द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान विमान हादसे में गंवाई जान, अमेरिकी वायुसेना कर्मी का 82 साल बाद हुआ अंतिम संस्कार
नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लापता हुए एक अमेरिकी नौसैनिक वायुसेना कर्मी के अवशेष करीब 80 साल बाद डीएनए जांच के जरिए पहचाने गए और हाल ही में उनके परिवार ने उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। 2 मई को उन्हें ईसाई रीति रिवाज से दफनाया गया।
अमेरिकी सेना की आधिकारिक डिफेंस वेबसाइट के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के एयरमैन रॉबर्ट सायर जूनियर का अंतिम संस्कार क्लियरवॉटर में किया गया। उनकी कहानी 22 जनवरी 1944 से शुरू होती है, जब वे और उनके आठ साथी एक सीप्लेन में सवार थे, जो टेकऑफ के दौरान दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में स्थित वानुआतु के सेगोंड चैनल में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
इस हादसे में तीन लोग बच गए, चार के शव तुरंत बरामद कर लिए गए, लेकिन सायर—जो उस समय सिर्फ 19 वर्ष के थे—और एक अन्य साथी लंबे समय तक लापता रहे।
जुलाई 2022 में सीलार्क एक्सप्लोरेशन के शोधकर्ताओं और गोताखोरों ने इस मलबे का पता लगाया। यह मिशन डिफेंस पीओडब्ल्यू/एमआईए अकाउंटिंग एजेंसी (डीपीएए) के अनुरोध पर किया गया था, जो युद्ध में लापता अमेरिकी सैनिकों की पहचान करने का काम करती है। बाद में कॉसमॉस आर्कियोलॉजी ने 2024 और 2025 में साइट की खुदाई की, जिसमें संभावित मानव अवशेष और हड्डियों के नमूने मिले।
इन अवशेषों की पहचान माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए और मानवविज्ञान विश्लेषण के जरिए की गई, जिससे पुष्टि हुई कि ये रॉबर्ट सायर जूनियर के ही हैं।
अमेरिकी ध्वज में लिपटा ताबूत, बंदूक सलामी और “टैप्स” की धुन के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। परिवार के सदस्यों ने कहा कि दशकों बाद उनकी तलाश खत्म हुई। हालांकि उनके अंतिम संस्कार में करीबी जन- मां, पिता और बहन मौजूद नहीं थे, क्योंकि ये तीनों ही अब इस दुनिया में नहीं हैं।
उनकी भांजी चिकी गोल्ड ने बताया कि सायर की मां को हमेशा विश्वास था कि उनका बेटा कहीं न कहीं जीवित या मौजूद है। वहीं उनके बेटे डॉन टीग ने कहा कि यह कहानी इस बात का उदाहरण है कि इतने वर्षों बाद भी खोज प्रयास जारी रहते हैं।
सायर को उनके सैन्य योगदान के लिए पर्पल हार्ट, कॉम्बैट एक्शन रिबन और वर्ल्ड वॉर II विक्ट्री मेडल जैसे सम्मान मिले थे। उनका नाम नेशनल मेमोरियल सेमेट्री ऑफ द पैसिफिक में “मिसिंग” सूची में दर्ज था, जहां अब उनके नाम के साथ एक रोसेट (लंबे फीतों से बना बिल्ला) जोड़ा जाएगा, यह दर्शाने के लिए कि उनकी पहचान हो चुकी है।
फिलाडेल्फिया में जन्मे और हार्टफोर्ड में पले-बढ़े सायर ने 17 साल की उम्र में नौसेना ज्वाइन की थी। उन्होंने दक्षिण-पश्चिम प्रशांत क्षेत्र में 1,12,000 मील से अधिक की गश्ती उड़ानें भरी थीं और सोलोमन द्वीपों की लड़ाई को आसमान से देखा था।
--आईएएनएस
केआर/
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बलूच संगठन का दावा: बलूचिस्तान में किए दस हमले, दस सैनिक और चार कथित एजेंट मारे गए
