विदेश मंत्री जयशंकर ने सूरीनाम में भारत की मदद से बनी फल प्रसंस्करण इकाई का उद्घाटन किया
पारामारिबो, 7 मई (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को सूरीनाम के राजधानी शहर परामारिबो में एक फल प्रसंस्करण (फ्रूट प्रोसेसिंग) सुविधा का उद्घाटन किया। यह सुविधा भारत की वित्तीय मदद से बनाई गई है।
भारत ने सूरीनाम को फल प्रसंस्करण मशीनें दी हैं, जिसे 2025 में विदेश मंत्री जयशंकर की ओर से घोषित 10 लाख डॉलर के छोटे और मध्यम उद्यम अनुदान के तहत फंड किया गया था। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट इस बात का भी संदेश देता है कि भारत, सूरीनाम और ग्लोबल साउथ का एक साझेदार है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी “पूरा विश्व एक परिवार है” का विचार सिर्फ शब्दों में नहीं है, बल्कि इसे असली प्रोजेक्ट्स और कामों के जरिए दिखाया जा रहा है। यह उसका एक अच्छा उदाहरण है।
उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में जब सूरीनाम विकास और समृद्धि की ओर बढ़ेगा, भारत हमेशा उसका भरोसेमंद साथी रहेगा।
इस कार्यक्रम में सूरीनाम के विदेश मंत्री मेल्विन बोवा और कृषि मंत्री निके नूरसालिम भी मौजूद थे।
जयशंकर ने कहा कि भारत की मदद से बना यह प्रोजेक्ट वैल्यू एडिशन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम है। यह दिखाता है कि भारत, सूरीनाम का एक भरोसेमंद विकास साझेदार है।
उन्होंने सूरीनाम की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष माइकल अश्विन अधीन से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि हमने भारत और सूरीनाम के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग पर अच्छी और उपयोगी बातचीत की। हमने दोनों लोकतंत्रों के बीच संसदीय आदान-प्रदान के महत्व को भी माना।
गुरुवार को ही उन्होंने लाला रूख म्यूजियम भी देखा, जो भारत से गए सूरीनामी लोगों की विरासत को दिखाता है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “गिरमिटिया लोगों का साहस और संघर्ष आज भी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता है और हमारी मजबूत दोस्ती की नींव है।”
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
महिलाओं के नेतृत्व वाला ग्रामीण पर्यटन पूर्वोत्तर में बौद्ध पर्यटन स्थलों को दे सकता है नया रूप: अरुणाचल प्रदेश के मंत्री
इटानगर, 7 मई (आईएएनएस)। अरुणाचल प्रदेश के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री दासंगलू पुल ने गुरुवार को कहा कि महिलाओं के नेतृत्व वाला ग्रामीण पर्यटन हिमालयी बौद्ध क्षेत्र में सांस्कृतिक आदान-प्रदान, सतत विकास और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक शक्तिशाली साधन के रूप में उभरने की क्षमता रखता है।
तवांग में पूर्वोत्तर भारत में बौद्ध सर्किट का विकास विषय पर आयोजित एक क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री ने पूर्वोत्तर भारत के बौद्ध केंद्रों को नेपाल, भूटान और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों से महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण पर्यटन मॉडल के माध्यम से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई पहल की सराहना की।
इस कार्यशाला में नेपाल, भूटान, श्रीलंका, असम और सिक्किम के प्रतिनिधि एक साथ आए और चर्चा का मुख्य विषय क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना और साझा बौद्ध विरासत पर आधारित टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देना था।
अरुणाचल प्रदेश की अपार पर्यटन क्षमता पर प्रकाश डालते हुए दासंगलू पुल, जिनके पास महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का भी प्रभार है, ने कहा कि राज्य, जिसे अक्सर उगते सूरज की भूमि कहा जाता है, कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का घर है, जिनमें तवांग, मेचुखा और नामसाई में स्थित स्वर्ण पैगोडा शामिल हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ग्रामीण और आदिवासी समुदायों की महिलाओं ने पारंपरिक रूप से मौखिक परंपराओं, हस्तशिल्पों, स्वदेशी व्यंजनों, त्योहारों और अनुष्ठानों को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन पहलों में उन्हें अधिक सक्रिय रूप से शामिल करने से न केवल सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में मदद मिलेगी, बल्कि आजीविका के अवसर भी पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्थाएं मजबूत होंगी।
मंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार कौशल विकास कार्यक्रमों, सूक्ष्म वित्त सहायता, अवसंरचना विकास और स्थानीय पर्यटन अनुभवों के डिजिटल प्रचार जैसी पहलों के माध्यम से कामकाजी महिलाओं का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पुल ने अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देने और पूरे क्षेत्र में लोगों के बीच संबंधों को गहरा करने के लिए पड़ोसी बौद्ध देशों के साथ पर्यटन और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के महत्व पर भी जोर दिया।
इस कार्यशाला में भाग लेने वाले देशों के प्रतिनिधियों के भाषणों के साथ-साथ क्षेत्रीय सहयोग, कनेक्टिविटी, ब्रांडिंग और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण पर्यटन की भूमिका पर तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए।
व्यापक पर्यटन सर्किट के हिस्से के रूप में पूर्वोत्तर क्षेत्र में प्रमुख बौद्ध विरासत स्थलों की पहचान और प्रचार-प्रसार पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
अधिकारियों ने कार्यशाला को क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने और समावेशी, समुदाय-संचालित और टिकाऊ विकास मॉडल के माध्यम से पूर्वोत्तर भारत की विशाल पर्यटन क्षमता को उजागर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
--आईएएनएस
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