Surya Grahan 2026 : आखिर सूर्य ग्रहण में क्यों पशु-पक्षी और इंसान हो जाते हैं भावुक, क्या है आसमान के सबसे बड़े विस्मयकारी शो का रहस्य
Surya Grahan 2026: जब से यह सौर मंडल है तब से सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण होते होंगे लेकिन आज भी इन ग्रहणों में सबसे बड़ा रहस्य छिपा हुआ है. सदियों से सूर्य ग्रहण को धरती के जीवों के लिए अपशकुन माना जाता था लेकिन अब वैज्ञानिकों के लिए आकाशीय रहस्यों से पर्दा उठाने का शानदार मौका बन जाता है. कई वैज्ञानिक अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि जब-जब ग्रहण लगता है, पशु-पक्षी से लेकर इंसानों के व्यवहारों में बदलाव आ जाता है.
तमिलनाडु विधानसभा में NEET के खिलाफ प्रस्ताव पास, विपक्षी DMK का भी मिला समर्थन
Tamil Nadu Assembly: तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर मेडिकल प्रवेश परीक्षा यानी नीट को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है. राज्य की विजय सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में नीट परीक्षा को पूरी तरह खत्म करने की मांग वाला एक प्रस्ताव पेश किया. इस प्रस्ताव में साफ तौर पर कहा गया है कि स्नातक स्तर के मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए नीट के बजाय 12वीं कक्षा के अंकों को ही आधार बनाया जाना चाहिए. इस कदम से राज्य में शिक्षा और मेडिकल दाखिले को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है.
सामाजिक न्याय और राज्य के अधिकारों पर जोर
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री केजी अरुणराज की ओर से यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव सदन के पटल पर रखा गया. प्रस्ताव पेश करते हुए उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा सामाजिक न्याय और समानता के बुनियादी सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इस तरह की केंद्रीय परीक्षाएं मेडिकल शिक्षा के मामले में राज्यों के संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकारों को भी सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं. सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था स्थानीय छात्रों के हित में नहीं है.
Tamil Nadu Assembly Session | NEET resolution has been passed in the Assembly with the support of DMK, AIADMK, Congress, PMK, DMDK, left parties and other smaller parties. Meanwhile, the BJP staged a walkout opposing the move.
— ANI (@ANI) August 11, 2026
ग्रामीण और तमिल माध्यम के छात्रों को नुकसान
स्वास्थ्य मंत्री ने नीट के दुष्परिणामों को रेखांकित करते हुए कहा कि यह परीक्षा तमिल माध्यम से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए बहुत बड़ी बाधा साबित हो रही है. इसके अलावा ग्रामीण इलाकों से आने वाले और सामाजिक या आर्थिक रूप से वंचित वर्गों के छात्रों के लिए डॉक्टर बनने के सपने को यह परीक्षा बहुत मुश्किल बना देती है. कोचिंग तक पहुंच न होने के कारण गरीब बच्चे इस स्पर्धा में पिछड़ जाते हैं, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होता है.
12वीं के अंकों के आधार पर दाखिले की मांग
तमिलनाडु सरकार ने केंद्र सरकार से पुरजोर मांग की है कि देश भर में या कम से कम राज्य स्तर पर नीट को समाप्त किया जाए. सरकार की मांग है कि 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर ही मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की पुरानी व्यवस्था फिर से लागू की जाए. सरकार का कहना है कि किसी भी बच्चे की 12 सालों की कड़ी मेहनत और स्कूली शिक्षा को एक दिन में होने वाली तीन घंटे की परीक्षा के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता.
पेपर लीक और विवादों का उठा मुद्दा
प्रस्ताव के पक्ष में बोलते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने हाल के दिनों में नीट परीक्षा से जुड़े विवादों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं, धांधली के आरोप और इसके तनाव के कारण युवाओं की जान जाने जैसे मामलों ने छात्रों के भरोसे को पूरी तरह तोड़ दिया है. ऐसे में यह सवाल उठाना जरूरी हो जाता है कि क्या 12 वर्षों की स्कूली पढ़ाई के बजाय सिर्फ एक दिन की परीक्षा से छात्रों का भविष्य तय करना न्यायसंगत है.
विपक्षी दलों का मिला जोरदार समर्थन
सदन में इस मुद्दे पर जोरदार चर्चा हुई और लगभग सभी प्रमुख दलों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया. सत्तारूढ़ दल के साथ-साथ डीएमके, एआईएडीएमके, पीएमके और वामपंथी दलों के सदस्यों ने भी इस प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया. सभी विपक्षी दलों की सहमति के बाद विधानसभा ने सर्वसम्मति से नीट को खत्म करने की मांग वाले इस प्रस्ताव को पास कर दिया, जिससे राज्य की एकजुटता दिखाई दी.
बीजेपी विधायक ने किया वॉकआउट
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान भारतीय जनता पार्टी का रुख अलग रहा. बीजेपी के एकमात्र विधायक भोजराजन ने प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया. वह प्रस्ताव पेश किए जाने के दौरान अपनी सीट पर खड़े हुए और अपनी आपत्ति दर्ज कराई. जब उनकी बात नहीं सुनी गई तो वह विरोध स्वरूप सदन से बाहर चले गए. इस तरह बीजेपी को छोड़कर सदन के बाकी सभी दलों ने नीट के खिलाफ एक सुर में आवाज उठाई.
केंद्र के फैसले पर टिकी निगाहें
कुल मिलाकर तमिलनाडु विधानसभा का यह फैसला नीट को लेकर राज्य की पुरानी और मजबूत आपत्ति को फिर से रेखांकित करता है. राज्य सरकार का स्पष्ट मानना है कि मौजूदा मेडिकल दाखिला प्रणाली से सामाजिक समानता और राज्यों के अधिकार छिन रहे हैं. अब देखना यह होगा कि राज्य विधानसभा द्वारा पारित इस नए प्रस्ताव पर केंद्र सरकार और न्यायपालिका का क्या रुख रहता है और क्या छात्रों को 12वीं के नंबरों पर दाखिला मिल पाता है.
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