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Vishwakhabram: China में कृषि मंत्री के बाद अब दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मिला मृत्युदंड, भ्रष्टाचारियों को कतई नहीं बख्शते Xi Jinping

चीन में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। चीन की सैन्य अदालत ने पूर्व रक्षा मंत्रियों ली शांगफू और वेई फेंघे को रिश्वतखोरी और सत्ता के दुरुपयोग के मामलों में दो वर्ष की मोहलत के साथ मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस व्यापक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत सेना, प्रशासन, न्याय व्यवस्था और सरकारी कंपनियों में फैले भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई की जा रही है।

चीनी सरकारी समाचार संस्था शिन्हुआ के अनुसार दोनों पूर्व रक्षा मंत्रियों को आजीवन राजनीतिक अधिकारों से वंचित कर दिया गया है और उनकी सारी निजी संपत्ति जब्त कर ली गई है। दो वर्ष की मोहलत वाली मौत की सजा का अर्थ यह है कि यदि दोषी जेल में अच्छा व्यवहार करते हैं तो उनकी सजा बाद में बिना पैरोल वाली उम्रकैद में बदली जा सकती है। चीन में यह व्यवस्था लंबे समय से लागू है और विशेष रूप से बड़े भ्रष्टाचार मामलों में इसका उपयोग किया जाता है।

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हम आपको याद दिला दें कि ली शांगफू वर्ष 2023 में केवल सात महीने तक रक्षा मंत्री रहे थे। इससे पहले वह सेना के उपकरण खरीद विभाग के प्रमुख थे, जहां उनके पास विशाल सैन्य बजट और हथियार खरीद से जुड़ी संवेदनशील जिम्मेदारियां थीं। जांच में उन पर आरोप लगा कि उन्होंने नियुक्तियों और रक्षा सौदों में अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले भारी रिश्वत ली। वहीं उनके पूर्ववर्ती वेई फेंघे ने पांच वर्षों तक रक्षा मंत्री के रूप में काम किया और इससे पहले वह चीन की रॉकेट फोर्स के प्रमुख रह चुके थे, जो चीन के परमाणु हथियारों की जिम्मेदारी संभालती है। उन पर भी बड़े पैमाने पर रिश्वत लेने और अधिकारियों की नियुक्तियों में पक्षपात करने के आरोप सिद्ध हुए।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों शीर्ष सैन्य नेताओं को इतनी कठोर सजा दिया जाना केवल भ्रष्टाचार विरोधी कदम नहीं, बल्कि सेना पर राजनीतिक नियंत्रण मजबूत करने की रणनीति भी है। पिछले कुछ वर्षों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से जुड़े सौ से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को हटाया गया है या उनके खिलाफ जांच शुरू हुई है। इनमें कई अधिकारी अचानक सार्वजनिक जीवन से गायब हो गए और बाद में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले सामने आए।

हम आपको बता दें कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वर्ष 2012 में सत्ता संभालने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को अपनी राजनीति का मुख्य आधार बनाया। उन्होंने बार बार कहा कि भ्रष्टाचार कम्युनिस्ट पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इस अभियान के तहत मंत्री, सैन्य अधिकारी, न्यायपालिका से जुड़े लोग और सरकारी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी तक कार्रवाई की जद में आए हैं। चीन के सरकारी आंकड़ों के अनुसार लाखों अधिकारियों की जांच हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोगों को सजा दी गई है।

हाल के वर्षों में कई चर्चित मामलों ने चीन की सख्त न्याय व्यवस्था को दुनिया के सामने रखा है। वर्ष 2024 में भीतरी मंगोलिया के पूर्व अधिकारी ली जियानपिंग को 421 मिलियन डॉलर से अधिक के भ्रष्टाचार मामले में फांसी दे दी गई थी। इसे चीन के इतिहास का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार मामला बताया गया। इसी तरह सरकारी वित्तीय कंपनी के पूर्व अधिकारी बाई थ्येनहुई को 157 मिलियन डॉलर की रिश्वत लेने के मामले में मौत की सजा पर अमल करते हुए फांसी दी गई।

कृषि मंत्री रह चुके तांग रेनजियान को भी लगभग 38 मिलियन डॉलर की रिश्वत लेने के मामले में दो वर्ष की मोहलत के साथ मौत की सजा सुनाई गई। जांच में सामने आया कि उन्होंने सरकारी परियोजनाओं, ठेकों और नियुक्तियों में अनुचित लाभ पहुंचाकर भारी संपत्ति अर्जित की। इसी तरह पूर्व न्याय मंत्री तांग यीचुन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। अदालत ने कहा कि उन्होंने जमीन सौदों, कंपनियों की सूचीबद्धता और न्यायिक मामलों में हस्तक्षेप के बदले करोड़ों युआन की रिश्वत ली।

इन कार्रवाइयों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहस छेड़ दी है। कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की सेना के शीर्ष स्तर पर फैला भ्रष्टाचार उसके सैन्य ढांचे, हथियार खरीद प्रणाली और परमाणु कमान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। विशेष रूप से उस समय जब हिंद प्रशांत क्षेत्र में सामरिक प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है, चीन के सैन्य नेतृत्व में लगातार हो रही उथल पुथल को गंभीर संकेत माना जा रहा है।

दूसरी ओर आलोचकों का कहना है कि भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का उपयोग राजनीतिक विरोधियों को हटाने और सत्ता केंद्रीकरण के लिए भी किया जा रहा है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शी जिनपिंग अपने विरोधी गुटों को कमजोर करने के लिए भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रभावी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि चीन की सरकार इस आरोप को खारिज करती रही है और उसका कहना है कि कानून के सामने सभी समान हैं।

