पश्चिम एशिया संकट के बीच एमएसएमई और एयरलाइंस को राहत देने के लिए कैबिनेट ने ईसीएलजीएस 5.0 को दी मंजूरी
नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार को इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) 5.0 को मंजूरी दे दी है। इस स्कीम का उद्देश्य वेस्ट एशिया संकट से प्रभावित कारोबारों को वित्तीय मदद देना है।
इस स्कीम के नए चरण के तहत सरकार नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड के जरिए बैंकों द्वारा दिए जाने वाले लोन पर ज्यादा गारंटी कवर देगी।
इस योजना में एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) के लिए 100 प्रतिशत गारंटी कवर मिलेगा, जबकि गैर-एमएसएमई और एयरलाइन सेक्टर के लिए 90 प्रतिशत गारंटी दी जाएगी।
इसका उद्देश्य यह है कि बैंक और वित्तीय संस्थाएं बिना डिफॉल्ट के डर के ज्यादा लोन दे सकें और कारोबार को जरूरी फंड मिल सके।
ईसीएलजीएस 5.0 के तहत पात्र उधारकर्ता वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के दौरान अपने पीक वर्किंग कैपिटल उपयोग का 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त लोन ले सकेंगे। हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 100 करोड़ रुपए तय की गई है।
एयरलाइन सेक्टर के लिए यह सीमा काफी ज्यादा रखी गई है। योग्य एयरलाइंस को 100 प्रतिशत तक लोन मिल सकता है, जिसकी अधिकतम सीमा 1,500 करोड़ रुपए प्रति उधारकर्ता होगी, बशर्ते वे तय शर्तों को पूरा करें।
इस स्कीम की खास बात यह है कि इसमें कोई गारंटी फीस नहीं ली जाएगी, जिससे उधार लेने वालों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
लोन चुकाने की अवधि को भी आसान बनाया गया है। एमएसएमई और अन्य कारोबारों के लिए लोन की अवधि 5 साल होगी, जिसमें पहले 1 साल तक मूलधन (प्रिंसिपल) चुकाने की जरूरत नहीं होगी।
वहीं, एयरलाइंस के लिए लोन की अवधि 7 साल तय की गई है, जिसमें 2 साल का मोरेटोरियम (राहत अवधि) दिया जाएगा। इस दौरान केवल ब्याज देना होगा और मूलधन बाद में चुकाना होगा।
यह स्कीम एनसीजीटीसी द्वारा गाइडलाइन जारी होने की तारीख से लेकर 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगी।
इसका लाभ वही उधारकर्ता ले सकेंगे जिनके पास 31 मार्च 2026 तक पहले से वर्किंग कैपिटल या अन्य लोन सुविधाएं मौजूद हैं और जिनका खाता स्टैंडर्ड कैटेगरी में है।
सरकार को उम्मीद है कि ईसीएलजीएस 5.0 स्कीम से मध्य पूर्व में जारी तनाव के चलते पैदा हुई नकदी (लिक्विडिटी) की समस्या से जूझ रहे कारोबारों को बड़ी राहत मिलेगी।
--आईएएनएस
डीबीपी
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यूपी की कुष्ठ पेंशन योजना, जरूरतमंदों के लिए बनी सहारा
उत्तर प्रदेश सरकार की कुष्ठ पेंशन योजना समाज के सबसे कमजोर वर्गों को आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से चलाई जा रही है. इस योजना के तहत कुष्ठ रोग से प्रभावित और उससे दिव्यांग हुए लोगों को नियमित आर्थिक मदद दी जाती है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें और दूसरों पर निर्भर न रहें.
हर महीने मिलती है 3000 रुपये की सहायता
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पात्र लाभार्थियों को हर महीने 3000 रुपये की पेंशन दी जाती है. यह राशि सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर होती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और किसी तरह की देरी या भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होती है.
कौन उठा सकता है योजना का लाभ
इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की गई हैं.
- आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए
- कुष्ठ रोग से प्रभावित और उससे दिव्यांग होना जरूरी है
- आय सीमा के भीतर होना चाहिए (कम आय वर्ग को प्राथमिकता)
- किसी अन्य पेंशन योजना का लाभ नहीं ले रहा हो
उम्र की कोई बाध्यता नहीं
इस योजना की खास बात यह है कि इसमें उम्र की कोई सीमा नहीं रखी गई है. यानी किसी भी आयु वर्ग का व्यक्ति, यदि वह कुष्ठ रोग से प्रभावित है और पात्रता पूरी करता है, तो पेंशन के लिए आवेदन कर सकता है.
आसान ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया
सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को भी सरल बनाया है. इच्छुक व्यक्ति ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. आवेदन के लिए आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र, बैंक खाता और मेडिकल प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज जरूरी होते हैं.
हजारों लोगों को मिल रहा लाभ
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में हजारों कुष्ठ रोगी इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं. अकेले 2025-26 में ही बड़ी संख्या में लाभार्थियों को समय पर पेंशन दी गई, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार आया है.
सम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
कुष्ठ पेंशन योजना सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान की भी पहल है. यह योजना उन लोगों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास है, जो बीमारी के कारण अक्सर समाज से अलग-थलग पड़ जाते हैं. नियमित पेंशन और आसान प्रक्रिया के जरिए सरकार उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम उठा रही है.
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