नई दिल्ली में आरबीआई भवन में लगी आग, कोई हताहत नहीं
नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की बिल्डिंग में मंगलवार दोपहर आग लग गई। हालांकि, दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई के चलते आग पर जल्द ही काबू पा लिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में किसी के घायल होने या हताहत होने की कोई सूचना नहीं है।
अधिकारियों के अनुसार, आग भवन परिसर के भीतर रखे सोलर पैनलों वाले एक बॉक्स से शुरू हुई थी।
दमकल विभाग को दोपहर करीब 1:05 बजे इस घटना की सूचना मिली, जिसके बाद तुरंत पांच दमकल गाड़ियों को मौके पर भेजा गया।
दमकलकर्मियों ने करीब 15 मिनट के भीतर आग पर काबू पा लिया, जिससे किसी बड़े नुकसान या आग के फैलने की आशंका को टाल दिया गया।
अधिकारियों ने पुष्टि की कि स्थिति को तेजी और सुरक्षित तरीके से संभाल लिया गया और भवन में मौजूद किसी भी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
यह घटना राजधानी में हाल ही में सामने आई एक अन्य आग की घटना के बाद हुई है। इससे पहले दिल्ली के चावड़ी बाजार इलाके में आग लग गई थी, जिसके संबंध में रविवार शाम करीब 7:21 बजे कनॉट प्लेस फायर स्टेशन को कॉल मिली थी।
दमकल की टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया और स्थिति को नियंत्रित किया गया।
इस बीच, पिछले सप्ताह रिजर्व बैंक ने बताया कि 2,000 रुपये मूल्यवर्ग के 98.47 प्रतिशत नोट प्रचलन से वापस आ चुके हैं; यह घोषणा किए जाने के लगभग तीन वर्ष बाद की स्थिति है।
रिजर्व बैंक ने 19 मई 2023 को 2,000 रुपये के नोटों को प्रचलन से वापस लेने की घोषणा की थी, जो कि उसकी मुद्रा प्रबंधन प्रक्रिया का हिस्सा था।
उस समय ऐसे नोटों का कुल मूल्य 3.56 लाख करोड़ रुपये था।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
आईएमएफ की प्रबंध निदेशक ने मध्य पूर्व संघर्ष के चलते वैश्विक आर्थिक प्रभावों के और गंभीर होने की आशंका जताई
बीजिंग, 5 मई (आईएएनएस)। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने 4 मई को अमेरिकी थिंक टैंक मिल्केन इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में कहा कि यदि मध्य पूर्व संघर्ष 2027 तक जारी रहता है और तेल की कीमतें लगभग 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती हैं, तो इससे कीमतों और आर्थिक विकास पर प्रभाव और भी बढ़ जाएगा।
जॉर्जीवा ने कहा कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण आईएमएफ द्वारा इस वर्ष वैश्विक आर्थिक विकास में 3.1 की मंदी और 4.4 मुद्रास्फीति दर के पहले के पूर्वानुमान अब तर्कसंगत नहीं रह गए हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि हालांकि दीर्घकालिक मुद्रास्फीति की उम्मीदें स्थिर बनी हुई हैं और वित्तीय स्थितियां सख्त नहीं हुई हैं, लेकिन संघर्ष जारी रहने पर इनमें बदलाव आ सकता है।
जॉर्जीवा ने कहा कि यदि संघर्ष 2027 तक जारी रहता है और तेल की कीमतें लगभग 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती हैं, तो और भी बुरे परिणाम अपेक्षित हैं। मुद्रास्फीति बढ़ेगी और मुद्रास्फीति की उम्मीदें अनिवार्य रूप से अनियंत्रित हो जाएंगी।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
एबीएम/
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