AP POLYCET 2026: आंध्र प्रदेश पॉलीसेट का एडमिट कार्ड जारी, ऐसे करें डाउनलोड
AP POLYCET 2026: आंध्र प्रदेश स्टेट बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (SBTET) ने AP POLYCET 2026 के लिए हॉल टिकट जारी कर दिए हैं। जिन उम्मीदवारों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया है, वे अब आधिकारिक वेबसाइट के जरिए अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।
बोर्ड के अनुसार, AP POLYCET 2026 परीक्षा का आयोजन 25 अप्रैल 2026 को किया जाएगा। परीक्षा में शामिल होने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए हॉल टिकट साथ ले जाना अनिवार्य है। बिना एडमिट कार्ड के किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
यह परीक्षा उन छात्रों के लिए आयोजित की जाती है, जो आंध्र प्रदेश के पॉलिटेक्निक संस्थानों में इंजीनियरिंग, नॉन-इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी से जुड़े डिप्लोमा कोर्स में दाखिला लेना चाहते हैं। यह प्रवेश शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए होगा।
परीक्षा पैटर्न
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक परीक्षा ऑफलाइन मोड में होगी और इसमें कुल 120 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे:
- गणित: 50 प्रश्न
- भौतिकी: 40 प्रश्न
- रसायन विज्ञान: 30 प्रश्न
हर प्रश्न 1 अंक का होगा और इसमें कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं है। परीक्षा की अवधि 2 घंटे (120 मिनट) निर्धारित है। प्रश्नपत्र कक्षा 10 (SSC) के सिलेबस पर आधारित रहेगा।
ऐसे डाउनलोड करें AP POLYCET Hall Ticket 2026
- सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट polycetap.ap.gov.in पर जाएं
- होमपेज पर “Print Hall Ticket” लिंक पर क्लिक करें
- कक्षा 10 का हॉल टिकट नंबर या मोबाइल नंबर दर्ज करें
- 10वीं पास/अपियरिंग वर्ष भरें
- CAPTCHA कोड भरकर “View and Print Hall Ticket” पर क्लिक करें
- हॉल टिकट डाउनलोड कर प्रिंट निकाल लें
अमेरिका को झटका: सुरक्षा के लिए अब वाशिंगटन पर निर्भर नहीं रहेंगे ब्रिटेन और फ्रांस, यूरोपियन NATO' बनाने की तैयारी!
मिडिल-ईस्ट में जारी जंग और वैश्विक तनाव के बीच यूरोप ने एक ऐसा साहसिक कदम उठाया है जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। होर्मुज स्ट्रेट संकट और ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका के साथ बढ़ते मतभेदों के बीच, यूरोपीय देशों ने अब अमेरिका से अलग होकर अपनी स्वतंत्र सुरक्षा रणनीति बनाने का फैसला किया है।
ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व में एक नया सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिसे अनौपचारिक तौर पर 'यूरोपियन NATO' कहा जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट जैसे दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शिपिंग रूट को फिर से बहाल करना और अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
JUST IN: ???????????????? Italian PM calls for European NATO without USA, citing need for Europe to take responsibility for its own security. pic.twitter.com/e4qiopry6W
— BRICS Monitor (@BRICStracker) April 10, 2026
अमेरिका से किनारा: क्यों अलग राह पर चला यूरोप?
इस नई सुरक्षा योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें अमेरिका को जानबूझकर अलग रखा गया है। हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय देशों के बीच ईरान युद्ध और नौसैनिक नाकाबंदी जैसी रणनीतियों को लेकर गहरे मतभेद उभरे हैं।
कई यूरोपीय देशों ने अमेरिका के आक्रामक सैन्य अभियानों का समर्थन करने से इनकार कर दिया है। यही वजह है कि अब यूरोप "आत्मनिर्भर सुरक्षा" की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जर्मनी जैसे देश, जो पहले कभी अलग सैन्य गुट बनाने के खिलाफ थे, अब इस 'यूरोपियन NATO' की पहल का खुलकर समर्थन कर रहे हैं।
होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और मिशन के 3 मुख्य लक्ष्य
पूरी यूरोपियन रणनीति मुख्य रूप से होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित बनाने पर केंद्रित है, जहाँ से वैश्विक तेल सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। हालिया युद्ध और समुद्री खतरों की वजह से यहाँ शिपिंग बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस नए गठबंधन के तीन मुख्य लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं:
- युद्ध के दौरान संकट में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना।
- समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाना।
- भविष्य में जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए एक स्थायी निगरानी और एस्कॉर्ट सिस्टम तैयार करना।
संसदीय और कूटनीतिक पहल: 40 देशों की महाबैठक
इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टारमर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इसी हफ्ते 40 से ज्यादा देशों की एक बड़ी बैठक बुलाने जा रहे हैं। इस बैठक में नई सुरक्षा योजना और यूरोपीय कमांड के तहत बहुराष्ट्रीय रक्षा गठबंधन बनाने पर चर्चा होगी।
खास बात यह है कि यह पूरी व्यवस्था यूरोपीय कमान के तहत चलेगी, न कि अमेरिका के नेतृत्व में। यह कदम न केवल सुरक्षा बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है कि यूरोप अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए वाशिंगटन पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
चुनौतियां और भविष्य: क्या ईरान इसको मंजूरी देगा?
हालांकि यह योजना सुनने में जितनी प्रभावी है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि क्या ईरान इस तरह के किसी यूरोपीय मिशन को अपने क्षेत्र में मंजूरी देगा?
इसके अलावा, यूरोप को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इस मिशन के दौरान अमेरिका के साथ कोई नया टकराव न हो, क्योंकि अमेरिका पहले से ही अपनी नौसेना के जरिए इस क्षेत्र में दबाव बनाए हुए है। यदि यह योजना सफल होती है, तो यह 'यूरोपियन NATO' भविष्य में वैश्विक शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है।
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