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Rajasthan Teacher Recruitment 2026: शिक्षक भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों को बड़ा तोहफा, रिजल्ट से पहले बढ़ाई गईं 2 हजार सीटें

Rajasthan Teacher Recruitment 2026: राजस्थान में अध्यापक बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने प्राइमरी टीचर भर्ती 2026 में पदों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है. बोर्ड की ओर से जारी संशोधित विज्ञप्ति के अनुसार अब भर्ती में 2 हजार अतिरिक्त पद जोड़े गए हैं. इस फैसले के बाद अभ्यर्थियों में खुशी का माहौल है, क्योंकि इससे चयन के अवसर पहले से ज्यादा बढ़ गए हैं.

अब 7 हजार पदों पर होंगे चयन

इस भर्ती प्रक्रिया के तहत पहले प्रारंभिक शिक्षा विभाग में 5 हजार पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था. वहीं संस्कृत शिक्षा विभाग के लिए 636 पद निर्धारित किए गए थे. भर्ती का मूल नोटिफिकेशन 6 नवंबर 2025 को जारी हुआ था. अब बोर्ड ने संशोधित नोटिफिकेशन जारी करते हुए प्रारंभिक शिक्षा विभाग के पदों की संख्या बढ़ाकर 7 हजार कर दी है. यानी कुल मिलाकर भर्ती प्रक्रिया में बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को फायदा मिलने वाला है. 

नॉन टीएसपी और टीएसपी क्षेत्र के लिए अलग-अलग पद

बोर्ड द्वारा जारी जानकारी के अनुसार कुल पदों का वर्गीकरण गैर अनुसूचित क्षेत्र (नॉन टीएसपी) और अनुसूचित क्षेत्र (टीएसपी) के आधार पर किया गया है. इनमें नॉन टीएसपी क्षेत्र के लिए 6146 पद निर्धारित किए गए हैं. वहीं टीएसपी क्षेत्र के लिए 854 पद तय किए गए हैं. इससे अलग-अलग क्षेत्रों के अभ्यर्थियों को आरक्षण के अनुसार अवसर मिलेंगे.

सामान्य वर्ग सहित सभी कैटेगरी को फायदा

भर्ती में विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षित पदों का भी विवरण जारी किया गया है. नॉन टीएसपी क्षेत्र में सामान्य वर्ग के लिए 2237 पद आरक्षित किए गए हैं. इसके अलावा ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए 612 पद तय किए गए हैं. अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग को 970 पद दिए गए हैं. वहीं अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए 725 पद आरक्षित हैं. ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 1271 पद रखे गए हैं. वहीं अति पिछड़ा वर्ग (एमबीसी) के लिए 306 पद निर्धारित किए गए हैं. इसके साथ ही 12 जिलों के सहरिया जनजाति अभ्यर्थियों के लिए 25 पद अलग से आरक्षित किए गए हैं.

जालौर जिले में सबसे ज्यादा पद

इस भर्ती प्रक्रिया में सबसे अधिक पद जालौर जिले में बताए जा रहे हैं. जानकारी के अनुसार, जिले में कुल 411 पद निर्धारित किए गए हैं. इससे वहां के अभ्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है. 

कब हुई थी भर्ती परीक्षा? 

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से इस भर्ती परीक्षा का आयोजन जनवरी 2026 में किया गया था. परीक्षा 17 जनवरी और 20 जनवरी को आयोजित हुई थी. परीक्षा में बड़ी संख्या में उम्मीदवार शामिल हुए थे. अब सभी अभ्यर्थियों को रिजल्ट का इंतजार है. ऐसे समय में पदों की संख्या बढ़ना उम्मीदवारों के लिए राहत भरी खबर माना जा रहा है. इससे मेरिट लिस्ट में ज्यादा अभ्यर्थियों को मौका मिलने की संभावना बढ़ गई है.

