जा रहे हैं कैंची धाम? इन 4 मंदिरों के दर्शन बिना अधूरे हैं बाबा नीब करौरी की यात्रा, जानें सभी की खासियत
Kenchi Dham: कैंची धाम की यात्रा सिर्फ मंदिर दर्शन तक सीमित नहीं है. हनुमानगढ़ी, भूमियाधार आश्रम और काकड़ी घाट जैसे स्थान बाबा नीम करोली की आध्यात्मिक विरासत को और गहराई से महसूस कराते हैं. यदि आप इस बार कैंची धाम जा रहे हैं, तो इन चार धामों के दर्शन जरूर करें.
ये मामूली सी चीज बहुत कारगर है... बकरी पालन को कर रहा सस्ता, दूध उत्पादन भी जबरदस्त!
Pet Care Tips In Summer Season: राजस्थान के Bhilwara में पशुपालकों के बीच एक देसी तरीका तेजी से चर्चा में है, जो कम खर्च में बकरियों और दूसरे पशुओं की सेहत सुधारने में मदद कर रहा है. गांवों में आसानी से मिलने वाली बबूल की फलियां अब पशुपालन के लिए किसी प्राकृतिक टॉनिक से कम नहीं मानी जा रही हैं. खासकर बकरी पालन करने वाले किसान इसे बेहद फायदेमंद बता रहे हैं.आसींद क्षेत्र के पशुपालकों का कहना है कि बबूल की सूखी फलियों में प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो पशुओं की पाचन क्षमता मजबूत करने के साथ उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाते हैं. जब पशु का पाचन बेहतर होता है, तो वह चारे से ज्यादा ऊर्जा ले पाता है और उसकी सेहत भी अच्छी बनी रहती है.ग्रामीणों के मुताबिक इन फलियों को सीधे खिलाने के बजाय पीसकर चारे में मिलाया जाए तो ज्यादा लाभ मिलता है. इसका असर दूध उत्पादन पर भी देखने को मिलता है. नियमित और संतुलित मात्रा में खिलाने से पशुओं के दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में सुधार देखा गया है, जिससे डेयरी व्यवसाय करने वाले किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है. हालांकि विशेषज्ञों की सलाह है कि इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में ही किया जाए, क्योंकि जरूरत से ज्यादा सेवन पशुओं के पाचन पर असर डाल सकता है. सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह देसी उपाय पशुपालकों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफे का मजबूत जरिया बन सकता है.
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