गर्मी आते ही तेज धूप स्किन पर अपना असर दिखाने लगती है। कुछ ही दिनों में फेस मुरझाया हुआ और सांवला नजर आने लगता है। इसको सन टैनिंग कहा जाता है। गर्मियों में स्किन की देखभाल करना जरूरी हो जाता है। तपती गर्मी में हुई टैनिंग को दूर करने के लिए मार्केट में कई तरह के महंगे प्रोडक्ट्स और ट्रीटमेंट मौजूद है। लेकिन इससे नेचुरल ग्लो नहीं आता है। लेकिन भारतीय किचन में ऐसे कई प्राकृतिक उपाय मौजूद हैं, जो धीरे-धीरे टैनिंग को कम कर सकते हैं। वहीं स्किन की प्राकृतिक चमक वापस ला सकते हैं।
वहीं आप सही घरेलू उपाय अपनाकर सन टैन को काफी हद तक कम कर सकते हैं। वहीं टैनिंग से बचने के लिए ज्यादा देर तक सीधे धूप में जाने से बचें, धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाएं। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और मॉइस्चराइज रखें। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 5 ऐसे होममेड फेस मास्क के बारे में बताने जा रहे हैं, जो टैनिंग को हटाकर प्राकृतिक निखार देंगे।
बेसन और दूध का फेस मास्क
सदियों से बेसन भारतीय सौंदर्य परंपरा का हिस्सा रहा है। यह स्किन की गंदगी और टैन हटाने में मदद करता है। बेसन स्किन को एक्सफोलिएट करता है और डेड स्किन को हटाता है। इसको बनाने के लिए दो चम्मच बेसन और दो चम्मच दूध मिलाएं और एक चुटकी हल्दी मिलाकर पेस्ट बना लें। अब इसे फेस पर 15 मिनट के लिए लगाएं और फिर हल्के गुनगुने पाने से फेस वॉश कर लें।
दही और हल्दी का फेस मास्क
दही में लैक्टिक एसिड पाया जाता है, जोकि स्किन को रंगत निखारने में मदद करता है। हल्दी और दही का फेस मास्क टैनिंग को कम करता है। यह स्किन को मॉइस्चराइज करता है और नेचुरल ग्लो देता है। दो चम्मच दही में एक चुटकी हल्दी और एक चम्मच शहद मिलाएं। फिर फेस पर लगाएं और 15 मिनट बाद फेस वॉश कर लें।
टमाटर और दही का फेस मास्क
टमाटर में प्राकृतिक ब्लीचिंग गुण होते हैं। जोकि टैनिंग को कम करने में मदद करता है। टमाटर का फेस पैक बनाने के लिए दो चम्मच टमाटर के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर फेस पर 15-20 मिनट के लिए लगाएं। फिर ठंडे पानी से फेस वॉश कर लें। यह फेस मास्क स्किन को ब्राइट बनाता है और ऑयल कंट्रोल करता है।
एलोवेरा और नींबू का फेस मास्क
एलोवेरा स्किन को ठंडक देता है और धूप से होने वाली जलन को कम करता है। इसका फेस पैक लगाने से स्किन को ठंडक मिलती है। टैनिंग कम होती है और यह स्किन को हाइड्रेट रखता है। दो चम्मच एलोवेरा जेल में आधा चम्मच नींबू मिलाकर लगाएं। फिर 15 मिनट बाद फेस वॉश कर लें।
खीरा और चंदन का फेस मास्क
खीरा स्किन को ठंडक देता है और चंदन स्किन को शांत करता है। खीरा और चंदन का फेस पैक बनाने के लिए दो चम्मच खीरे का रस और एक चम्मच चंदन पाउडर मिलाकर पेस्ट बना लें। इस फेस मास्क को फेस पर 15 मिनट के लिए लगाएं। इससे सनबर्न में राहत मिलती है। साथ ही इससे स्किन को ठंडन मिलती है और टैनिंग को कम करने में असरदार है।
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यूरोप में लैपटॉप से जुड़े एक अहम नियम को लागू किया गया है, जिससे आने वाले समय में चार्जिंग को लेकर बड़ी सुविधा देखने को मिल सकती है। मौजूद जानकारी के अनुसार, नए नियम के तहत कंपनियों को लैपटॉप में एक समान चार्जिंग व्यवस्था अपनानी होगी और ग्राहकों को यह विकल्प भी मिलेगा कि वे बिना चार्जर के लैपटॉप खरीद सकें।
बता दें कि इस फैसले का मकसद अनावश्यक इलेक्ट्रॉनिक कचरे को कम करना और ग्राहकों का खर्च घटाना है। अब कंपनियों को अपने उत्पाद की पैकेजिंग पर यह साफ-साफ बताना होगा कि उस लैपटॉप को चार्ज करने के लिए कितनी क्षमता वाले चार्जर की जरूरत होगी, ताकि ग्राहक सही विकल्प चुन सकें।
गौरतलब है कि स्मार्टफोन और छोटे उपकरणों की तुलना में लैपटॉप की बैटरी बड़ी होती है और उन्हें चार्ज करने के लिए ज्यादा ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। इसी वजह से कंपनियों को अपने डिजाइन और तकनीक में बदलाव करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया था और अब यह समयसीमा पूरी होने के बाद नियम लागू किए जा रहे हैं।
इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा पर्यावरण को मिलने की उम्मीद है। मौजूद जानकारी के अनुसार, हर साल बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक कचरा सिर्फ इसलिए पैदा होता है क्योंकि हर नए उपकरण के साथ नया चार्जर दिया जाता है। अब इस अनिवार्यता के खत्म होने से कचरे में कमी आएगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
इसके अलावा ग्राहकों को भी सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। अगर किसी के पास पहले से अच्छा चार्जर मौजूद है तो उसे नया चार्जर खरीदने की जरूरत नहीं होगी। खासकर स्कूल, दफ्तर और बड़े संस्थानों के लिए यह बदलाव काफी उपयोगी साबित हो सकता है, जहां एक साथ बड़ी संख्या में उपकरण इस्तेमाल होते हैं।
सुविधा के लिहाज से भी यह कदम अहम माना जा रहा है। अब अलग-अलग उपकरणों के लिए अलग-अलग चार्जर रखने की जरूरत कम हो जाएगी और एक ही शक्तिशाली चार्जर से कई उपकरणों को चार्ज किया जा सकेगा। इससे यात्रा के दौरान भी लोगों को राहत मिलेगी और सामान कम रखना पड़ेगा।
बता दें कि यह नियम सिर्फ नए लैपटॉप पर लागू होगा जो तय तारीख के बाद बाजार में आएंगे। जिन लोगों के पास पहले से पुराने लैपटॉप हैं, उन्हें किसी तरह का बदलाव करने की जरूरत नहीं होगी और वे अपने पुराने चार्जर का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं।
जानकारों का मानना है कि यूरोप जैसे बड़े बाजार में लागू हुए इस फैसले का असर दुनिया के अन्य हिस्सों, खासकर भारत पर भी पड़ सकता है। आमतौर पर बड़ी तकनीकी कंपनियां अलग-अलग बाजारों के लिए अलग डिजाइन नहीं बनातीं, इसलिए आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर एक जैसी चार्जिंग व्यवस्था देखने को मिल सकती है।
हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि हर चार्जर एक जैसा नहीं होता। अलग-अलग लैपटॉप के लिए अलग क्षमता की जरूरत होती है, इसलिए ग्राहकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका चार्जर पर्याप्त ऊर्जा प्रदान कर सके। कुल मिलाकर यह बदलाव सुविधा, बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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