MP के परिवहन चेकिंग पॉइंट्स पर अवैध वसूली का आरोप, AIMTC ने PM मोदी, गडकरी और CM मोहन यादव को लिखा पत्र
मध्यप्रदेश के परिवहन चेकिंग पॉइंट्स पर कथित अवैध वसूली का मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) ने 28 जुलाई को तीनों नेताओं को पत्र लिखकर नीमच के नयागांव समेत प्रदेश के सभी परिवहन चेकिंग प्वाइंटों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
AIMTC ने आरोप लगाया है कि पिछले करीब छह महीने से वाहन चालकों से नकद और निजी UPI ID के जरिए 500-500 रुपये की कथित ‘एंट्री’ वसूले जाने की शिकायतें मिल रही हैं। संगठन ने नयागांव के एक स्टिंग वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि वीडियो बनाने पर चालक से मारपीट, मोबाइल छीनने, झूठे मामले में फंसाने और भारी ऑनलाइन चालान का भय दिखाने जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं।
UPI-बैंक खातों और CCTV की जांच की मांग
AIMTC ने मांग की है कि वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों के साथ निजी UPI और बैंक खातों, CCTV फुटेज, बॉडी वॉर्न कैमरों और POS मशीनों की जांच कराई जाए। चेकिंग प्वाइंटों पर गैर-शासकीय व्यक्तियों की कथित सक्रियता की जांच की मांग भी की गई है। संगठन का कहना है कि यदि किसी संगठित नेटवर्क या संरक्षण की पुष्टि होती है तो जांच केवल मौके पर राशि लेने वालों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
हाई कोर्ट के आदेश और SOP का दिया हवाला
पत्र में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के 11 मई 2026 के आदेश और परिवहन आयुक्त की 16 अप्रैल 2025 की SOP का हवाला दिया गया है। SOP के अनुसार चेकिंग में निजी व्यक्ति शामिल नहीं हो सकता, चालानी कार्रवाई POS मशीन से होनी चाहिए और बिना विशेष कारण किसी वाहन को 15 मिनट से अधिक नहीं रोका जाना चाहिए। AIMTC का आरोप है कि पुराने चेकपोस्ट बंद होने के बावजूद कई जगह स्थायी चेकिंग प्वाइंट, गुमटी और बैरिकेड के जरिए पुरानी व्यवस्था जैसी स्थिति बनी हुई है।
AI-कैमरा और ई-चालान आधारित व्यवस्था की मांग
AIMTC ने मांग की है कि प्रदेश में परिवहन प्रवर्तन को मानव हस्तक्षेप से मुक्त कर AI, कैमरा और ई-चालान आधारित बनाया जाए। नकद या निजी UPI से किसी भी तरह की वसूली पर पूरी रोक हो और वास्तविक उल्लंघन पर डिजिटल साक्ष्य के आधार पर ही चालान किया जाए।
पत्र पर AIMTC की RTO एवं ट्रैफिक कमेटी के चेयरमैन सी.एल. मुकाती और राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सबरवाल के हस्ताक्षर हैं। इसकी प्रतिलिपि प्रदेश के परिवहन मंत्री, DGP, परिवहन सचिव, परिवहन आयुक्त, उज्जैन संभागायुक्त, नीमच कलेक्टर और SP समेत संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।
बता दें इससे पहले 18 जुलाई को फेडरेशन ऑफ बॉम्बे मोटर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स ने भी आगर मालवा के सोयत और बड़वानी के बालसमुंद चेकिंग प्वाइंट पर निजी व्यक्तियों द्वारा कथित उत्पीड़न और अवैध वसूली की शिकायत संबंधित कलेक्टरों से की थी।
US-Iran War: अमेरिकी सीनेट में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर रोक लगाने वाला प्रस्ताव खारिज, एक वोट से पीछे रहा विपक्ष
US-Iran War: अमेरिका की संसद के ऊपरी सदन यानी सीनेट में ईरान के विरुद्ध किसी भी संभावित सैन्य कदम को कानूनी दायरे में बांधने वाला प्रस्ताव पास नहीं हो सका। गुरुवार को इस अहम प्रस्ताव पर मतदान कराया गया, जिसमें यह बेहद कड़े और कांटे की टक्कर वाले मुकाबले में 49 के मुकाबले 50 मतों से नापसंद कर दिया गया। इस वोटिंग के दौरान पेन्सिलवेनिया से रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर डेव मैककॉर्मिक सदन में मौजूद नहीं रहे और उन्होंने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया।
विदेश मामलों की समिति में लंबित है मुख्य विधेयक
यह पूरा विधायी प्रस्ताव वर्तमान में अमेरिकी सीनेट की विदेश मामलों की स्थायी समिति के पास विचाराधीन है। इस प्रस्ताव को पेश करने वाले सांसद और इसके समर्थक लगातार यह कोशिश कर रहे थे कि इसे समिति से बाहर निकालकर पूरी सीनेट के समक्ष खुली चर्चा और वोटिंग के लिए रखा जाए। हालांकि, ताजा मतदान के इस नतीजे के बाद अब इस प्रस्ताव को मुख्य सीनेट पटल पर दोबारा लाने के लिए सदन के सदस्यों को नए सिरे से कसरत करनी होगी।
????????????????BREAKING: The Senate rejects a resolution to halt Trump's Iran war for the second time in two weeks, 50-49.
— Coin Bureau (@coinbureau) July 30, 2026
The vote came hours after the US launched a new round of airstrikes on Iran. pic.twitter.com/LpspoLm8Wc
राष्ट्रपति के स्वतंत्र सैन्य फैसलों पर लगती रोक
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव सीनेट के बहुमत से पारित हो जाता, तो अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए ईरान के विरुद्ध किसी भी तरह के सैन्य आक्रमण या बड़े अभियान को अंजाम देने से पहले देश की संसद (कांग्रेस) की पूर्व अनुमति लेना कानूनी रूप से बाध्यकारी हो जाता। इसका सीधा अर्थ यह होता कि राष्ट्रपति अपनी मर्जी से अकेले इस प्रकार के गंभीर सैन्य निर्णय नहीं ले सकते थे, बल्कि उन्हें हर कदम पर विधिवत संसदीय सहमति की आवश्यकता होती।
विपक्षी डेमोक्रेट्स की आक्रामक मांग
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा हाल ही में ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद से ही विपक्षी दलों के सांसदों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। विपक्ष का साफ तौर पर कहना है कि देश को किसी भी बड़े युद्ध या सैन्य संघर्ष में धकेलने से पहले अंतिम निर्णय संसद की मंजूरी के आधार पर ही लिया जाना चाहिए, ताकि सत्ता के दुरुपयोग पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
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