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घुसपैठिए मुस्लिम खदेड़े, अब नेपाल से क्यों भगाए जा रहे चीनी लोग!

जिस वक्त नेपाल में फिर से देश को हिंदू राष्ट्र घोषित कराने के लिए भारी संख्या में सड़कों पर हिंदू उतरे हुए हैं और इसके लिए सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं। ठीक इसी दौरान नेपाल से ऐसी खबर आई है जिसने चीन और अमेरिका में बहुत बड़ी खलबली मचा दी है। जब भी नेपाल में राजनीतिक हलचलें होती हैं तो उसका आरोप कहीं ना कहीं चीन और अमेरिका पर लगता है। हाल ही में जब नेपाल में तख्तापलट हुआ तो इसका भी आरोप चीन और अमेरिका पर ही लगा। लेकिन अब नेपाल ने ही चीन और अमेरिका को बहुत बड़ा झटका दिया है। दरअसल एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि साल 2021 से 2025 के बीच नेपाल से सबसे ज्यादा चीनी नागरिकों को निकाला गया है। 

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नेपाल की सालाना रिपोर्ट में विभाग ने बताया कि नेपाल ने 695 चीनी नागरिकों को निकाला है जो देश से डिपोर्ट किए गए विदेशी नागरिकों का सबसे बड़ा हिस्सा है। नेपाल ने 5 साल में कुल 2267 विदेशी नागरिकों को देश से डिपोर्ट किया है। जिनमें चीनी नागरिकों की हिस्सेदारी 30.65% रही है। नेपाल की इस लिस्ट में दूसरे पायदान पर अमेरिका के नागरिक रहे हैं। अमेरिका के 191 नागरिकों को डिपोर्ट किया गया है। और तीसरे नंबर पर बांग्लादेश रहा जिसके 145 नागरिकों को डिपोर्ट किया गया। चौथे पर यूके और पांचवें पर पाकिस्तान के नागरिक रहे जिन्हें रिपोर्ट किया गया। नेपाल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आंकड़े बताते हैं कि कुछ देशों के नागरिक किस कदर इमीग्रेशन कानून का उल्लंघन करते हैं। 

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दरअसल 2025 में निकाले गए अपने नागरिकों की संख्या के मामले में भी चीन इस लिस्ट में सबसे ऊपर था। नेपाल ने उस साल कुल 523 विदेशी नागरिकों को देश से निकाला था। जिनमें से 120 चीनी नागरिक थे। 2023 में भी चीनी नागरिकों का डिपोर्टेशन भी बहुत ज्यादा हुआ। इस दौरान 209 चीनी नागरिकों को डिपोर्ट किया गया जो 2023 में नेपाल से डिपोर्ट किए गए सभी विदेशी नागरिकों का 46% था। तो इस तरह से चीनी नागरिकों को लेकर नेपाल में शिकंजा कसता जा रहा है। यह सब तब हो रहा है जब बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों को नेपाल से खदेड़ने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं।

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दरअसल नेपाल में चीन की बढ़ती सक्रियता और निवेश भारत के लिए कई मोर्चों पर गहरी चिंता का विषय बनता जा रहा था। लेकिन जिस तरह से नेपाल चीनी नागरिकों पर एक्शन ले रहा है उससे उतना तो साफ है कि कहीं ना कहीं चीन और नेपाल के रिश्तों में खटास दिखाई दे रही है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में नेपाल और क्या कुछ एक्शन लेता है। 

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ईरान के डर से अपना एयरफोर्स-1 विमान छोड़-छाड़ झट से ली सीक्रेट फ्लाइट, Turkey से गुप्त तरीके से भागे ट्रंप?

खुद को दुनिया का सबसे ताकतवर देश बताने वाला अमेरिका और वहां के राष्ट्रपति जो खुद को सबसे ताकतवर लीडर बताते हैं। डोनाल्ड ट्रंप, वह ईरान के डर से चोरी-छुपे चुपचाप अपना प्लेन बदलकर तुर्की से वापस अमेरिका लौटते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के डर से अपने सबसे ताकतवर विमान एयरफोर्स वन की जगह एक छोटे से सैन्य विमान में चुपचाप बिना किसी को कानों कान खबर लगे तुर्की से वापस ब्रिटेन लौटे थे। दरअसल ट्रंप को लेकर एक ऐसा बड़ा खुलासा सामने आया है जिसने उनके तुर्की दौरे को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि जुलाई में जो नाटो समेत तुर्की में आयोजित की गई थी ट्रंप जब वहां से ब्रिटेन के लिए रवाना हुए थे तो उनका पूरा ट्रैवल प्लान अचानक से बदल दिया गया था और यह सब कुछ ईरान के डर से था। 

