योगी आदित्यनाथ का राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर बड़ा हमला, कहा- पता नहीं आप पढ़े-लिखे हैं या नहीं
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने आज संत कबीर नगर में खलीलाबाद एवं मेंहदावल विधान सभा क्षेत्रों के लिए विकास के लिए 684 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 201 जनकल्याणकारी परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को चेक, लैपटॉप एवं प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए।
योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा आप लोग डबल इंजन सरकार पर अपना आशीर्वाद इसी प्रकार बनाए रखिए, मैं आश्वस्त करता हूं कि विकास की गति में कभी कोई रुकावट नहीं आएगी। योगी ने इस दौरान समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की पिछली सरकारों पर जमकर निशाना साधा।
योगी ने कहा विकास कार्यों के माध्यम से आम नागरिक के जीवन में परिवर्तन लाना उनके जीवन में प्रगति लाना और इसके माध्यम से समृद्ध उत्तर प्रदेश के सारथी बनना, जिससे 2047 के पहले हमारा देश आत्मनिर्भर और विकसित बने ये हर भाजपा विधायक का भाव है, योगी ने कहा इसी भाव के चलते संत कबीर नगर की वो मिल फिर शुरू करने की कार्ययोजना बनाई जा रही है जो भ्रष्ट आचरण वाली कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में बंद हो गई थी।
योगी ने कहा सब जानते हैं अगर बेटी के साथ छेड़खानी की तो….
योगी ने कहा आज उत्तर प्रदेश में किसी को कोई भय नहीं है अब राह चलती किसी बेटी को कोई गुंडा छेड़ नहीं सकता, ईमानदारी के साथ व्यापार करने वाले किसी व्यापारी के साथ कोई जबरदस्ती नहीं कर सकता है क्योंकि उसे मालूम है यदि बेटी के साथ छेड़खानी की और व्यपारी एक साथ अनावश्यक हस्तक्षेप या फिर लूटपाट की कोशिश की तो खामियाजा एक ही होगा, या तो जेल जाना पड़ेगा या जहन्नुम की यात्रा के लिए तैयार रहना पड़ेगा।
आज बिना भेदभाव के सबको सभी योजनाओं का लाभ मिल रहा
मुख्यमंत्री ने कहा हम एक जिला एक मेडिकल कॉलेज की तरफ भी बढ़ रहे हैं क्योंकि ये आज की आवश्यकता है 2017 के पहले क्या था बाढ़ से, बीमारी से, दंगों और कर्फ्यू से, आस्था पर हो रहे प्रहार से, गुंडागर्दी से गरीबों की जमीनों पर कब्जे से आम आदमी परेशान था, गरीब को राशन नहीं मिलता था शासन की सुविधा का लाभ नहीं मिलता था और आज बिना भेदभाव के लाभ मिल रहा है।
योगी आदित्यनाथ का कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना
योगी ने कहा आज जो कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जो पोपेगेंडा कर रही है मैं इनसे पूछना चाहता हूं कि इन्होंने क्या किया था? बीमारी से मौतें होती थीं, गरीब का बच्चा मरता था, ये मौन रहते थे, कभी उस गरीब के साथ खड़े नहीं होते थे लेकिन आज उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेज की श्रंखला है, उन्होंने कहा राहुल जी और अखिलेश यादव जी, पता नहीं आप पढ़े-लिखे हैं या नहीं, क्योंकि आप लोगों के द्वारा कही जाने वाली बातें कभी-कभी हास्यास्पद होती हैं, आपको कटघरे में खड़ा कर देती हैं। लेकिन मैं कहना चाहता हूँ रोजगार के लिए स्किल चाहिए और आज वो हम युवाओं को दे रहे हैं आपने क्या किया?
