Investment Tips: ग्लोबल तनाव से पोर्टफोलियो पर पड़ रहा असर, जानें कैसे सुरक्षित और फायदे में रहें?
दुनिया भर में बढ़ते युद्ध, ट्रेड टेंशन और शेयर बाजार की उठापटक ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कई लोग समझ नहीं पा रहे कि ऐसे माहौल में पैसा बाजार में बनाए रखें या बाहर निकल जाएं। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाजार में अनिश्चितता कोई नई बात नहीं और घबराहट में लिया गया फैसला लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकता।
मार्केट एक्सपर्ट्स कहते हैं कि निवेश का सबसे बड़ा नियम धैर्य और अनुशासन है। जो निवेशक हर गिरावट में घबराकर फैसले बदलते हैं, वे अक्सर अच्छे रिटर्न से चूक जाते। वहीं जो लोग लंबी अवधि का नजरिया रखते हैं, उन्हें बाजार की रिकवरी का फायदा मिलता।
बाजार में बने रहने से ही फायदा मिलता
फंड्स इंडिया के सीनियर रिसर्च मैनेजर जिरल मेहता के मुताबिक, कोई भी यह नहीं बता सकता कि भू-राजनीतिक तनाव कब खत्म होगा या बाजार कितनी गिरावट देखेगा। यही वजह है कि निवेशकों को यह मान लेना चाहिए कि अनिश्चितता बाजार का स्थायी हिस्सा। उन्होंने कहा कि बाजार में उतार-चढ़ाव से बचना संभव नहीं, लेकिन सही प्लान बनाकर जोखिम को संभाला जा सकता।
उन्होंने बताया कि पिछले 46 सालों के सेंसेक्स रिकॉर्ड देखें तो 10 से 20 फीसदी की गिरावट आम बात रही। इसके बावजूद चार में से तीन साल बाजार ने पॉजिटिव रिटर्न दिया। यानी गिरावट के बाद रिकवरी भी आती और लंबे समय तक टिके रहने वाले निवेशकों को फायदा मिलता।
बाजार में ऑल क्लियर सिग्नल का इंतजार सही नहीं
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सबसे बड़ी गलती बाजार में ऑल क्लियर सिग्नल का इंतजार करना है। जब तक निवेशकों को सब कुछ सुरक्षित नजर आता है, तब तक बाजार काफी ऊपर जा चुका होता। इसलिए निवेशकों को समय पकड़ने की बजाय नियमित और संतुलित निवेश रणनीति अपनानी चाहिए।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव के दौरान आई गिरावट कई बार लंबे समय के निवेशकों के लिए अच्छा मौका बन जाती है। उनका मानना है कि बाजार से पूरी तरह बाहर रहना भी जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि तेजी के कुछ बड़े दिन ही लंबे समय का रिटर्न तय करते हैं।
इक्विटी और डेट के बीच सही संतुलन जरूरी
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशकों को इक्विटी और डेट के बीच सही बैलेंस बनाए रखना चाहिए। अगर एसेट एलोकेशन 5 फीसदी से ज्यादा बदल जाए तो पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करना चाहिए। इसके अलावा एक साथ बड़ा निवेश करने की बजाय चरणबद्ध तरीके से पैसा लगाना बेहतर माना जाता।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि अलग-अलग सेक्टर, एसेट क्लास और देशों में निवेश फैलाकर रखना समझदारी। साथ ही मजबूत बैलेंस शीट और स्थिर कमाई वाली कंपनियों पर भरोसा करना चाहिए। ऐसे समय में कैश या लिक्विडिटी बनाए रखना भी जरूरी है ताकि गिरावट के दौरान अच्छे मौके का फायदा उठाया जा सके।
(प्रियंका कुमारी)
(Disclaimer: ये आर्टिकल सामान्य जानकारी पर आधारित है। हरिभूमि इसकी पुष्टि नहीं करता है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी तरह का फैसला लेने से पहलें, अपने वित्तीय सलाहकार से संपर्क करें)
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