Delhi: विधानसभा में चावल घोटाले के आरोप पर जमकर हंगामा, स्पीकर ने AAP के 8 विधायकों को सदन से बाहर करवाया, मंत्री ने लगाया चावल फेंकने का आरोप
मंगलवार, 11 अगस्त का दिन दिल्ली विधानसभा में उस समय गहमागहमी देखने को मिला, जब स्पीकर ने आम आदमी पार्टी (AAP) के 8 विधायकों को सदन से बाहर करवा दिया। उन्होंने कथित चावल घोटाले का मुद्दा उठाया और उस पर चर्चा की मांग की थी।
बशर अल-असद को मौत की सजा, 24 साल के शासन का हुआ अंत; जानिए सीरिया में कैसे बदली सत्ता की कहानी
सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को देश की एक अदालत ने मौत की सजा सुनाई है. दमिश्क की चौथी आपराधिक अदालत ने उन्हें हत्या, यातना, मनमानी गिरफ्तारी और मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी माना. यह फैसला उनकी गैर-मौजूदगी में सुनाया गया, क्योंकि दिसंबर 2024 में सत्ता से बेदखल होने के बाद से वह रूस में रह रहे हैं. यह बशर अल-असद के खिलाफ सीरियाई अदालत का पहला दोषसिद्धि वाला फैसला माना जा रहा है.
अदालत के मुताबिक गवाहों की गवाही से यह सामने आया कि बशर अल-असद शासन के दौरान हुए अपराधों में सर्वोच्च निर्णय लेने वाले व्यक्ति थे और सरकारी संस्थाओं का इस्तेमाल इन अपराधों को अंजाम देने में किया गया.
किन अपराधों में दोषी ठहराया गया?
अदालत ने बशर अल-असद को कई गंभीर अपराधों का दोषी पाया. इनमें एक से अधिक लोगों और बच्चों की पूर्व नियोजित हत्या, यातना, मनमाने तरीके से गिरफ्तार करना और मानवता के खिलाफ अपराध शामिल हैं. ये मामले मुख्य रूप से 2011 में शुरू हुए विद्रोह को दबाने के दौरान हुई कार्रवाई से जुड़े हैं.
असद के साथ उनके शासन के सुरक्षा तंत्र से जुड़े अतीफ नजीब को भी मौत की सजा सुनाई गई है. नजीब 2011 में दक्षिणी सीरिया के दारा प्रांत में राजनीतिक सुरक्षा शाखा के प्रमुख थे और वहां प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया. बशर के भाई माहेर अल-असद को भी मामले में गैर-मौजूदगी में मौत की सजा सुनाए जाने की रिपोर्ट है.
दारा से शुरू हुई थी वह चिंगारी
सीरिया में 2011 में अरब स्प्रिंग के दौर में लोकतांत्रिक सुधारों की मांग उठी थी. दक्षिणी शहर दारा में कुछ किशोरों को सरकार विरोधी नारे लिखने के आरोप में गिरफ्तार और कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने की घटना के बाद विरोध प्रदर्शन तेज हो गया.
अतीफ नजीब उस समय दारा में राजनीतिक सुरक्षा प्रमुख थे. प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सरकारी कार्रवाई ने असंतोष को और बढ़ाया और धीरे-धीरे यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया. बाद में शांतिपूर्ण विरोध गृहयुद्ध में बदल गया.
13 साल की जंग ने सीरिया को किया तबाह
सीरिया का गृहयुद्ध करीब 13-14 साल तक चला. इस संघर्ष में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और लाखों लोग अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए. युद्ध का असर केवल मानव जीवन तक सीमित नहीं रहा. सीरिया की सड़कें, अस्पताल, स्कूल, बिजली-पानी की व्यवस्था और दूसरी बुनियादी सुविधाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुईं.
इस संघर्ष में अलग-अलग पक्षों पर युद्ध अपराध और मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप लगते रहे. अब बशर अल-असद के खिलाफ आया फैसला इसी लंबे संघर्ष के दौरान हुए कथित अपराधों के लिए जवाबदेही की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है.