युवाओं का भविष्य बनाने में रुचि नहीं ली और आज राजनीति कर रहे हैं
मुख्यमंत्री ने कहा आपने तो मेडिकल कॉलेज बनाने में रुचि ही नहीं ली आज आप राजनीति कर रहे हैं उस नौजवान के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं, आपके समय नौजवान की नौकरी में डकैती पड़ती थी उसके साथ अन्याय होता था लेकिन अज हमें तय कर दिया है यदि नौजवान के भविष्य के साथ किसी व्यक्ति या संस्था ने खिलवाड़ किया तो उसकी पूरी संपत्ति जब्त कर लेंगे और आजीवन कारावास की सजा भी करवा देंगे।
उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर में तिथि के अनुसार मनाया स्वतंत्रता दिवस, 4 दिन पहले फहराया गया तिरंगा
धर्मनगरी उज्जैन से देश की आजादी का एक खास नाता जुड़ा है, जो हर साल तारीख के बजाय तिथि के जरिए जीवंत होता है। इसी अनूठी परंपरा के तहत विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन के 119 साल पुराने बड़े गणेश मंदिर में इस बार स्वतंत्रता दिवस तय तारीख से चार दिन पहले मनाया गया। देशभर में जहां 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है, वहीं इस मंदिर में अंग्रेजी कैलेंडर के बजाय हिंदू पंचांग की तिथि के अनुसार आजादी का पर्व मनाने की परंपरा है। इस वर्ष श्रावण कृष्ण चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को होने के कारण मंदिर में विधि-विधान से ध्वजारोहण कर स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।
दरअसल इस परंपरा के पीछे की कहानी देश की आजादी के समय से जुड़ी है। पंडितों और ज्योतिषविदों के अनुसार, वर्ष 1947 में जिस दिन भारत आजाद हुआ, यानी 15 अगस्त को, हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण कृष्ण चतुर्दशी तिथि थी। इसी तिथि को आधार बनाकर बड़े गणेश मंदिर में हर साल स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है।
क्यों मनाया जाता है पहले स्वतंत्रता दिवस?
व्यास परिवार से जुड़े पंडित अक्षत व्यास के अनुसार, आजादी से पहले स्वतंत्रता प्राप्ति के शुभ समय को लेकर मंथन चल रहा था। इसी दौरान तत्कालीन राष्ट्रीय नेतृत्व ने उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित सूर्य नारायण व्यास से संपर्क किया था। बताया जाता है कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पत्र लिखकर पंडित व्यास से पूछा था कि देश को किस शुभ मुहूर्त में स्वतंत्रता प्राप्त करनी चाहिए। पंडित सूर्य नारायण व्यास ने ज्योतिषीय गणना और पंचांग के आधार पर श्रावण कृष्ण चतुर्दशी को शुभ बताया था।
आधी रात आजादी का समय तय करने की कहानी
वहीं पंडित सूर्य नारायण व्यास की सलाह के बाद 14 और 15 अगस्त की दरमियानी रात 12 बजे का समय आजादी के लिए तय किया गया। इसके पीछे मुख्य तर्क यह था कि उस समय भारत की कुंडली में स्थिर वृषभ लग्न बन रहा था। पंडित व्यास का मानना था कि स्थिर लग्न में देश के आजाद होने से लोकतंत्र और स्वतंत्रता लंबे समय तक स्थिर और मजबूत रहेंगे। उन्होंने आधी रात को ध्वजारोहण करने का सुझाव भी दिया था।
बताया जाता है कि पंडित व्यास ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद से कहा था कि यदि आजादी का समय आधी रात तय किया जा रहा है, तो पहला ध्वजारोहण भी उसी समय होना चाहिए। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस सुझाव को स्वीकार किया और आधी रात को लाल किले पर तिरंगा फहराया गया। बाद में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पंडित सूर्य नारायण व्यास को आभार पत्र भी भेजा था।
तिरंगे के रंगों से सजा मंदिर
वहीं इस वर्ष भी स्वतंत्रता दिवस की तिथि पर बड़े गणेश मंदिर को तिरंगे के रंगों से सजाया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में उत्सव का माहौल रहा। व्यास परिवार के पुश्तैनी आवास से तिरंगा यात्रा निकाली गई, जो देशभक्ति के गीतों और नारों के बीच बड़े गणेश मंदिर पहुंची। यहां विधि-विधान से ध्वज पूजन और गणेश पूजन किया गया। इसके बाद भगवान गणेश की महाआरती हुई।
देशभक्ति के नारों के बीच मंदिर के ऊंचे शिखर पर तिरंगा फहराया गया और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। पिछले 79 वर्षों से चली आ रही इस पारिवारिक और धार्मिक परंपरा में किसी तरह का सरकारी हस्तक्षेप नहीं होता है। आयोजन व्यास परिवार और स्थानीय श्रद्धालुओं के सहयोग से किया जाता है।
1907 से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
दरअसल बड़े गणेश मंदिर का इतिहास भी काफी खास है। वर्ष 1907 में पुणे में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा आयोजित ज्योतिष महाधिवेशन में उज्जैन के पंडित नारायण जी व्यास शामिल हुए थे। बताया जाता है कि इसी दौरान उन्होंने भारत के महान गणतंत्र बनने की भविष्यवाणी की थी। उज्जैन लौटने के बाद उन्होंने ही यहां विशाल गणेश प्रतिमा की स्थापना की। इस तरह बड़ा गणेश मंदिर आज भी धर्म, ज्योतिष और राष्ट्रभक्ति के अनूठे संगम के रूप में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।
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