भारत-म्यांमार रक्षा सहयोग पर चर्चा, नौसेना प्रमुख त्रिपाठी ने म्यांमार में की अहम बैठक
नेपीडॉ, 4 मई (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी और म्यांमार के रक्षामंत्री जनरल हटुन आंग ने सोमवार को नेपीडॉ में मुलाकात की और दोनों देशों के रिश्तों की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। सीएनएस एडमिरल त्रिपाठी इस समय म्यांमार के चार दिन के आधिकारिक दौरे पर हैं, जो मंगलवार को खत्म होगा।
भारतीय नौसेना के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बताया कि इस दौरे के दौरान एडमिरल त्रिपाठी ने म्यांमार के रक्षा मंत्री जनरल हटुन आंग से मुलाकात की। दोनों के बीच बातचीत में भारत-म्यांमार के रिश्तों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई और आगे किन क्षेत्रों पर ध्यान देना चाहिए, इस पर भी चर्चा हुई। साथ ही यह भी बताया गया कि दोनों देशों का रक्षा सहयोग क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए कितना अहम है।
बातचीत में चल रही संयुक्त गतिविधियों और भविष्य में साथ काम करने के नए तरीकों पर भी चर्चा हुई। इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और दोनों की सोच कई मामलों में मिल रही है।
रविवार को एडमिरल त्रिपाठी ने म्यांमार नौसेना के सेंट्रल नेवल कमांड के प्रमुख रियर एडमिरल आंग आंग नाइंग और ट्रेनिंग कमांड के प्रमुख रियर एडमिरल खुन आंग क्याव से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने, रक्षा साझेदारी को मजबूत करने और ऑपरेशनल गतिविधियों को बेहतर बनाने पर बात हुई।
दोनों पक्षों ने ट्रेनिंग को बेहतर बनाने और भविष्य में साथ काम करने के नए अवसरों पर भी चर्चा की। इस दौरान एडमिरल त्रिपाठी को यांगून में सेंट्रल नेवल कमांड मुख्यालय पर गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
उन्होंने म्यांमार के नेवल ट्रेनिंग कमांड का भी दौरा किया, जहां उन्होंने भारत की मदद से तैयार किए गए कुछ प्रोजेक्ट्स सौंपे। उन्हें वहां की ट्रेनिंग सुविधाओं और दोनों देशों के बीच चल रही ट्रेनिंग गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई।
उन्होंने ‘मोबाइल ट्रेनिंग टीम’ के काम की भी सराहना की और बताया कि भारत म्यांमार की क्षमता बढ़ाने और पेशेवर सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। इस दौरान उन्होंने कंटेनराइज्ड स्मॉल आर्म्स सिमुलेटर और रिजिड इन्फ्लेटेबल बोट भी सौंपी, जो बंगाल की खाड़ी में समुद्री सुरक्षा बढ़ाने में मदद करेगी।
भारतीय नौसेना के अनुसार, यह दौरा भारत और म्यांमार के पुराने और मजबूत रिश्तों को और मजबूत करता है, जो आपसी सम्मान, भरोसे और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बनाए रखने की साझा सोच पर आधारित हैं।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अरब देशों में संघर्ष से शिक्षा संकट गहराया, 10 करोड़ से ज्यादा बच्चे प्रभावित: यूनेस्को
बेरूत, 4 मई (आईएएनएस)। यूनेस्को की एक रिपोर्ट में सोमवार को चेतावनी दी गई कि क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष की वजह से अरब देशों में शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे दस करोड़ से ज्यादा बच्चों पर असर पड़ा है और पहले से कमजोर सिस्टम टूटने की कगार पर पहुंच गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 15 देशों में शिक्षा प्रभावित हुई है। स्कूल बंद होने, पढ़ाई तक कम पहुंच और ऑनलाइन पढ़ाई पर निर्भर होने की वजह से करीब 5.2 करोड़ स्कूली बच्चों की पढ़ाई में बाधा आई है। इससे पहले ही इस क्षेत्र में लगभग तीन करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर थे।
गाजा पट्टी में हालात बहुत खराब हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां शिक्षा व्यवस्था लगभग पूरी तरह टूट चुकी है। करीब 97.5 प्रतिशत स्कूल या तो खराब हो चुके हैं या पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, और 6.37 लाख से ज्यादा बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
लेबनान भी इससे काफी प्रभावित हुआ है। वहां 1,100 से ज्यादा सरकारी स्कूलों को शरण स्थल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है और कम से कम 570 स्कूल बंद हैं या संघर्ष वाले इलाकों में हैं। इससे 2.4 लाख से ज्यादा छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई है।
पूरे क्षेत्र में पढ़ाई अब इमरजेंसी और हाइब्रिड मॉडल (ऑफलाइन + ऑनलाइन) में चल रही है, लेकिन इसमें सबको बराबर सुविधा और अच्छी गुणवत्ता नहीं मिल पा रही है। यूनेस्को ने यह भी बताया कि बच्चों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है और लंबे समय तक पढ़ाई का नुकसान होने और स्कूल छोड़ने का खतरा भी बढ़ गया है।
सीरिया में हालात और मुश्किल हो गए हैं, क्योंकि लेबनान से लोग वापस आ रहे हैं। इससे वहां की पहले से कमजोर शिक्षा व्यवस्था पर और दबाव पड़ रहा है। कई लौटने वाले बच्चों को तुरंत पढ़ाई की जरूरत है, लेकिन स्कूल या तो भरे हुए हैं या शरण स्थल बने हुए हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई छूट रही है और दोबारा दाखिला लेना भी मुश्किल हो रहा है।
इसका असर सिर्फ संघर्ष वाले इलाकों तक सीमित नहीं है। इराक में करीब 7,500 स्कूल, जिनमें 20 लाख छात्र पढ़ते हैं, ऑनलाइन पढ़ाई पर चले गए हैं। वहीं खाड़ी देशों में एहतियात के तौर पर कुछ समय के लिए स्कूल बंद किए गए हैं और ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की गई है।
यूनेस्को ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो इस क्षेत्र को लंबे समय के लिए बड़ा नुकसान हो सकता है और एक पूरी पीढ़ी की पढ़ाई बर्बाद हो सकती है।
संस्था फिलहाल इमरजेंसी मदद बढ़ा रही है, जैसे अस्थायी स्कूल बनाना, डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पढ़ाई और बच्चों को मानसिक सहारा देना। साथ ही, उसने अंतरराष्ट्रीय मदद की भी अपील की है ताकि बच्चों की पढ़ाई जारी रखी जा सके और भविष्य में मजबूत शिक्षा व्यवस्था फिर से खड़ी की जा सके।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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