहे और युद्धविराम बना रहे।
गुटेरेस ने कहा, “मैं जोर देकर अपील करता हूं कि बातचीत जारी रहे जब तक कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकल जाता, युद्धविराम बना रहे और इस बीच होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुला रहे। अगर फिर से लड़ाई शुरू हुई तो उसके बहुत गंभीर नतीजे होंगे।”
उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व का यह संकट सिर्फ दूर बैठे लोगों की समस्या नहीं है, क्योंकि अफ्रीका के लगभग 13 प्रतिशत आयात इसी अहम समुद्री रास्ते से होकर गुजरते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि कई अफ्रीकी देश अब भी खाड़ी क्षेत्र से खाद और खेती में इस्तेमाल होने वाली दूसरी जरूरी चीजों का इंतजार कर रहे हैं।
गुटेरेस ने कहा कि अगर खाद नहीं मिली, तो आप समझ सकते हैं कि अगले साल खाद्य सुरक्षा का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।उन्होंने बताया कि यूरिया की कीमत पिछले एक महीने में 35 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुकी है। यूरिया दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली खाद है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के हित में होर्मुज स्ट्रेट का पूरी तरह खुला रहना बेहद जरूरी है।
गुटेरेस ने कहा कि इसी से ऊर्जा और खाद की कीमतें फिर से उस स्तर पर आ पाएंगी, जहां वे युद्ध से पहले थीं।
इससे पहले सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी क्षेत्र के संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका के नए प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया को सख्ती से खारिज कर दिया। उन्होंने तेहरान के रुख को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा, “मैंने अभी ईरान के तथाकथित प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया पढ़ी है। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आईंं। पूरी तरह अस्वीकार्य! इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद।”
ये बयान ऐसे समय आया जब कुछ ही घंटे पहले ईरान ने अमेरिका समर्थित शांति प्रस्ताव पर अपना जवाब भेजा था। इस प्रस्ताव का मकसद कई हफ्तों से चल रहे सैन्य तनाव और समुद्री बाधाओं के बाद क्षेत्र में स्थिरता लाना है।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच युद्धकालीन कमान ट्रांसफर और परमाणु पनडुब्बियों पर अहम चर्चा
सोल/वॉशिंगटन, 11 मई (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया और अमेरिका के शीर्ष रक्षा अधिकारियों ने सोमवार को वॉशिंगटन में बैठक की। इस दौरान दोनों देशों ने युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल (ओपीकॉन) अमेरिका से दक्षिण कोरिया को सौंपने की प्रक्रिया और दक्षिण कोरिया की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां हासिल करने की योजना पर चर्चा की।
रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से अलग से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने ओपीकॉन ट्रांसफर और परमाणु पनडुब्बियों से जुड़े अगले कदमों पर बात की। सोल के अधिकारियों के मुताबिक, यह चर्चा पिछले साल दोनों देशों के नेताओं और सुरक्षा बैठकों में हुए समझौतों के आधार पर हुई।
यह बैठक उस घटना के एक दिन बाद हुई, जिसमें दक्षिण कोरिया ने निष्कर्ष निकाला कि चार मई को होर्मुज स्ट्रेट में दक्षिण कोरिया के एक कार्गो जहाज में हुए धमाके और आग के पीछे दो अज्ञात उड़ने वाली वस्तुओं का हमला था।
योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस मुद्दे पर भी बैठक में चर्चा हो सकती है।
दक्षिण कोरिया चाहता है कि राष्ट्रपति ली जे म्युंग की सरकार का कार्यकाल 2030 में खत्म होने से पहले उसे युद्धकालीन ओपीकॉन वापस मिल जाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद पर रहते हुए सोल 2028 तक यह प्रक्रिया पूरी करना चाहता है।
हालांकि, दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर अलग-अलग राय के संकेत भी मिले हैं। पिछले महीने अमेरिका फोर्सेज कोरिया के कमांडर जनरल जेवियर ब्रूनसन ने कांग्रेस से कहा था कि दोनों देश 2029 की पहली तिमाही तक जरूरी शर्तें पूरी करने का लक्ष्य रख रहे हैं।
उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि ओपीकॉन ट्रांसफर ट्रंप का कार्यकाल 20 जनवरी 2029 को खत्म होने के बाद भी पूरा नहीं हो पाएगा।
दक्षिण कोरिया ने 1950-53 के कोरियाई युद्ध के दौरान अपनी सेना की ऑपरेशनल कमान अमेरिका के नेतृत्व वाले संयुक्त राष्ट्र कमांड को सौंप दी थी। 1994 में उसने शांति काल की कमान वापस ले ली, लेकिन युद्धकालीन कमान अब भी अमेरिका के पास है।
तीन चरणों वाले ढांचे के तहत, ओपीकॉन ट्रांसफर के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। इनमें दक्षिण कोरिया की संयुक्त कोरिया-अमेरिका सेनाओं का नेतृत्व करने की क्षमता, उसकी मिसाइल और एयर डिफेंस ताकत, और ऐसा क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल शामिल है जिसमें यह बदलाव सुरक्षित तरीके से हो सके।
पिछले साल हुई वार्षिक सुरक्षा सलाहकार बैठक में आहन और हेगसेथ ने ओपीकॉन ट्रांसफर की प्रक्रिया तेज करने के लिए एक रोडमैप बनाने और तीन चरणों वाले कार्यक्रम के दूसरे हिस्से को प्रमाणित करने पर सहमति जताई थी।
बैठक में जहाज पर हुए हमले के मामले पर भी चर्चा हो सकती है। इस घटना के बाद यह संभावना बढ़ गई है कि दक्षिण कोरिया मध्य पूर्व में तनाव कम करने की कोशिशों में अपनी भूमिका पर दोबारा विचार कर सकता है।
अब तक सोल, ट्रंप की उस मांग को लेकर सावधानी बरतता रहा है जिसमें उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से सुरक्षित बनाने के लिए नौसैनिक मदद मांगी थी। सरकार ने कहा है कि वह “मैरीटाइम फ्रीडम कंस्ट्रक्ट” (एमएफसी) नाम के अंतरराष्ट्रीय गठबंधन में शामिल होने के अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है।
रविवार को दक्षिण कोरिया ने कहा कि एचएमएम नामू कार्गो जहाज जैसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए वह हर संभव कदम उठाएगा और एमएफसी में शामिल होने के विकल्प पर करीबी नजर से विचार कर रहा है।
सोमवार की बैठक में दक्षिण कोरिया की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां बनाने की योजना पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। पिछले साल अक्टूबर में राष्ट्रपति ली जे म्युंग और ट्रंप की शिखर वार्ता में ट्रंप ने इस योजना को मंजूरी दी थी, लेकिन उसके बाद ज्यादा प्रगति नहीं हुई।
रविवार को वॉशिंगटन रवाना होने से पहले आहन ने कहा कि उन्हें रणनीतिक पनडुब्बियों को लेकर बातचीत में प्रगति की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि साल की पहली छमाही खत्म होने से पहले परमाणु पनडुब्बियों पर पहली आधिकारिक बैठक हो सकती है।
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