West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में राज्यपाल ने भंग की विधानसभा, ममता का मंत्रिमंडल किया बर्खास्त
West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार शाम बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब राज्यपाल आरएन रवि की ओर से विधानसभा भंग करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया। लोकभवन से जारी इस अधिसूचना के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। विधानसभा भंग होने के साथ ही ममता कैबिनेट के मंत्रियों की प्रशासनिक शक्तियां भी समाप्त मानी जा रही हैं। इस फैसले ने पूरे राज्य में राजनीतिक चर्चाओं को और गर्म कर दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि इससे एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने साफ कहा था कि वे अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगी। ऐसे में राज्यपाल के इस कदम को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष जहां इसे संवैधानिक कार्रवाई बता रहा है, वहीं तृणमूल कांग्रेस इस फैसले को लोकतंत्र के खिलाफ बता सकती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में आने वाले दिनों में सियासी तनाव और बढ़ सकता है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे राज्य में नई सरकार के गठन या चुनाव को लेकर क्या फैसला लिया जाता है।
तीन बार मुख्यमंत्री रह चुकीं ममता
ममता बनर्जी साल 2011 से पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज थीं और लगातार तीन बार मुख्यमंत्री पद संभाल चुकी हैं। उनके लंबे राजनीतिक कार्यकाल में जहां कई विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी फैसलों की चर्चा रही, वहीं चुनावी हिंसा और राजनीतिक विवाद भी लगातार सुर्खियों में रहे। अब विधानसभा भंग होने के बाद राज्य में नई सरकार के गठन और आगे की राजनीतिक रणनीति को लेकर हलचल तेज हो गई है।
भारत की एनपीएस की संपत्ति 15.95 लाख करोड़ रुपए के पार, ईपीएस में योगदान करने वालों की संख्या 7.98 करोड़ पहुंची
नई दिल्ली, 7 मई (आईएएनएस)। भारत की रिटायरमेंट व्यवस्था में बड़ा विस्तार देखने को मिला है। सरकार ने गुरुवार को बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के तहत प्रबंधित संपत्ति 15.95 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है, जबकि अटल पेंशन योजना (एपीवाई) के तहत यह आंकड़ा 51,400 करोड़ रुपए हो गया है।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि एनपीएस में नामांकन करने वाले सब्सक्राइबर्स की संख्या 2.17 करोड़ से अधिक हो गई है, जबकि एपीवाई के तहत 8.96 करोड़ नामांकन दर्ज किए गए हैं। यह भारत की पेंशन व्यवस्था में लगातार मजबूत वृद्धि को दर्शाता है।
एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (ईपीएस) में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अप्रैल 2026 तक इसमें योगदान देने वाले सदस्यों की संख्या बढ़कर 7.98 करोड़ हो गई है।
गैर-अंशदायी सामाजिक पेंशन योजनाएं भी आय सहायता का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई हैं। अप्रैल 2026 तक केंद्र सरकार की सामाजिक पेंशन योजना के तहत 2.92 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को कवर किया गया। इसी अवधि में राज्य सरकारों ने भी 1.41 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों को पेंशन सहायता प्रदान की।
भारत की पेंशन व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा अभी भी परिभाषित लाभ (डिफाइंड-बेनेफिट) पेंशन व्यवस्था पर आधारित है। इसके तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों को पेंशन दी जाती है, जिसमें 34 लाख से अधिक रक्षा पेंशनभोगी और 14 लाख रेलवे पेंशनभोगी शामिल हैं।
बयान में कहा गया कि बढ़ती जीवन प्रत्याशा और रोजगार के बदलते स्वरूप को देखते हुए रिटायरमेंट सुरक्षा को मजबूत करना सार्वजनिक नीति की महत्वपूर्ण प्राथमिकता बन गया है।
इस संदर्भ में भारत की पेंशन व्यवस्था समय के साथ लगातार विकसित हुई है। इसमें कई नीतिगत फैसलों और संस्थागत सुधारों के जरिए बदलाव किए गए हैं। सरकार का फोकस अब सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाने और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सेवाओं को बेहतर बनाने पर है।
भारत की पेंशन व्यवस्था अब कई स्तंभों पर आधारित है, जिनमें परिभाषित लाभ योजनाएं, अंशदायी योजनाएं, संगठित निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए वैधानिक पेरोल आधारित योजनाएं और कर से वित्तपोषित सामाजिक सहायता योजनाएं शामिल हैं।
केंद्र स्तर पर नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम (एनएसएपी) को ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में लागू किया जा रहा है, ताकि पात्र लाभार्थियों को सामाजिक सहायता मिल सके। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
अगस्त 2025 तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने एनएसएपी के तहत लाभार्थियों को प्रति माह 50 रुपए से लेकर 3,800 रुपए तक की अतिरिक्त सहायता राशि देना शुरू किया है। इसके चलते अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में औसत मासिक पेंशन लगभग 1,000 रुपए तक पहुंच गई है।
--आईएएनएस
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