Bengal Election Result 2026: बंगाल में बड़ा उलटफेर,- ममता बनर्जी हारीं, सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट से हराया
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके पारंपरिक गढ़ भवानीपुर सीट पर भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा।
अंतिम आंकड़ों के मुताबिक अधिकारी को 73,463 वोट मिले जबकि ममता बनर्जी को महज 58,349 वोट हासिल हुए। इस जीत के साथ सुवेंदु अधिकारी ने इतिहास रच दिया है क्योंकि वे भाजपा के पहले ऐसे नेता बन गए हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी को दो बार हराया है। इससे पहले 2021 में नंदीग्राम से भी उन्होंने उन्हें पराजित किया था।
We will bounce back! pic.twitter.com/86PafNQSyd
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) May 4, 2026
.@ECISVEEP has abandoned even the faintest pretense of neutrality.
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) May 4, 2026
After deliberately delaying and dragging out the counting process, it is now refusing to issue certificates even in constituencies where victories are clear – Diamond Harbour, Magrahat Purba, Magrahat Paschim,…
हार के बाद ममता बनर्जी का हमला
हार के बाद ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 100 से ज्यादा सीटें गलत तरीके से छीनी गईं। उन्होंने केंद्रीय बलों के दुरुपयोग और चुनाव प्रक्रिया में पक्षपात का आरोप लगाया।
ममता ने कहा कि यह नैतिक जीत नहीं है और तृणमूल कांग्रेस मजबूती से वापसी करेगी।उन्होंने केंद्रीय बलों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया और कहा कि निर्वाचन आयोग BJP के पक्ष में काम कर रहा है।
“यह नैतिक जीत नहीं, लेकिन हम वापसी करेंगे”
ममता बनर्जी ने अपनी हार को “अनैतिक जीत” बताते हुए कहा कि यह पूरी प्रक्रिया गैर-कानूनी है और उन्होंने इसे “लूट” तक करार दिया, हालांकि उन्होंने साफ तौर पर कहा कि तृणमूल कांग्रेस इस हार से टूटने वाली नहीं है और पार्टी मजबूती से वापसी करेगी, उनके बयान “हम वापसी करेंगे” ने साफ संकेत दिया है कि बंगाल की राजनीति में टकराव अभी और तेज होने वाला है।
बंगाल की राजनीति में नए संकेत
भवानीपुर जैसी सीट पर ममता बनर्जी की हार को सिर्फ एक चुनावी परिणाम नहीं बल्कि बड़े राजनीतिक बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, इससे यह साफ हो गया है कि BJP अब बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत कर चुकी है और TMC के पारंपरिक वोट बैंक में भी सेंध लगने लगी है, ऐसे में आने वाले समय में राज्य की राजनीति और ज्यादा दिलचस्प और मुकाबले वाली होने की संभावना है।
असम में 'कमल' का कमाल: 82 सीटों के साथ भाजपा की प्रचंड वापसी, कांग्रेस 19 सीटों पर सिमटी!
असम की राजनीति में आज एक नया इतिहास रचा गया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लगातार तीसरी बार सत्ता पर कब्जा जमाकर विपक्ष के 'महागठबंधन' को चारों खाने चित कर दिया है। 126 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा गठबंधन ने न केवल बहुमत का जादुई आंकड़ा (64) पार किया, बल्कि 100 से अधिक सीटें जीतकर एकतरफा जीत दर्ज की है।
| पार्टी | सीटें |
| BJP | 82 |
| CONGRESS | 19 |
| BOPF | 10 |
| AGP | 10 |
| RJRD | 02 |
| AITC | 01 |
जोरहाट में गौरव गोगोई की हार
इस चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर जोरहाट विधानसभा सीट पर देखने को मिला। कांग्रेस के दिग्गज नेता और लोकसभा में उपनेता गौरव गोगोई को भाजपा के हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने करारी शिकस्त दी है। गौरव गोगोई को करीब 23,182 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। असम की राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले तरुण गोगोई के बेटे की यह हार कांग्रेस के लिए असम में सबसे बड़ा झटका मानी जा रही है।
'हिमंता फैक्टर' और तीसरी बार सुशासन की जीत
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने खुद जालुकबारी सीट से रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की है। चुनाव परिणामों ने साबित कर दिया है कि असम की जनता ने घुसपैठ के खिलाफ कड़े रुख, विकास योजनाओं और बुनियादी ढांचे में हुए सुधारों पर अपनी मुहर लगा दी है। भाजपा ने असमिया पहचान और विकास को जिस तरह से पेश किया, उसके सामने कांग्रेस और AIUDF का गठबंधन पूरी तरह बिखर गया।
सहयोगियों का साथ और विपक्ष का सूपड़ा साफ
भाजपा के पुराने सहयोगी AGP (10 सीटें) और बोडो पीपुल्स फ्रंट (10 सीटें) ने भी शानदार प्रदर्शन किया है। दूसरी ओर, बदरुद्दीन अजमल की AIUDF मात्र 2 सीटों पर सिमट गई है, जो यह दर्शाता है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी मतदाताओं ने इस बार विकास को प्राथमिकता दी है। तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने भी 1 सीट जीतकर असम में अपनी प्रतीकात्मक उपस्थिति दर्ज कराई है।
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