अभ्यर्थियों में खुशी का माहौल

भर्ती में 2 हजार अतिरिक्त पद जुड़ने के बाद सोशल मीडिया पर भी उम्मीदवार अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं. कई अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से वे पद बढ़ाने की मांग कर रहे थे. अब सरकार और बोर्ड के इस फैसले से उन्हें उम्मीद की नई किरण मिली है. विशेषज्ञों का मानना है कि पदों की संख्या बढ़ने से प्रतियोगिता का दबाव कुछ कम होगा और ज्यादा योग्य उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी पाने का अवसर मिलेगा.

राजस्थान प्राइमरी टीचर भर्ती 2025 में पदों की संख्या बढ़ाना हजारों युवाओं के लिए राहत की खबर है. भर्ती में अब पहले से अधिक उम्मीदवारों के चयन का रास्ता साफ हो गया है. ऐसे में सभी अभ्यर्थियों की नजर अब भर्ती परीक्षा के रिजल्ट पर टिकी हुई है.

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भारत में लोकल लेवल हेल्थकेयर को मिलेगी मजबूती, नई ट्रेनिंग फ्रेमवर्क का ऐलान

नई दिल्ली, 8 मई (आईएएनएस)। भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में हाल ही में एक बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने इंटीग्रेटेड ट्रेनिंग फॉर प्राइमरी हेल्थकेयर टीम्स की शुरुआत की है, जो सीधे तौर पर गांव-गांव और शहरों के आखिरी छोर तक काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को और ज्यादा सक्षम बनाने से जुड़ा है। यह घोषणा हाल ही में हुए 10वें राष्ट्रीय समिट नवाचार और समावेशिता: भारत के स्वास्थ्य भविष्य को आकार देने वाली सर्वोत्तम प्रथाएं के दौरान की गई।

अब तक होता यह था कि अलग-अलग स्वास्थ्य योजनाओं के लिए अलग-अलग ट्रेनिंग दी जाती थी, जिससे कई बार प्रक्रिया बिखरी हुई लगती थी। अब इस नई व्यवस्था में सभी ट्रेनिंग को एक ही ढांचे में जोड़ दिया गया है। यानी अब प्राथमिक स्वास्थ्य टीमों को एक ही जगह से, एक ही सिस्टम के तहत पूरी और व्यवस्थित ट्रेनिंग मिलेगी। इससे उनका काम और ज्यादा आसान और प्रभावी हो जाएगा।

भारत में पिछले कुछ सालों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर काफी ध्यान दिया गया है। खासकर आयुष्मान भारत योजना के तहत देशभर में आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए गए हैं, जिनका मकसद लोगों को उनके घर के पास ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं देना है। इसका फायदा यह हुआ है कि अब लोगों को छोटे-मोटे इलाज के लिए दूर अस्पतालों तक नहीं जाना पड़ता। इन आरोग्य मंदिरों के साथ-साथ गांवों में कई सामुदायिक समूह भी काम कर रहे हैं, जैसे कि जन आरोग्य समितियां, महिला आरोग्य समितियां और गांव की स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समितियां। ये सभी मिलकर स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में मदद कर रहे हैं।

सरकार का मानना है कि किसी भी देश की स्वास्थ्य व्यवस्था तभी मजबूत हो सकती है जब उसकी जड़ यानी प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत हो। यही वह स्तर है जहां सबसे पहले मरीज पहुंचता है। अगर यहीं पर सही इलाज, सही सलाह और सही समय पर मदद मिल जाए, तो बड़े अस्पतालों पर बोझ भी कम हो जाता है।

इस पहल में डिजिटल तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। जैसे कि आई गॉट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के जरिए अब ये स्वास्थ्य कर्मी ऑनलाइन ट्रेनिंग ले सकेंगे। इससे वे समय-समय पर नई जानकारी सीखते रहेंगे और अपने काम को और बेहतर बना सकेंगे।

सरकार का लक्ष्य सिर्फ इलाज देना नहीं है बल्कि लोगों को बीमार होने से पहले ही जागरूक करना भी है। इसलिए इस नई व्यवस्था में रोकथाम, समय पर पहचान और सही इलाज तीनों पर जोर दिया गया है।

