'मैं मैदान पर उतरने के लिए बहुत उत्साहित हूं,' ईयूटी20 लीग में खेलने को बेताब मार्टिन गप्टिल (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)
नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। न्यूजीलैंड के पूर्व ओपनर मार्टिन गप्टिल भारत के पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान से दोबारा मिलने और क्रिकेट मैदान पर वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जहीर खान बेल्जियम की पहली 'ईयूटी20 लीग' में 'एंटवर्प एंकर्स' टीम के सह-मालिक हैं। यह टूर्नामेंट 6 से 14 जून तक चलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद देश में पेट्रोल-डीजल की स्थिति को लेकर क्या है स्थिति? जानें सरकार का जवाब
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बिगड़ते हालात के बीच केंद्र सरकार ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की अपील की है. सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए ऊर्जा बचत बेहद जरूरी हो गई है.
पीएम मोदी की अपील दोहराई गई
ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर आयोजित अंतर-मंत्रालयी बैठक में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही नागरिकों से ईंधन की खपत कम करने का आग्रह कर चुके हैं. उन्होंने लोगों से सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो और कारपूलिंग को बढ़ावा देने की अपील की. साथ ही सामान की ढुलाई के लिए रेलवे का ज्यादा उपयोग करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने पर जोर दिया गया. सरकार का कहना है कि यदि नागरिक ऊर्जा बचत में सहयोग करें तो देश पर बढ़ रहे आर्थिक दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
सरकार बोली- कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार
सरकार ने भरोसा दिलाया कि भारत के पास फिलहाल कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है. अधिकारियों के अनुसार देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और किसी भी क्षेत्र में ईंधन संकट जैसी स्थिति नहीं है. संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म होने की कोई घटना सामने नहीं आई है. एलपीजी वितरण केंद्रों पर भी सप्लाई सामान्य बनी हुई है. उन्होंने कहा कि घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति भी बिना किसी रुकावट के जारी है.
होर्मुज जलडमरूमध्य से क्यों बढ़ी चिंता?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है. वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य टकराव की आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव तेज हो गया है.
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय हालात का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और तेल कंपनियों पर पड़ता है.
तेल कंपनियों पर बढ़ा आर्थिक दबाव
सूत्रों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां इस समय भारी घाटे का सामना कर रही हैं. इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को रोजाना करीब 1600 से 1700 करोड़ रुपये तक का संयुक्त नुकसान हो रहा है.
हालांकि सरकार ने फिलहाल इन कंपनियों के लिए किसी राहत पैकेज की घोषणा नहीं की है. इसके बावजूद सरकार का कहना है कि आम उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी.
ऊर्जा बचत पर सरकार का जोर
सरकार लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा संरक्षण बेहद जरूरी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें और ईंधन की बर्बादी रोकें, तो इससे देश की विदेशी मुद्रा और अर्थव्यवस्था दोनों को राहत मिल सकती है.
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