Responsive Scrollable Menu

विक्रम साराभाई : इसरो की स्थापना में अहम भूमिका से लेकर परमाणु उर्जा आयोग के अध्यक्ष भी रहे

नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय भौतिक वैज्ञानिक और अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई की बुधवार को जयंती है। 12 अगस्त, 1919 को अहमदाबाद में उनका जन्म में एक प्रतिष्ठित उद्योगपति अंबालाल साराभाई के परिवार में हुआ था। बचपन से ही विज्ञान में उनकी रुचि थी। उन्होंने देश में अंतरिक्ष अनुसंधान की आवश्यकता को सबसे पहले रेखांकित किया और परमाणु ऊर्जा के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

विक्रम साराभाई परमाणु उर्जा आयोग के अध्यक्ष रहे थे। गणित और विज्ञान में बचपन से ही उनकी रुचि थी। जब वे कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से लौटे, तो 28 वर्ष की उम्र में अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी) की स्थापना की थी। वर्ष 1966 से 1971 तक उन्होंने यहां काम भी किया था। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम अहमदाबाद) की स्थापना में साराभाई की अहम भूमिका थी।

साराभाई कैंब्रिज जाने से पहले गुजरात में पढ़ाई करते थे। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वर्ष 1942 में, उनको भारत वापस लौटना पड़ा था। यहां आकर, उन्होंने ब्रह्मांडीय किरणों (कॉस्मिक रे) को लेकर शोध किया था। महान वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकटरमण के दिशा-निर्देश में उन्होंने इस पर रिसर्च किया था। इस शोध के बाद, वे फिर से कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में डॉक्टरेट करने चले गए थे। उन्होंने ब्रह्मांडीय किरणों पर एक थीसिस लिखा था। वर्ष 1947 में, वे देश में लौटे और फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी की स्थापना की।

वर्ष 1962 में विक्रम साराभाई ने इंडियन नेशनल कमिटी फॉर स्पेस रिसर्च की स्थापना की थी, बाद में इसका नाम बदलकर इसरो कर दिया गया। 1966 में वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा के निधन के बाद साराभाई को परमाणु उर्जा आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था। उन्होंने बतौर अध्यक्ष होमी जहांगीर भाभा के सपनों को आगे बढ़ाया।

विक्रम साराभाई ने भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल, अहमदाबाद), इंडियन इंस्टीट्यू ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम, अहमदाबाद), कम्युनिटी साइंट सेंटर (अहमदाबाद), दर्पण एकेडमी फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स (अहमदाबाद) और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (तिरुवनंतपुरम) की स्थापना की थी।

विक्रम साराभाई को कई पुरस्कारों से नवाजा गया था। वर्ष 1962 में उनको शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से नवाजा गया था। वर्ष 1966 में उनको पद्मभूषण दिया गया था। 30 दिसंबर 1971 को साराभाई का केरल के कोवलम में निधन हो गया था। वर्ष 1972 में मरणोपरांत उनको पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।

--आईएएनएस

एसडी/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

स्कूलों में मिलने वाले जंक फूड पर होगी और सख्ती; एफएसएसएआई ने वसा, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों के लिए प्रस्तावित की नई सीमाएं

नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने स्कूलों में बिकने वाले खाद्य पदार्थों को लेकर नियम और सख्त करने का प्रस्ताव रखा है। खाद्य नियामक ने ऐसे खाद्य उत्पादों की पहचान के लिए निर्धारित मात्रात्मक मानक प्रस्तावित किए हैं, जिनमें अधिक मात्रा में अतिरिक्त वसा, चीनी या नमक होता है।

भारत के राजपत्र (गैजेट ऑफ इंडिया) में प्रकाशित ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, एफएसएसएआई ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित भोजन और संतुलित आहार) विनियम, 2020 में संशोधन का प्रस्ताव दिया है, जिसका उद्देश्य स्कूलों में बच्चों के लिए उपलब्ध खाद्य पदार्थों को अधिक स्वस्थ बनाना और अस्वास्थ्यकर खानपान पर नियंत्रण करना है।

प्रस्तावित नियमों में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा जारी डायटरी गाइडलाइंस फॉर इंडियंस-2024 को आधार बनाया गया है, जिसके तहत ऐसे खाद्य पदार्थों की स्पष्ट पहचान की जाएगी, जिनमें अतिरिक्त वसा, चीनी या सोडियम की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक होगी।

एफएसएसएआई के प्रस्ताव के अनुसार, कोई भी ठोस खाद्य पदार्थ यदि प्रति 100 ग्राम में 4.2 ग्राम से अधिक अतिरिक्त वसा रखता है, तो उसे हाई फैट श्रेणी में रखा जाएगा। वहीं तरल खाद्य पदार्थों के लिए यह सीमा 1.5 ग्राम प्रति 100 मिलीलीटर तय की गई है।

इसी प्रकार, अतिरिक्त चीनी के मामले में ठोस खाद्य पदार्थों के लिए प्रस्तावित सीमा 3 ग्राम प्रति 100 ग्राम और तरल उत्पादों के लिए 2 ग्राम प्रति 100 मिलीलीटर निर्धारित की गई है। इससे अधिक चीनी वाले उत्पादों को हाई शुगर श्रेणी में वर्गीकृत किया जाएगा।