क्वेटा, 5 मई (आईएएनएस)। एक बलूच सशस्त्र संगठन ने दावा किया है कि उसने बलूचिस्तान के खारान, वाशुक, अवारान, केच और मस्तंग में पाकिस्तान की सेना के खिलाफ दस हमले किए और दस सैन्यकर्मियों और चार कथित सरकारी एजेंटों को मार गिराया। यह जानकारी स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई है।
बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) के प्रवक्ता मेजर ग्वाहरम बलूच ने बयान में कहा कि उनके लड़ाकों ने पाकिस्तान की फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) के चेकपोस्ट, सैन्य कैंप, एक काफिले, सड़क निर्माण कंपनी की सुरक्षा में लगे जवानों और उन लोगों को निशाना बनाया जिन्हें उन्होंने डेथ स्क्वाड एजेंट और सरकारी एजेंट बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि इन हमलों के दौरान हथियार भी कब्जे में लिए गए और निगरानी कैमरे नष्ट कर दिए गए।
बीएलएफ के मुताबिक, तीन मई को खारान के गाजी रोड पर एफसी चेकपोस्ट को रॉकेट और ग्रेनेड लॉन्चर से निशाना बनाया गया। उनका दावा है कि गोले सीधे पोस्ट के अंदर गिरे, जिससे नुकसान और हताहत हुए।
प्रवक्ता ने यह आरोप भी लगाया कि हमले के बाद पाकिस्तानी बलों ने लड़ाकों का पीछा करते हुए क्वाडकॉप्टर इस्तेमाल किए और आसपास के नागरिकों पर अंधाधुंध फायरिंग की। यह बात द बलूचिस्तान पोस्ट ने भी रिपोर्ट की।
बयान के अनुसार, दो मई को वाशुक के नाग-ग्रारी इलाके में एक इंटेलिजेंस-आधारित ऑपरेशन किया गया, जिसमें दो कथित डेथ स्क्वाड एजेंट मारे गए।
बीएलएफ ने दावा किया कि 29 अप्रैल को आवारान के तिरतेज इलाके में मुख्य सैन्य कैंप पर हमला किया गया। यह हमला एक स्नाइपर शॉट से शुरू हुआ, जिसमें ड्यूटी पर तैनात एक सैनिक मारा गया। इसके बाद एलएमजी और अन्य भारी हथियारों से फायरिंग की गई, जिससे कैंप के अंदर और नुकसान हुआ।
इसके अलावा, 28 अप्रैल को आवारान के कोलवाह इलाके के गेश्कूर-ज़ेक क्षेत्र में एक सैन्य चेकपोस्ट पर हमला किया गया। इसमें एक सैनिक स्नाइपर से मारा गया और फिर भारी हथियारों से चेकपोस्ट को निशाना बनाया गया।
बीएलएफ के अनुसार, 27 अप्रैल को मस्तंग के कैडेट कॉलेज चेकपोस्ट पर भी हमला हुआ, जहां ऑटोमैटिक हथियारों से फायरिंग कर दो सैनिकों को मार दिया गया और बाद में हाईवे पर नाकाबंदी कर दी गई।
उसी दिन खद कोचा में मक्का होटल के पास एक और नाकाबंदी की गई, जहां अजीज चेकपोस्ट पर भारी हथियारों से हमला कर चार सैनिकों को मारने और कई को घायल करने का दावा किया गया।
बीएलएफ ने यह भी कहा कि 27 अप्रैल को केच के दश्त क्षेत्र में तलार और बेरी के बीच एक चेकपोस्ट पर ग्रेनेड लॉन्चर से हमला किया गया और वहां लगे निगरानी कैमरे तोड़ दिए गए।
बयान में टंप के कोंशकलात इलाके की दो पुरानी घटनाओं का भी जिक्र किया गया, जहां बीएलएफ ने दावा किया कि उन्होंने दो लोगों को पकड़ा और बाद में मार दिया। उन पर पाकिस्तानी बलों के लिए जासूसी करने और बलोच नागरिकों के जबरन गायब होने व टारगेट किलिंग में शामिल होने का आरोप लगाया गया।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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