Assam CEE Seat Allotment Result 2026: राउंड 1 सीट अलॉटमेंट जारी, तुरंत करें चेक; जानें आगे क्या करना होगा
Assam CEE 2026: डायरेक्टरेट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (DTE), असम ने BTech पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए Assam CEE 2026 Round 1 Seat Allotment Result जारी कर दिया है। पहले चरण की काउंसलिंग में शामिल उम्मीदवार अब आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना सीट अलॉटमेंट स्टेटस देख सकते हैं।
सीट आवंटन उम्मीदवार की Assam CEE रैंक, आरक्षण श्रेणी, उपलब्ध सीटों और काउंसलिंग के दौरान भरे गए कॉलेज एवं ब्रांच विकल्पों के आधार पर किया गया है।
ऐसे करें Assam CEE 2026 Round 1 Seat Allotment Result चेक
उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करें—
स्टेप 1: DTE Assam की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
स्टेप 2: Assam CEE 2026 Round 1 Seat Allotment Result लिंक पर क्लिक करें।
स्टेप 3: अपना Application Number और Password दर्ज कर लॉगिन करें।
स्टेप 4: स्क्रीन पर सीट अलॉटमेंट स्टेटस दिखाई देगा।
स्टेप 5: सीट अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड कर भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें।
एडमिशन के लिए जरूरी दस्तावेज
सीट मिलने वाले उम्मीदवारों को रिपोर्टिंग के समय निम्न दस्तावेज साथ रखने होंगे—
- Assam CEE 2026 Admit Card
- Assam CEE 2026 Rank Card
- Round 1 Seat Allotment Letter
- कक्षा 10वीं और 12वीं की मार्कशीट एवं प्रमाणपत्र
- श्रेणी (Category) प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)
- PwD प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)
- वैध फोटो पहचान पत्र
- पासपोर्ट साइज फोटो
- DTE Assam द्वारा मांगे गए अन्य आवश्यक दस्तावेज
सीट मिलने के बाद क्या करें?
- यदि आपको Round 1 में सीट आवंटित हुई है, तो समय सीमा के भीतर ये जरूरी काम पूरे करें
- काउंसलिंग पोर्टल पर जाकर सीट स्वीकार (Accept) करें।
- यदि लागू हो तो सीट स्वीकार शुल्क (Seat Acceptance Fee) जमा करें।
- सीट अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड करें।
- सभी मूल दस्तावेजों के साथ आवंटित संस्थान में रिपोर्ट कर दस्तावेज सत्यापन और एडमिशन प्रक्रिया पूरी करें।
उम्मीदवारों के लिए सलाह
जिन उम्मीदवारों को पहले राउंड में सीट मिली है, वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें। समय पर दस्तावेज सत्यापन और रिपोर्टिंग पूरी करने से सीट सुरक्षित रहेगी। वहीं, जिन अभ्यर्थियों को सीट नहीं मिली है या वे आवंटित सीट से संतुष्ट नहीं हैं, उन्हें अगले काउंसलिंग राउंड से जुड़े अपडेट पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
अफगानिस्तान में कुदरत का कहर: भयानक फ्लैश फ्लड से 20 की मौत, 100 से ज्यादा लापता; अमेरिका पर भी मंडराया तूफान का खतरा
Afghanistan flash floods: अफगानिस्तान में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें कम से कम 20 लोगों की जान चली गई है और 100 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। अफगानिस्तान नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के प्रवक्ता यूसुफ हम्माद के अनुसार, यह बाढ़ पूर्वी नूरेस्तान प्रांत में आई है। लापता लोगों की तलाश के लिए युद्धस्तर पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
नूरेस्तान प्रांत में भारी नुकसान
प्रवक्ता यूसुफ हम्माद ने बताया कि परुन शहर और नूरेस्तान प्रांत के कई अन्य इलाकों में आई इस गंभीर बाढ़ से नागरिकों के जीवन और संपत्ति को भारी नुकसान हुआ है। बाढ़ की वजह से लोगों के घरों, कृषि भूमि और सार्वजनिक सुविधाओं को बड़े पैमाने पर क्षति पहुंची है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे बाढ़ प्रभावित और जोखिम वाले जोन से पूरी तरह दूर रहें।
‼️ There has been destruction due to flooding in eastern Afghanistan. After a heatwave in Parun, Nuristan, rains and torrential downpours have turned into floods.
— Regional insight (@Regional_Asia) July 20, 2026
Remember, whenever a natural disaster strikes in Afghanistan, rescue facilities are almost non-existent.
