चारधाम यात्रा 2026 ने बनाया नया रिकॉर्ड! 114 दिन में 47 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता बोले CM धामी
उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस साल नया रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रही है। दरअसल 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ शुरू हुई यात्रा के 114 दिन पूरे होने तक 47 लाख से ज्यादा श्रद्धालु चारों धामों में दर्शन कर चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 10 अगस्त तक कुल 47 लाख 2 हजार 703 यात्री पहुंचे हैं। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 42 लाख 34 हजार 147 था। यानी इस बार अब तक 4 लाख 68 हजार 556 ज्यादा श्रद्धालु चारधाम पहुंचे हैं।
दरअसल इस बढ़ती संख्या के बीच सबसे बड़ी चुनौती मानसून का मौसम है। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण कई जगह भूस्खलन और सड़क बंद होने जैसी स्थिति बनती रहती है। इसके बावजूद प्रशासन मौसम और सड़क की स्थिति देखकर यात्रा को आगे बढ़ा रहा है। जरूरत पड़ने पर यात्रियों को रोकने और सुरक्षित जगहों पर ठहराने की व्यवस्था भी की जा रही है।
चारधाम यात्रा में बद्रीनाथ सबसे आगे
वहीं इस साल अब तक सबसे ज्यादा श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम पहुंचे हैं। 10 अगस्त तक यहां 16 लाख 12 हजार 112 यात्रियों ने दर्शन किए। इसके बाद केदारनाथ में 14 लाख 50 हजार 116, गंगोत्री में 7 लाख 37 हजार 629 और यमुनोत्री में 6 लाख 62 हजार 347 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इसके अलावा हेमकुंट साहिब में भी 2 लाख 40 हजार 499 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं।
बद्रीनाथ की यात्रा इस बार खास तौर पर तेजी से आगे बढ़ी है। 23 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा के 110 दिन पूरे होने तक 16.12 लाख से ज्यादा लोग दर्शन कर चुके थे। पिछले साल इतने ही समय में करीब 12.61 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे। यानी बद्रीनाथ में इस बार करीब 3.50 लाख से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। सोमवार को भी मौसम खराब होने और प्रशासन की ओर से लगातार अलर्ट जारी रहने के बावजूद 15 हजार 376 श्रद्धालु चारधाम पहुंचे। इनमें बद्रीनाथ में 9,559, केदारनाथ में 4,170, गंगोत्री में 1,204 और यमुनोत्री में 443 यात्रियों ने दर्शन किए।
सुरक्षा को लेकर 24 घंटे अलर्ट
दरअसल चारधाम यात्रा के दौरान सबसे बड़ी चुनौती पहाड़ी मौसम और सड़क की स्थिति को लेकर रहती है। बारिश के दौरान अचानक भूस्खलन होने, नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने या रास्ते बंद होने का खतरा रहता है। ऐसे में प्रशासन का फोकस केवल ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को धाम तक पहुंचाने पर नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखने पर भी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग को लगातार अलर्ट मोड में रखा गया है। जिलाधिकारियों को भी अपने-अपने इलाकों में मौसम और यात्रा मार्गों की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा जवानों की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी तरह की परेशानी होने पर यात्रियों की मदद तुरंत की जा सके। सरकार के मुताबिक चारों धामों और यात्रा पड़ावों पर श्रद्धालुओं के रुकने, खाने और दूसरी जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। अगर किसी मार्ग पर भूस्खलन या दूसरी आपदा के कारण आवाजाही रोकनी पड़ती है, तो यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर रोकने के इंतजाम भी किए जा रहे हैं।
जानिए क्या बोले सीएम धामी?