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रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप को एयरपोर्ट पर एक कैटरिंग ट्रक की आड़ में एक छोटे से सन विमान तक पहुंचाया गया। इसके बाद उन्हें अमेरिकी एयरफोर्स के C32A से तुर्की से बाहर निकाला गया। यानी कि कैमरों को दिखाई देने के लिए वो विमान एयरफोर्स वन में चढ़ते हैं और इसके बाद छुप-छुपाकर एक छोटे से सैन्य विमान में बैठकर तुर्की से बाहर निकलते हैं। पुराने एयरफोर्स वन विमान को भी उनके साथ ब्रिटेन भेजा गया ताकि बाहर से देखने वाले लोगों को यही लगे कि अमेरिकी राष्ट्रपति एयरफोर्स वन में सवार होकर ब्रिटेन पहुंचा है। दोनों विमान कुछ मिनटों के अंतर पर ब्रिटेन पहुंचे। और अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर अमेरिका जो खुद को इतना शक्तिशाली बताता है वो ईरान के डर से अपने सबसे भरोसेमंद विमान को क्यों छोड़ देगा?
इसके पीछे कई सारी वजह बताई गई है। जिसमें से एक बड़ी वजह यह है कि ट्रंप जब नाटो समिति के लिए तुर्की गए थे तो तुर्की की सीमा ईरान से लगती है। ऐसे में अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने ट्रंप की यात्रा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने का फैसला किया और उन्हें चुपचाप निकालने के लिए यह कारवाई की। 

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आपको बता दें कि ट्रंप अपने नए बोइंग 7478 विमान में पहुंचे थे। यही विमान है जो क़तर की तरफ से अमेरिका को दान दिया गया है। जिसे अब ट्रंप एयरफोर्स वन की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इस नए विमान की यह पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा थी। लेकिन वापसी के वक्त अचानक इससे वापसी नहीं की गई। उस समय ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा था कि वह पुराने समय की याद दिलाने के लिए पुराने एयरफोर्स वन से उड़ान भरेंगे। लेकिन रिपोर्ट्स का दावा है कि असल में राष्ट्रपति को कुछ देर बाद ऐसे ही गुपचुप तरीके से C32 ए विमान तक पहुंचाया गया और वहां से वह रवाना हो गए। ट्रंप के यूं प्लेन बदलने की जानकारी किसी को नहीं थी।

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  Sports

Duleep Trophy से पहले Vaibhav Sooryavanshi का हल्ला बोल, रिकॉर्डतोड़ बल्लेबाज का नेट्स में जोरदार अभ्यास

ज़िम्बाब्वे के सफल दौरे के बाद, भारतीय बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी ने आने वाले घरेलू सीज़न की तैयारी के लिए ज़ोरदार नेट प्रैक्टिस की। सूर्यवंशी ने अपने ऑफ़िशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वे डिफ़ेंसिव और अटैकिंग, दोनों तरह की बल्लेबाज़ी तकनीकों पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए दिखे। पोस्ट का कैप्शन बस इतना ही था: तैयारी। सूर्यवंशी ने 15 साल की उम्र में भारत के इंग्लैंड दौरे पर इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था। 
 

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उस समय उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ा था क्योंकि वे अपनी तीन पारियों में 20 रन का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए थे और भारत वह सीरीज़ 1-4 से हार गया था। हालांकि, उनका अगला ज़िम्बाब्वे दौरा काफी सफल रहा; उन्होंने तीन पारियों में 151 रन बनाकर सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में टॉप किया। इसमें दो फिफ्टी और 196.10 का शानदार स्ट्राइक रेट शामिल था। खास बात यह है कि उनका सबसे ज़्यादा स्कोर 81 रन था, जिसके लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़' का अवॉर्ड मिला। यह सीरीज़ नए T20I कप्तान श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारत की पहली सीरीज़ थी, जो आयरलैंड और इंग्लैंड से मिली हार के बाद खेली गई थी।

कुल मिलाकर छह T20 इंटरनेशनल मैचों में, सूर्यवंशी ने 32.16 की औसत और 189.21 के स्ट्राइक रेट से 193 रन बनाए हैं, जिसमें दो अर्धशतक शामिल हैं। जब उन्होंने मैनचेस्टर में इंग्लैंड के खिलाफ़ दूसरे T20I मैच में इंटरनेशनल डेब्यू किया, तब वे सिर्फ़ 15 साल और 99 दिन के थे; इस तरह वे भारत के सबसे युवा इंटरनेशनल क्रिकेटर बने और सचिन तेंदुलकर का लंबे समय से चला आ रहा रिकॉर्ड तोड़ा।
 

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2026-27 के घरेलू सीज़न के शुरुआती दिलीप ट्रॉफी मैचों के लिए, ईस्ट ज़ोन के सेलेक्टर्स ने विकेटकीपर-बल्लेबाज़ ईशान किशन को कप्तान और सूर्यवंशी को उप-कप्तान नियुक्त किया। IPL और इंटरनेशनल क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद सूर्यवंशी की तेज़ी से आगे बढ़ने की यात्रा में यह नियुक्ति एक और अहम पड़ाव है। क्रिकइन्फो के अनुसार, उनके बंगाल के अनुभवी बल्लेबाज़ अभिमन्यु ईश्वरन के साथ पारी की शुरुआत करने की उम्मीद है।
 
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Tue, 11 Aug 2026 12:52:03 +0530

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