हम आपको बता दें कि चीन में मौत की सजा की परंपरा बहुत पुरानी है। वहां हत्या, मादक पदार्थों की तस्करी और बड़े भ्रष्टाचार जैसे अपराधों में आज भी मौत की सजा दी जाती है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार दुनिया में सबसे अधिक फांसियां चीन में ही दी जाती हैं, हालांकि वास्तविक आंकड़े सरकारी गोपनीयता के कारण सार्वजनिक नहीं किए जाते। एमनेस्टी इंटरनेशनल का मानना है कि हर वर्ष हजारों लोगों को चीन में फांसी दी जाती है।

हाल ही में एक और मामला दुनिया भर में चर्चा का विषय बना था जिसमें हैकोउ शहर के पूर्व मेयर के यहां से कथित रूप से सोने की ईंटों और नकदी का विशाल भंडार मिलने की खबरें सामने आईं थीं। सोशल मीडिया पर फैली तस्वीरों और वीडियो में भारी मात्रा में सोना और नकदी दिखाई गई। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी, लेकिन अदालत ने यह जरूर माना कि अधिकारी ने सरकारी परियोजनाओं और जमीन सौदों में भारी भ्रष्टाचार किया था तथा अरबों डॉलर की संपत्ति जब्त की गई।

बहरहाल, विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की सख्त सजाओं से भ्रष्टाचार पर कुछ हद तक अंकुश जरूर लगा है, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई। कई विद्वानों का मानना है कि जब तक स्वतंत्र निगरानी तंत्र और पारदर्शी संस्थागत व्यवस्था विकसित नहीं होगी, तब तक केवल अभियान आधारित कार्रवाई लंबे समय में पर्याप्त साबित नहीं होगी। इसके बावजूद चीन की सरकार अपने अभियान को लगातार और अधिक कठोर बनाती दिखाई दे रही है।

-नीरज कुमार दुबे

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ओवेरियन कैंसर के लक्षण दिखते हैं आम दिक्कतों जैसे, जानिए कैसे पहचाने जा सकते हैं Ovarian Cancer के साइलेंट साइन

Ovarian Cancer Ke Lakshan: ओवरीज में होने वाले कैंसर को ओवेरियन कैंसर कहते हैं. इस कैंसर के लक्षण आमतौर पर स्पष्ट दिखाई नहीं देते हैं और जबतक कैंसर का पता चलता है स्टेज 2 या 3 आ जाती है. ऐसे में यहां जानिए शरीर में दिखने वाले किन लक्षणों को कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए.

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  Sports

IPL में अब नहीं चलेगी मनमानी! BCCI का बड़ा एक्शन, Rajiv Shukla बोले- Players पर लगेगी लगाम

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने शुक्रवार को कहा कि शीर्ष क्रिकेट निकाय इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दौरान खिलाड़ियों के लिए नए एक्सेस कंट्रोल नियम लागू कर रहा है, जिसका उद्देश्य अनुशासन को मजबूत करना और टूर्नामेंट प्रोटोकॉल का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना है। लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए शुक्ला ने कहा कि आईपीएल के नए नियम खिलाड़ियों की पहुंच को सीमित करेंगे और होटलों, टीम बसों और अन्य प्रतिबंधित क्षेत्रों में क्रिकेटरों के साथ अनधिकृत बैठकों को रोकेंगे। यह कदम पारदर्शिता में सुधार लाने और टूर्नामेंट के दौरान समग्र सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
 

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बीसीसीआई के उपाध्यक्ष ने कहा कि बीसीसीआई नए नियम बना रहा है। खिलाड़ियों की पहुंच नियंत्रित की जाएगी; आईपीएल की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अनधिकृत लोगों को खिलाड़ियों से मिलने की अनुमति नहीं दी जाएगी, न तो होटलों में और न ही बसों में। उनकी यह टिप्पणी बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया के उस बयान के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि मौजूदा सीजन में खिलाड़ियों, टीम अधिकारियों और अनधिकृत व्यक्तियों से जुड़ी कई अनियमितताओं के मद्देनजर बोर्ड सभी आईपीएल फ्रेंचाइजी को सख्त सलाह जारी करेगा।

सैकिया ने खुलासा किया कि बीसीसीआई ने स्थापित भ्रष्टाचार-विरोधी और सुरक्षा प्रोटोकॉल के कई उल्लंघन देखे हैं, जिनमें अनधिकृत व्यक्तियों का टीम सदस्यों के साथ आना, टीम होटलों में प्रवेश करना और खिलाड़ियों या अधिकारियों के कमरों में घुसना शामिल है। उन्होंने फ्रेंचाइजी मालिकों और अधिकारियों द्वारा खिलाड़ियों से प्रतिबंधित क्षेत्रों में बातचीत करने पर भी चिंता व्यक्त की, जहां आईपीएल नियमों के तहत इस तरह की पहुंच की अनुमति नहीं है।
 

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मामले को गंभीर बताते हुए, सैकिया ने कहा कि बीसीसीआई और आईपीएल शासी निकाय टूर्नामेंट प्रोटोकॉल के अनुपालन को मजबूत करने के लिए एक औपचारिक सलाह जारी करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी उल्लंघन पर बोर्ड द्वारा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
 
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Fri, 08 May 2026 18:03:38 +0530

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