सीएम धामी ने कहा कि ‘चारधाम यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मानसून की सक्रियता को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। जिलाधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य तत्काल शुरू हो सके। भूस्खलन या अन्य किसी भी प्रकार की आपदा की स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर ठहराने के निर्देश दिए गए हैं। श्रद्धालुओं को मौसम के मिजाज को देखकर ही यात्रा करने की सलाह दी जा रही है।’
नया रिकॉर्ड बनने की उम्मीद
वहीं चारधाम यात्रा में हर साल देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन इस बार शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि लोगों की संख्या पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है। 114 दिनों में ही 47 लाख से ज्यादा यात्रियों का धामों तक पहुंचना इस बढ़ते रुझान को दिखाता है। इस साल की यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है और आने वाले समय में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि मानसून के दौरान मौसम की स्थिति यात्रा की रफ्तार पर असर डाल सकती है। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ सुरक्षा और सुविधाओं का संतुलन बना रहे।
तमक नाले में ह्यूम पाइप डालकर बनाया गया अस्थाई रास्ता, वाहनों की आवाजाही हुई शुरू
चमोली जिले की नीती घाटी में भारी बारिश के कारण तमक नाला अचानक उफान पर आ गया था। दरअसल तेज बहाव की चपेट में आने से यहां बना वैली ब्रिज बह गया, जिसके बाद इस इलाके में वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई थी। घटना के बाद जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं और रास्ता बहाल करने का काम शुरू किया। लगातार प्रयास के बाद तमक नाले में ह्यूम पाइप डालकर अस्थाई मोटर मार्ग तैयार किया गया। इसके बाद इस रास्ते से वाहनों की आवाजाही फिर शुरू हो गई है।
दरअसल तमक नाले में वैली ब्रिज बहने के बाद सबसे बड़ी चुनौती सड़क संपर्क बहाल करना था। नीती घाटी का यह इलाका पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्र में आता है, जहां लगातार बारिश के बीच रास्ते को जल्द खोलना प्रशासन के लिए आसान नहीं था। इसके बावजूद संबंधित विभागों की टीमों ने मौके पर लगातार काम किया। ह्यूम पाइप डालकर तैयार किए गए अस्थाई रास्ते से फिलहाल वाहनों को निकाला जा रहा है। हालांकि, प्रशासन ने साफ किया है कि इस रास्ते से गुजरते समय वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।
स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली
अस्थाई मोटर मार्ग तैयार होने से स्थानीय लोगों और जरूरी काम से आने-जाने वाले वाहनों को बड़ी राहत मिली है। इससे प्रभावित क्षेत्र में आवाजाही पूरी तरह बंद रहने की स्थिति खत्म हुई है। लेकिन यह रास्ता फिलहाल स्थाई समाधान नहीं है। मौसम की स्थिति और तमक नाले के जलस्तर को देखते हुए यहां सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। प्रशासन की टीमें लगातार मौके की निगरानी कर रही हैं और हालात के हिसाब से जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
दूसरे दिन भी लापता व्यक्ति की तलाश
वहीं वैली ब्रिज बहने की घटना के बाद एक व्यक्ति के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। उसकी तलाश में दूसरे दिन भी बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। जिला प्रशासन के साथ पुलिस, भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल यानी ITBP, NDRF, SDRF और सीमा सड़क संगठन की टीमें संयुक्त रूप से सर्च ऑपरेशन में लगी हुई हैं।
दरअसल रेस्क्यू टीमें तमक नाले के आसपास नदी किनारे और ऐसे संभावित स्थानों पर तलाश कर रही हैं, जहां तेज पानी के बहाव के बाद किसी व्यक्ति के पहुंचने की संभावना हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्र में मौसम लगातार चुनौती बना हुआ है। बारिश के कारण नदी और नालों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है, इसलिए रेस्क्यू टीमों को भी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अभियान चलाना पड़ रहा है।
प्रशासन की ओर से मौके पर मौजूद सभी टीमों को हालात के अनुसार दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। अधिकारियों की नजर मौसम और तमक नाले के जलस्तर पर बनी हुई है। लापता व्यक्ति की तलाश के साथ-साथ प्रभावित इलाके में किसी और तरह की परेशानी न हो, इसे लेकर भी निगरानी की जा रही है।
प्रशासन ने लोगों से की सावधानी की अपील
वहीं नीती घाटी में भारी बारिश के बाद तमक नाले में आए उफान ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में मौसम की चुनौती को सामने ला दिया है। ऐसे क्षेत्रों में सड़क और पुल जैसी सुविधाएं सीधे तौर पर मौसम और नदी-नालों के जलस्तर पर निर्भर रहती हैं। वैली ब्रिज के बहने के बाद प्रशासन ने जिस तेजी से अस्थाई रास्ता तैयार किया है, उससे आवाजाही बहाल करने में मदद मिली है, लेकिन बारिश के दौरान इस रास्ते पर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है।
जिला प्रशासन ने स्थानीय लोगों और वाहन चालकों से अपील की है कि अस्थाई मोटर मार्ग से गुजरते समय जल्दबाजी न करें और मौके पर तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें। अगर तमक नाले का जलस्तर बढ़ता है या मौसम ज्यादा खराब होता है तो सुरक्षा के लिहाज से आवाजाही को लेकर प्रशासन को फिर से फैसला लेना पड़ सकता है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Mp Breaking News








