ताड़ासन से वृक्षासन तक, गर्भवती महिलाओं के लिए पहली तिमाही में योगासन, जानें क्या कहता है आयुष मंत्रालय
नई दिल्ली, 9 मई (आईएएनएस)। मदर्स डे (10 मई) के साथ ही विश्व योग दिवस भी नजदीक आ रहा है। ऐसे में आयुष मंत्रालय लगातार नई जानकारी देकर लोगों को योग के प्रति जागरूक कर रहा है और दिनचर्या में योगासनों को शामिल करने की अपील कर रहा है। इसी कड़ी में एक्सपर्ट्स ने गर्भवती महिलाओं के लिए पहली तिमाही में किए जाने वाले सौम्य योगासनों के बारे में विशेष जानकारी दी है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, गर्भावस्था लगातार बदलावों का सफर है। खासकर पहली तिमाही में महिलाओं के शरीर और मन को नए शारीरिक, भावनात्मक और हार्मोनल अनुभवों के साथ तालमेल बिठाना पड़ता है। इस दौरान हल्का-फुल्का योग और ध्यानपूर्ण प्राणायाम अभ्यास करने से गर्भवती माताओं को शांति, संतुलन और सुकून का एहसास होता है। मदर्स डे पर हर गर्भवती मां की ताकत, देखभाल और सहनशक्ति का जश्न मनाते हुए उनके स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
पहली तिमाही शारीरिक और भावनात्मक बदलावों का महत्वपूर्ण दौर होता है। इस समय हल्के प्राणायाम से माताएं ज्यादा केंद्रित, रिलैक्स और खुद से जुड़ा महसूस करती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, गर्भावस्था में जोरदार या कठिन आसनों से बचना चाहिए। इसके बजाय आसान योगासन करने चाहिए जो शरीर पर हल्का असर डालें और मन को शांत रखें। पहली तिमाही में सुझाए गए योगासन में ताड़ासन से लेकर शवासन तक शामिल हैं।
ताड़ासन खड़े होकर शरीर को सीधा रखने वाला आसन। यह मुद्रा शरीर की मुद्रा सुधारती है और थकान दूर करती है। वहीं, वृक्षासन संतुलन बढ़ाने वाला आसन है। इसे दीवार का सहारा लेकर भी किया जा सकता है। यह मन को स्थिर करता है। दंडासन सीधे बैठकर पैरों को आगे फैलाने वाला आसन है। यह पीठ की मजबूती को भी बढ़ाता है। गर्भवती महिलाओं के लिए सुखासन का अभ्यास भी फायदेमंद है। यह आराम की मुद्रा में बैठना कहलाता है। ध्यान और प्राणायाम के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। वहीं, शवासन पूरी तरह से रिलैक्स होने वाला आसन है। यह तनाव कम कर बेहतर नींद में मदद करता है।
आयुष मंत्रालय का कहना है कि इन आसनों को धीरे-धीरे और सावधानी से करना चाहिए। डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। सांस पर पूरा ध्यान दें और शरीर की सीमा से आगे न बढ़ें। मंत्रालय गर्भवती महिलाओं से अपील करता है कि वे अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करें। इससे न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है। यह माता व शुिशु दोनों के लिए फायदेमंद है।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा ने ‘सभी के लिए एआई’ विजन का किया समर्थन
वाशिंगटन, 9 मई (आईएएनएस)। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने यूएस-भारत एआई और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी फोरम में कहा कि भारत, अमेरिका के साथ तकनीकी सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ एआई के लोकतंत्रीकरण पर जोर दे रहा है।
यहां एक कार्यक्रम में बोलते हुए क्वात्रा ने कहा कि भारत में हाल ही में आयोजित एआई समिट ने वैश्विक नेताओं, वैज्ञानिकों और उद्योग जगत को एक मंच पर लाकर साझा विजन तैयार किया। उन्होंने कहा, “आखिरकार इसका उद्देश्य एआई का लोकतंत्रीकरण था।”
उन्होंने इस विचार को एआई के परिणामों तक अधिक पहुंच के रूप में समझाया। उन्होंने कहा, “अगर इस तकनीक का अंतिम उत्पाद इंटेलिजेंस है, तो उस इंटेलिजेंस का प्रसार लोगों के फायदे के लिए लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना चाहिए।”
क्वात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण साफ है कि एआई हर किसी के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह विचार नई दिल्ली घोषणा-पत्र में भी शामिल था।
उन्होंने कहा, “समिट में वैश्विक इनोवेशन सिस्टम में कन्वर्जेंस देखने को मिला। आपने कई इनोवेशन इकोसिस्टम का एक साथ आना देखा।”
क्वात्रा ने कहा कि वैश्विक रिसर्च कम्युनिटी के साथ 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष और सरकारों के प्रमुख भी इसमें शामिल हुए।
उन्होंने भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा, “हम इस क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच एक संयुक्त सहयोग फ्रेमवर्क पर भी हस्ताक्षर कर सकते हैं। यह साझेदारी तकनीक, इनोवेशन और मैन्युफैक्चरिंग तक फैली हुई है। ये संबंध सप्लाई चेन और आर्थिक गतिविधियों को आकार दे रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इतनी तेजी और इतने बड़े पैमाने पर विकसित हो रहा है कि उसे पूरी तरह समझना अभी भी बहुत मुश्किल है।”
क्वात्रा ने कहा कि प्रगति को फायदों की एक शृंखला के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं इसे एक अकेली सफलता के तौर पर नहीं देखना चाहूंगा, बल्कि इसे लगातार आगे बढ़ने वाली प्रक्रिया के रूप में देखता हूं।”
उन्होंने पूंजी, तकनीक और प्रतिभा को जोड़ने वाले उदाहरण के तौर पर सेमीकंडक्टर निवेश का जिक्र किया। क्वात्रा ने इस बात पर भी जोर दिया कि एआई सिर्फ सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “यह हार्डवेयर की भी कहानी है, चाहे वह बिजली हो, डेटा सेंटर हों या जरूरी खनिज।”
भविष्य में सहयोग को लेकर क्वात्रा ने क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन और न्यूक्लियर फ्यूजन जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के बीच रिसर्च सहयोग, इनोवेशन का एक प्रमुख चालक बना हुआ है।
क्वात्रा ने गवर्नेंस और सुरक्षा पर भी बात की और कहा, “किसी भी तरह के गलत इरादे वाले हमलों से सुरक्षा हमेशा प्राथमिकता होती है।”
उन्होंने कहा कि भारत इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए सुरक्षित, जोखिम-मुक्त और भरोसेमंद एआई पर फोकस कर रहा है।
भारत और अमेरिका ने हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण तकनीकों में सहयोग बढ़ाया है। इसमें सेमीकंडक्टर, एआई और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। दोनों देश उद्योगों में इनोवेशन और डिप्लॉयमेंट को बढ़ावा देने के साथ-साथ भरोसेमंद और सुरक्षित सिस्टम के लिए समान मानक विकसित करने पर काम कर रहे हैं।
--आईएएनएस
केके/एएस
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