यह पहल दो महत्वपूर्ण तरीकों से अनूठी है। पहला, यह समुदाय-आधारित स्वास्थ्य सेवा कर्मचारियों की क्षमता को बढ़ाती है, ताकि वे ऐसी देखभाल प्रदान कर सकें जो सहानुभूतिपूर्ण, संवेदनशील और उच्च गुणवत्ता वाली हो। दूसरा, यह उन महिलाओं को सशक्त बनाती है जो प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ हैं इस कार्यबल में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं ही हैं, जिनमें आशा, एएनएम और सीएचओ शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी लगातार नारी शक्ति के महत्व पर जोर दिया है और यह पहल उनके उसी विजन का एक सशक्त उदाहरण है।

यह नई ट्रेनिंग व्यवस्था सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि एक बड़ा बदलाव है। इससे स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता बढ़ेगी, मरीजों का भरोसा मजबूत होगा और पूरा सिस्टम ज्यादा संगठित और प्रभावी बनेगा। खास बात यह है कि इससे महिलाओं की भूमिका और भी मजबूत होगी, क्योंकि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में उनकी भागीदारी बहुत ज्यादा है।

--आईएएनएस

पीआईएम/पीएम

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  Sports

Mohammed Shami की टिप्स से मिला Virat Kohli का विकेट? युवा पेसर प्रिंस यादव ने खोला राज

प्रिंस यादव ने कहा कि विराट कोहली को दो गेंदों पर शून्य पर आउट करना एक खास पल था, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं ज्यादा मायने लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) की रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) पर जीत रखती है। आरसीबी के रन-चेज़ के दौरान, प्रिंस ने शुरुआती झटके में ही कोहली को सस्ते में आउट कर दिया, जिससे एलएसजी ने गुरुवार रात लखनऊ में खेले गए हाई-स्कोरिंग इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 के मुकाबले में रोमांचक नौ रन की जीत दर्ज की।
 

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उस बहुमूल्य विकेट पर विचार करते हुए, युवा तेज गेंदबाज ने कहा कि मैच का परिणाम कहीं अधिक संतोषजनक था। प्रिंस ने मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि विकेट लेने के बाद मुझे अच्छा लगा, लेकिन मेरी सबसे बड़ी खुशी मैच जीतने में है। अगर मैंने विकेट लिया होता और हम हार जाते, तो शायद इतना महत्व नहीं होता, लेकिन मेरे लिए सबसे अच्छी बात यह है कि मेरी टीम जीती। टीम के लिए मैच जीतना मेरे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण था।

दाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज ने एलएसजी के गेंदबाजी कोच भरत अरुण और अनुभवी भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के साथ अपनी बातचीत के बारे में भी बताया और कहा कि उनसे हुई चर्चाएं सकारात्मक और मददगार रहीं। प्रिंस ने कहा कि मेरी उनसे लगातार बातचीत होती रहती है; दरअसल, मोहम्मद शमी भी वहीं हैं। तो सब कुछ ठीक चल रहा है, हमारी अच्छी और सकारात्मक चर्चाएँ हो रही हैं, और हमारा पूरा ध्यान सिर्फ इस बात पर है कि हमें क्या और कैसे करना है।
 

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प्रिंस ने शमी को नई गेंद से गेंदबाजी की बारीकियों को समझने में मदद करने और मैदान पर युवा गेंदबाजों का आत्मविश्वास बढ़ाने का श्रेय भी दिया। एलएसजी के तेज गेंदबाज ने आगे कहा कि मैंने उनसे नई गेंद के बारे में भी बहुत कुछ सीखा, लेकिन मुझे सबसे अच्छी बात यह लगती है कि जब भी कोई गेंदबाज गेंदबाजी करता है, तो वह मिड-ऑन या मिड-ऑफ पर खड़े होते हैं। इतने अनुभवी खिलाड़ी का साथ होना आपको एक अलग ही स्तर का आत्मविश्वास देता है। मोहम्मद शमी का अनुभव आपको आत्मविश्वास देता है। 
 
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Fri, 08 May 2026 15:22:08 +0530

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