The… pic.twitter.com/ZU3cH7ffwC
सरकारी प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि वे नूरेस्तान प्रांत में हुई जान-माल की हानि से आहत हैं और मृतकों के लिए प्रार्थना करने के साथ घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।
अफगानिस्तान में क्यों आती हैं ऐसी भीषण बाढ़?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अफगानिस्तान अत्यधिक मौसम संबंधी आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील है। यहाँ बर्फबारी और भारी बारिश अक्सर अचानक आने वाली बाढ़ का कारण बनती हैं, जिसमें एक साथ दर्जनों या सैकड़ों लोगों की जान चली जाती है। साल 2024 में वसंत ऋतु के दौरान आई बाढ़ में 300 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, और इस साल की शुरुआत में भी देश के कई हिस्सों में व्यापक बाढ़ और भूस्खलन से कम से कम 110 लोगों की जान गई थी।
A short while ago, authorities confirmed that at least 20 people have been killed, 80 injured, and many more remain missing following the devastating floods that struck today in Nuristan, Afghanistan. pic.twitter.com/0I0H2IoYQT
— Weather Monitor (@WeatherMonitors) July 20, 2026
इस तरह की आपदाओं के प्रभाव को बढ़ाने में दशकों का संघर्ष, खराब बुनियादी ढांचा, संघर्ष करती अर्थव्यवस्था, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन का बढ़ता असर शामिल हैं। खासकर दूरदराज के इलाकों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जहाँ कई घर मिट्टी के बने होते हैं जो अचानक आई बाढ़ या भारी बर्फबारी से बचाव के लिए पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पाते।
आगे और खतरे की चेतावनी
परिवहन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मौसम विज्ञान विभाग ने और अधिक खराब मौसम का अनुमान जताया है। देश के 34 में से 10 प्रांतों में भारी बारिश, आंधी, धूल-रेत भरी तेज हवाओं और अचानक बाढ़ आने की चेतावनी जारी की गई है। मंत्रालय ने निवासियों को नदियों के किनारों और बाढ़ के खतरे वाले अन्य क्षेत्रों से दूर रहने की सख्त चेतावनी दी है।
अमेरिका के तटीय इलाकों पर मंडराया उष्णकटिबंधीय तूफान 'बर्था' का खतरा
एक अन्य घटनाक्रम के तहत, फ्लोरिडा पैलेंडल के पास मैक्सिको की खाड़ी में सोमवार शाम को 'बर्था' (Bertha) नामक एक उष्णकटिबंधीय तूफान (Tropical Storm) का निर्माण हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह तूफान अमेरिकी तटीय क्षेत्रों में भारी बारिश और तूफानी लहरों (storm surge) का कारण बन सकता है।
मियामी स्थित नेशनल हरिकेन सेंटर की शाम की एडवाइजरी के अनुसार, इस तूफान का केंद्र पनामा सिटी, फ्लोरिडा से लगभग 110 मील (180 किलोमीटर) दक्षिण में स्थित था, और इसकी अधिकतम निरंतर हवाएं लगभग 40 मील प्रति घंटा (65 किमी प्रति घंटा) थीं।
यह धीमी गति से आगे बढ़ने वाला तूफान अनिश्चित रूप से बह रहा है, लेकिन इसके इस सप्ताह की शुरुआत में उत्तरी खाड़ी तट के पास या उसके साथ बने रहने की उम्मीद है। पश्चिम की ओर टेक्सास की तरफ बढ़ते हुए यह उत्तरी फ्लोरिडा, अलबामा, मिसिसिपी और लुसियाना के क्षेत्रों में भारी बारिश लाएगा। आने वाले घंटों में इसमें कुछ और मजबूती आने की आशंका है।
बता दें कि यह अटलांटिक महासागर के इस हरिकेन सीजन का दूसरा उष्णकटिबंधीय तूफान है। इससे पहले पिछले महीने 'ट्रॉपिकल स्टॉर्म आर्थर' ने अमेरिकी दक्षिण-पूर्व हिस्से में भारी बारिश की थी। इसके अलावा, एक उष्णकटिबंधीय डिप्रेशन (Tropical Depression) भी लगातार अनिश्चित रूप से बहते हुए अमेरिकी खाड़ी तट के करीब पहुंच रहा है, जिससे सप्ताह के दौरान कई राज्यों में तूफानी लहरें, भारी बारिश और संभावित रूप से नुकसानदायक हवाएं चल सकती हैं।
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