नमक या सोडियम की मात्रा को लेकर भी स्पष्ट मानक प्रस्तावित किए गए हैं। ड्राफ्ट के अनुसार, यदि किसी ठोस खाद्य पदार्थ में 0.625 ग्राम से अधिक नमक प्रति 100 ग्राम हो या किसी तरल उत्पाद में 0.175 ग्राम से अधिक नमक प्रति 100 मिलीलीटर पाया जाए, तो उसे हाई सोडियम की श्रेणी में रखा जाएगा।

नए प्रावधान को स्कूलों में निगरानी और निरीक्षण से संबंधित मौजूदा नियमों के बाद जोड़ा जाएगा, जिससे स्कूल परिसरों में उपलब्ध खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और पोषण स्तर का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।

एफएसएसएआई ने कहा है कि ये मसौदा नियम फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के प्रावधानों के तहत तैयार किए गए हैं और इन्हें केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति प्राप्त है।

खाद्य नियामक ने इस मसौदे पर आम जनता, खाद्य उद्योग, स्कूलों और अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। अधिसूचना सार्वजनिक होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर सुझाव भेजे जा सकते हैं।

एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि के भीतर प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद ही अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

  Sports

T20WC में Suryakumar के कैच पर T. Dilip: वह एक असाधारण मैच जिताऊ कैच था!

भारत के पूर्व फील्डिंग कोच टी. दिलीप ने ICC T20 वर्ल्ड कप 2024 के फ़ाइनल में सूर्यकुमार यादव के मैच जिताने वाले कैच के बारे में बात की। उन्होंने इसे मैच के लिहाज़ से असाधारण कैच बताया, जिसने ड्रेसिंग रूम में भावनाओं का सैलाब ला दिया। बारबाडोस में खेले गए फ़ाइनल के आखिरी ओवर में, जब हार्दिक पांड्या गेंदबाज़ी कर रहे थे और जीत के लिए 16 रनों की ज़रूरत थी, सूर्यकुमार ने डेविड मिलर को पवेलियन भेजने के लिए एक शानदार कैच पकड़ा। मिलर ने एक बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की और गेंद बाउंड्री के पास सूर्यकुमार के पास गई; उन्होंने पहले बाउंड्री के बाहर जाकर और फिर अंदर आकर सही तरीके से कैच पूरा किया। इसके बाद टीम की बैटिंग में ज़्यादा गहराई नहीं बची थी, इसलिए यह कैच असल में मैच जिताने वाला कैच साबित हुआ।
 

इसे भी पढ़ें: Afghanistan का जलवा! World Cup 2027 में सीधे क्वालीफाई, Rashid Khan का शानदार खेल


JioStar पर उस कैच के बारे में बात करते हुए T दिलीप ने कहा कि शुरुआती कुछ सेकंड्स तक मैं चुप और शांत था क्योंकि मेरा दिमाग़ हिसाब-किताब कर रहा था - क्या सूर्या ने गेंद को साफ़-सुथरे ढंग से पकड़ा था? क्या उनके पैर बाउंड्री रोप के अंदर थे? क्या उन्होंने सही समय पर गेंद को हवा में उछालकर वापस पकड़ा था? तो, मेरा दिमाग़ ये सब सोच रहा था। लेकिन जब यह पक्का हो गया कि यह एक क्लीन कैच था, तो भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हालांकि, मेरे दिमाग़ के किसी कोने में यह भी था कि मैच अभी खत्म नहीं हुआ है। लेकिन खेल के लिहाज़ से सूर्या का वह कैच असाधारण था।

अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पांड्या की तिकड़ी की शानदार डेथ बॉलिंग और विराट कोहली (76) व अक्षर पटेल (47) की बेहतरीन पारियों की बदौलत भारत ने ICC ट्रॉफी का सूखा खत्म किया। टीम ने बारबाडोस में खेले गए रोमांचक फ़ाइनल में पहली बार फ़ाइनल में पहुंची दक्षिण अफ़्रीका को 7 रन से हराकर अपना दूसरा ICC T20 वर्ल्ड कप ख़िताब जीता, जिसमें दक्षिण अफ़्रीका को जीत के लिए 177 रन बनाने थे।
 

इसे भी पढ़ें: Jason Roy यूरोपीय ETPL टूर्नामेंट के लिए ग्लास्गो कॉस्मिक टीम में शामिल हुए


दिलीप ने 2021 से लेकर 2024-25 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के खत्म होने तक भारतीय पुरुष टीम के फील्डिंग कोच के तौर पर काम किया। वे 2025 में भारत के UK टेस्ट दौरे के लिए एक साल के कॉन्ट्रैक्ट पर दोबारा फील्डिंग कोच बने, लेकिन कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद उन्हें आगे नहीं रखा गया। टीम इंडिया के साथ अपने कार्यकाल के दौरान, वे ICC T20 वर्ल्ड कप 2024, 2026 और ICC चैंपियंस ट्रॉफी 2025 जीतने वाली टीमों का हिस्सा रहे।
 
For more updates and in-depth coverage on cricket, visit Cricket News in Hindi at Prabhasakshi. 
Tue, 11 Aug 2026 14:56:41 +0530

  Videos
See all

Rashtravad | Rakesh Pandey | 'राष्ट्रवाद' में आज इन मुद्दों पर होगी बहस! #rashtravad #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-11T10:41:45+00:00

Jharkhand Protest पर क्या बोले Akhilesh Yadav? #ytshorts #shorts #news #viral #upnews #uttarpradesh #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-11T10:40:44+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers