बलूच संगठन का दावा: बलूचिस्तान में किए दस हमले, दस सैनिक और चार कथित एजेंट मारे गए
क्वेटा, 5 मई (आईएएनएस)। एक बलूच सशस्त्र संगठन ने दावा किया है कि उसने बलूचिस्तान के खारान, वाशुक, अवारान, केच और मस्तंग में पाकिस्तान की सेना के खिलाफ दस हमले किए और दस सैन्यकर्मियों और चार कथित सरकारी एजेंटों को मार गिराया। यह जानकारी स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई है।
बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) के प्रवक्ता मेजर ग्वाहरम बलूच ने बयान में कहा कि उनके लड़ाकों ने पाकिस्तान की फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) के चेकपोस्ट, सैन्य कैंप, एक काफिले, सड़क निर्माण कंपनी की सुरक्षा में लगे जवानों और उन लोगों को निशाना बनाया जिन्हें उन्होंने डेथ स्क्वाड एजेंट और सरकारी एजेंट बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि इन हमलों के दौरान हथियार भी कब्जे में लिए गए और निगरानी कैमरे नष्ट कर दिए गए।
बीएलएफ के मुताबिक, तीन मई को खारान के गाजी रोड पर एफसी चेकपोस्ट को रॉकेट और ग्रेनेड लॉन्चर से निशाना बनाया गया। उनका दावा है कि गोले सीधे पोस्ट के अंदर गिरे, जिससे नुकसान और हताहत हुए।
प्रवक्ता ने यह आरोप भी लगाया कि हमले के बाद पाकिस्तानी बलों ने लड़ाकों का पीछा करते हुए क्वाडकॉप्टर इस्तेमाल किए और आसपास के नागरिकों पर अंधाधुंध फायरिंग की। यह बात द बलूचिस्तान पोस्ट ने भी रिपोर्ट की।
बयान के अनुसार, दो मई को वाशुक के नाग-ग्रारी इलाके में एक इंटेलिजेंस-आधारित ऑपरेशन किया गया, जिसमें दो कथित डेथ स्क्वाड एजेंट मारे गए।
बीएलएफ ने दावा किया कि 29 अप्रैल को आवारान के तिरतेज इलाके में मुख्य सैन्य कैंप पर हमला किया गया। यह हमला एक स्नाइपर शॉट से शुरू हुआ, जिसमें ड्यूटी पर तैनात एक सैनिक मारा गया। इसके बाद एलएमजी और अन्य भारी हथियारों से फायरिंग की गई, जिससे कैंप के अंदर और नुकसान हुआ।
इसके अलावा, 28 अप्रैल को आवारान के कोलवाह इलाके के गेश्कूर-ज़ेक क्षेत्र में एक सैन्य चेकपोस्ट पर हमला किया गया। इसमें एक सैनिक स्नाइपर से मारा गया और फिर भारी हथियारों से चेकपोस्ट को निशाना बनाया गया।
बीएलएफ के अनुसार, 27 अप्रैल को मस्तंग के कैडेट कॉलेज चेकपोस्ट पर भी हमला हुआ, जहां ऑटोमैटिक हथियारों से फायरिंग कर दो सैनिकों को मार दिया गया और बाद में हाईवे पर नाकाबंदी कर दी गई।
उसी दिन खद कोचा में मक्का होटल के पास एक और नाकाबंदी की गई, जहां अजीज चेकपोस्ट पर भारी हथियारों से हमला कर चार सैनिकों को मारने और कई को घायल करने का दावा किया गया।
बीएलएफ ने यह भी कहा कि 27 अप्रैल को केच के दश्त क्षेत्र में तलार और बेरी के बीच एक चेकपोस्ट पर ग्रेनेड लॉन्चर से हमला किया गया और वहां लगे निगरानी कैमरे तोड़ दिए गए।
बयान में टंप के कोंशकलात इलाके की दो पुरानी घटनाओं का भी जिक्र किया गया, जहां बीएलएफ ने दावा किया कि उन्होंने दो लोगों को पकड़ा और बाद में मार दिया। उन पर पाकिस्तानी बलों के लिए जासूसी करने और बलोच नागरिकों के जबरन गायब होने व टारगेट किलिंग में शामिल होने का आरोप लगाया गया।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
नई दिल्ली में आरबीआई भवन में लगी आग, कोई हताहत नहीं
नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की बिल्डिंग में मंगलवार दोपहर आग लग गई। हालांकि, दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई के चलते आग पर जल्द ही काबू पा लिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में किसी के घायल होने या हताहत होने की कोई सूचना नहीं है।
अधिकारियों के अनुसार, आग भवन परिसर के भीतर रखे सोलर पैनलों वाले एक बॉक्स से शुरू हुई थी।
दमकल विभाग को दोपहर करीब 1:05 बजे इस घटना की सूचना मिली, जिसके बाद तुरंत पांच दमकल गाड़ियों को मौके पर भेजा गया।
दमकलकर्मियों ने करीब 15 मिनट के भीतर आग पर काबू पा लिया, जिससे किसी बड़े नुकसान या आग के फैलने की आशंका को टाल दिया गया।
अधिकारियों ने पुष्टि की कि स्थिति को तेजी और सुरक्षित तरीके से संभाल लिया गया और भवन में मौजूद किसी भी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
यह घटना राजधानी में हाल ही में सामने आई एक अन्य आग की घटना के बाद हुई है। इससे पहले दिल्ली के चावड़ी बाजार इलाके में आग लग गई थी, जिसके संबंध में रविवार शाम करीब 7:21 बजे कनॉट प्लेस फायर स्टेशन को कॉल मिली थी।
दमकल की टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया और स्थिति को नियंत्रित किया गया।
इस बीच, पिछले सप्ताह रिजर्व बैंक ने बताया कि 2,000 रुपये मूल्यवर्ग के 98.47 प्रतिशत नोट प्रचलन से वापस आ चुके हैं; यह घोषणा किए जाने के लगभग तीन वर्ष बाद की स्थिति है।
रिजर्व बैंक ने 19 मई 2023 को 2,000 रुपये के नोटों को प्रचलन से वापस लेने की घोषणा की थी, जो कि उसकी मुद्रा प्रबंधन प्रक्रिया का हिस्सा था।
उस समय ऐसे नोटों का कुल मूल्य 3.56 लाख करोड़ रुपये था।
--आईएएनएस
डीएससी
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