पाकिस्तान: एचआईवी सेंटर्स में इलाज करा रहे करीब 20 हजार मरीज लापता, संसदीय समिति ने कमियों की ओर दिलाया ध्यान
इस्लामाबाद, 5 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान बीते कुछ महीनों से गंभीर स्वास्थ्य समस्या की वजह से चर्चा में है। पिछले नौ महीनों में अस्पतालों की लापरवाही का खामियाजा बच्चों तक को भोगना पड़ा है। कई बच्चे एचआईवी संक्रमित पाए गए। ये मुद्दा पाकिस्तान की संसद में भी उठा। वहीं स्वास्थ्य महकमे ने मंगलवार को संसदीय समिति के सामने और भयावह तस्वीर पेश की है। इसके मुताबिक इलाज करा रहे करीब 20 हजार एचआईवी संक्रमित गायब हैं।
पाकिस्तान नेशनल असेंबली की स्वास्थ्य संबंधी स्थायी समिति को बताया गया कि एचआईवी/एड्स के इलाज के लिए एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) केंद्रों में पंजीकृत लगभग 20,000 मरीज अब “लापता” हैं। इस खुलासे ने फॉलो-अप, काउंसलिंग और मरीजों को इलाज से जुड़े रखने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रमुख दैनिक डॉन के अनुसार, समिति की अध्यक्षता कर रहे डॉ. महेश कुमार मलानी ने देश में एचआईवी/एड्स के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय से विस्तृत ब्रीफिंग मांगी। मंत्रालय ने बंद कमरे (इन-कैमरा) में ब्रीफिंग देने का प्रस्ताव रखा, लेकिन समिति के सदस्यों ने पारदर्शिता की जरूरत बताते हुए इसे खारिज कर दिया।
आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में एचआईवी संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। पिछले 15 वर्षों में नए मामलों में करीब 200 फीसदी की वृद्धि हुई है—2010 में जो तादाद 16,000 थी, वो बढ़कर 2024 में 48,000 तक पहुंच गई। एक अनुमान के मुताबिक संक्रमितों की कुल संख्या 369,000 है, वहीं पंजीकृत मामले 84 हजार हैं। 2025 में 14,000 नए मामले सामने आए। इन्हीं में से लगभग 20,000 मरीज, जिन्होंने इलाज शुरू कराया था, अब लापता हैं।
हालांकि स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल ने बताया कि देश की एचआईवी/एड्स कार्यक्रमों को सहारा ग्लोबल फंडिंग से ही मिलता है।
वहीं समिति ने उन वजहों की ओर ध्यान दिलाया जिनसे इसका प्रसार और हो रहा है। बताया कि प्रतिबंध के बावजूद बाजार में असुरक्षित सिरिंज मिलते हैं, ब्लड बैंक और ट्रांसफ्यूजन सिस्टम पर पैनी नजर नहीं रखी जा रही है। जागरूकता अभियानों की कमी, सामाजिक बहिष्कार का खौफ और इलाज शुरू करने के बाद मरीजों का सिस्टम से बाहर हो जाना चिंतनीय है।
हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर प्रसार दर 0.2 है (वैश्विक औसत 0.5 से कम), लेकिन ताऊंसा, कोट मोमिन और दक्षिण पंजाब जैसे क्षेत्रों में संक्रमण बढ़ा है, जो नियंत्रण में खामियों को दिखाता है।
कराची के तीन अस्पतालों में पिछले नौ महीनों में बच्चों में एचआईवी मामलों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों ने इसे “खतरनाक” बताते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने की मांग की है।
उन्होंने सुरक्षित चिकित्सा प्रथाओं, सिंगल-यूज सिरिंज के सख्त पालन और एक राष्ट्रीय डेटा डैशबोर्ड बनाने की भी सिफारिश की, जिसमें एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, सी और अन्य संक्रामक रोगों की विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध हो। यह मामला सिर्फ स्वास्थ्य प्रणाली की कमी नहीं, बल्कि जागरूकता, निगरानी और सामाजिक रवैये की भी चुनौती को उजागर करता है। 20,000 “लापता” मरीज इस बात का संकेत हैं कि इलाज शुरू करना ही पर्याप्त नहीं—उसे जारी रखना और मरीजों को प्रणाली से जोड़े रखना भी उतना ही जरूरी है।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
'मेक इन इंडिया' को बड़ा बढ़ावा, दो नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को कैबिनेट ने दी मंजूरी
नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार को भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत दो नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है। यह फैसला देश में चिप मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
ये दोनों प्रोजेक्ट गुजरात में लगाए जाएंगे, जिनमें कुल मिलाकर करीब 3,936 करोड़ रुपए का निवेश होगा। इन प्रोजेक्ट्स से लगभग 2,230 कुशल लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
इनमें से एक प्रोजेक्ट देश की पहली कमर्शियल मिनी/माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले फैसिलिटी होगी, जो गैलियम नाइट्राइड (जीएएन) तकनीक पर आधारित होगी। इसके अलावा एक सेमीकंडक्टर पैकेजिंग यूनिट भी स्थापित की जाएगी।
पहला बड़ा प्रोजेक्ट क्रिस्टल मैट्रिक्स लिमिटेड द्वारा गुजरात के धोलेरा में विकसित किया जाएगा। यह प्लांट कंपाउंड सेमीकंडक्टर निर्माण, असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (एटीएमपी) पर काम करेगा, जिसमें खास फोकस मिनी/माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले मॉड्यूल बनाने पर रहेगा।
यह यूनिट जीएएन फाउंड्री सेवाएं भी देगी और हर साल 72,000 वर्ग मीटर डिस्प्ले पैनल और 24,000 आरजीबी वेफर्स का उत्पादन करेगी। इनका उपयोग टीवी, स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल डिस्प्ले, स्मार्टवॉच और एक्सआर (एक्सटेंडेड रियलिटी) जैसे नए टेक्नोलॉजी डिवाइस में होगा।
दूसरा प्रोजेक्ट सुची सेमीकॉन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सूरत में लगाया जाएगा। यह एक आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (ओएसएटी) यूनिट होगी, जिसमें हर साल 1,033 मिलियन से ज्यादा चिप्स का उत्पादन किया जाएगा।
ये चिप्स पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, एनालॉग सर्किट्स और इंडस्ट्रियल सिस्टम्स में इस्तेमाल होंगे, जिससे ऑटोमोबाइल, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर को फायदा मिलेगा।
इन दो नए प्रोजेक्ट्स के साथ भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत कुल प्रोजेक्ट्स की संख्या 12 हो गई है और कुल निवेश करीब 1.64 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
सरकार का मानना है कि इससे भारत की सेमीकंडक्टर क्षमता मजबूत होगी और चिप डिजाइन के क्षेत्र में देश की बढ़ती ताकत को और सपोर्ट मिलेगा।
सरकार ने यह भी बताया कि देश में सेमीकंडक्टर सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए 315 शैक्षणिक संस्थानों और 104 स्टार्टअप्स को डिजाइन इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट दिया जा रहा है।
पहले से मंजूर कई प्रोजेक्ट्स पर काम तेजी से चल रहा है, जिनमें से दो यूनिट्स ने उत्पादन शुरू कर दिया है और दो अन्य जल्द ही काम शुरू करने वाली हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
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