असद परिवार का पांच दशक से ज्यादा लंबा शासन
सीरिया में असद परिवार का प्रभाव पांच दशक से अधिक समय तक रहा. पहले हाफेज अल-असद ने सत्ता संभाली और उनके निधन के बाद वर्ष 2000 में उनके बेटे बशर अल-असद राष्ट्रपति बने.
बशर करीब 24 वर्षों तक सीरिया के राष्ट्रपति रहे. उनके शासन के दौरान देश ने राजनीतिक असंतोष, विद्रोह, गृहयुद्ध और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप का लंबा दौर देखा.
2011 में शुरू हुए आंदोलन को सैन्य तरीके से दबाने की कोशिश ने स्थिति को और जटिल बना दिया. समय के साथ संघर्ष में कई स्थानीय और विदेशी ताकतें शामिल हो गईं.
दिसंबर 2024 में पलट गई सत्ता की तस्वीर
करीब 24 साल तक सत्ता में रहने वाले बशर अल-असद का शासन दिसंबर 2024 में अचानक खत्म हो गया. विद्रोही ताकतों के तेजी से दमिश्क की ओर बढ़ने के बीच असद राजधानी छोड़कर रूस चले गए.
इसके साथ ही सीरिया में असद परिवार के लंबे शासन का अंत हो गया. रूस ने उन्हें शरण दी और तब से वह मॉस्को में रह रहे हैं. यही वजह है कि अदालत की ओर से सुनाई गई मौत की सजा फिलहाल व्यावहारिक रूप से लागू होना आसान नहीं है. असद सीरिया में मौजूद नहीं हैं और उनकी वापसी या प्रत्यर्पण की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है.
अब सीरिया की कमान किसके हाथ में है?
असद के सत्ता से हटने के बाद सीरिया में नई राजनीतिक व्यवस्था बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई. अहमद अल-शरा को संक्रमणकालीन राष्ट्रपति की भूमिका मिली और नई सत्ता ने असद शासन से जुड़े लोगों के खिलाफ जवाबदेही की प्रक्रिया शुरू करने का दावा किया है.
अतीफ नजीब की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ शुरू हुआ मुकदमा इसी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा. अप्रैल 2026 में दमिश्क में उनके खिलाफ सार्वजनिक सुनवाई शुरू हुई थी. यह असद शासन के किसी वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ सीरिया में शुरू हुए शुरुआती प्रमुख मुकदमों में से एक था.
क्या यह सिर्फ सजा है या सीरिया की नई न्याय व्यवस्था की परीक्षा?
बशर अल-असद को मिली मौत की सजा केवल एक पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ अदालत का फैसला नहीं है. यह सीरिया के लिए संक्रमणकालीन न्याय की बड़ी परीक्षा भी है.
दशकों तक सत्ता में रहे शासन के दौरान कथित अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाना नई सरकार के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है. इसके साथ यह सवाल भी रहेगा कि मुकदमों में निष्पक्ष प्रक्रिया, सबूतों की विश्वसनीयता और आरोपियों को कानूनी अधिकार किस तरह सुनिश्चित किए जाते हैं.
विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों के लिए यही पहलू अहम रहेगा कि जवाबदेही की प्रक्रिया बदले की कार्रवाई न बनकर एक विश्वसनीय न्यायिक प्रक्रिया के रूप में आगे बढ़े.
निष्पक्षता और पारदर्शिता पर नजर?
बशर अल-असद के खिलाफ फैसला सीरिया के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक अध्यायों में से एक पर न्यायिक मुहर जैसा है. हालांकि सजा सुनाए जाने और उसके वास्तविक क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर है, क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति फिलहाल रूस में हैं.
फिर भी इस फैसले का राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व काफी बड़ा है. जिस व्यक्ति ने करीब ढाई दशक तक सीरिया पर शासन किया, उसके खिलाफ अब उसी देश की अदालत ने गंभीर अपराधों में दोषसिद्धि की है.
सीरिया के लिए असली चुनौती अब यह होगी कि वह दशकों पुराने दमन और गृहयुद्ध से जुड़े मामलों में जवाबदेही की प्रक्रिया को कितनी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाता है.
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