उज्जैन बैंक में हाईटेक चोरी! 85 लाख छोड़ डेटा लेकर फरार हुए चोर, मचा हड़कंप
उज्जैन जिले के खाचरोद में हुई एक बैंक चोरी ने पुलिस से लेकर आम लोगों तक सभी को हैरान कर दिया है। आमतौर पर चोरी का मतलब होता है पैसा या कीमती सामान गायब होना, लेकिन यहां कहानी बिल्कुल उलटी है। बैंक का ताला टूटा, अंदर घुसकर तोड़फोड़ भी हुई, लेकिन लॉकर में रखे करीब पचासी लाख रुपए को चोरों ने हाथ तक नहीं लगाया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि चोर सीधे कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंचे और वहां से सीपीयू उठाकर ले गए।
कैसे हुई यह अजीब वारदात
यह पूरा मामला उज्जैन से करीब पचहत्तर किलोमीटर दूर खाचरोद कस्बे का है। यहां गल्ला मंडी के सामने स्थित जिला सहकारी बैंक में रविवार रात चोरों ने धावा बोला। उन्होंने सबसे पहले चैनल गेट का ताला तोड़ा और बैंक के अंदर प्रवेश किया।
अंदर घुसते ही चोरों ने सीधे सुरक्षा व्यवस्था को निशाना बनाया। उन्होंने सीसीटीवी कैमरों के तार काट दिए, ताकि उनकी पहचान न हो सके। इसके बाद कंप्यूटर सिस्टम के तार भी खराब किए गए।
लेकिन सबसे बड़ी बात यह रही कि चोरों ने लॉकर में रखे लाखों रुपए को नजरअंदाज कर दिया और केवल सीपीयू लेकर फरार हो गए। इस तरह की उज्जैन बैंक चोरी ने पुलिस की जांच को और पेचीदा बना दिया है।
लॉकर में 85 लाख सुरक्षित
इस घटना का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब चोर बैंक में घुसे थे और उनके सामने पचासी लाख रुपए मौजूद थे, तो उन्होंने पैसे क्यों नहीं लिए? विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई सामान्य चोरी नहीं है।
संभावना जताई जा रही है कि चोरों का असली मकसद बैंक का डेटा हासिल करना था। सीपीयू में बैंक के खातों, लेन-देन और ग्राहकों की महत्वपूर्ण जानकारी होती है। अगर यह डेटा गलत हाथों में चला जाता है, तो इसका इस्तेमाल बड़े स्तर पर धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है।
सीसीटीवी सिस्टम ठप, डीवीआर नहीं मिला
जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो वहां का नजारा आम चोरी की घटनाओं से अलग था। लॉकर पूरी तरह सुरक्षित था, लेकिन सीसीटीवी कैमरे टूटे हुए थे और उनके तार कटे हुए थे।
सबसे बड़ी समस्या यह रही कि कैमरों का डीवीआर भी मौके पर नहीं मिला। बिना डीवीआर के फुटेज नहीं मिल पा रहा है, जिससे चोरों की पहचान करना मुश्किल हो गया है।
बैंक अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी टीम के आने के बाद ही डीवीआर से जुड़ी जानकारी मिल पाएगी। इस कारण उज्जैन बैंक चोरी की जांच फिलहाल धीमी गति से आगे बढ़ रही है।
स्टाफ पर भी शक, अंदरूनी साजिश की आशंका
इस पूरे मामले में पुलिस को कुछ बातें संदिग्ध लग रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह घटना सुनियोजित लगती है और इसमें अंदरूनी जानकारी का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।
बैंक के एक कर्मचारी ने बताया कि वह रविवार को छुट्टी के दिन भी बैंक आया था और शाम को ताला लगाकर गया था। इसके बाद रात में चोरी हुई। इससे यह शक और गहरा हो गया है कि कहीं इस घटना में किसी अंदर के व्यक्ति की भूमिका तो नहीं है। पुलिस अब हर एंगल से जांच कर रही है, ताकि इस उज्जैन बैंक चोरी की सच्चाई सामने आ सके।
पुलिस जांच में जुटी, हर एंगल से हो रही पड़ताल
पुलिस ने इस मामले में प्रकरण दर्ज कर लिया है और आसपास के क्षेत्रों में लगे कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। साथ ही बैंक स्टाफ से भी पूछताछ की जा रही है। तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि चोरी हुआ डेटा किस काम का था और उसका क्या इस्तेमाल किया जा सकता है।
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