पीएम ई-ड्राइव योजना मार्च 2028 तक बढ़ी, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर मिलेगी 5,000 रुपए तक की सब्सिडी
नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ई-ड्राइव (पीएम ई-ड्राइव) योजना की अवधि दो वर्ष बढ़ाकर 31 मार्च 2028 तक कर दी है। इस योजना के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों (ईवी-2डब्ल्यू) की खरीद पर प्रोत्साहन राशि जारी रहेगी। सरकार का लक्ष्य देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को गति देना, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करना और घरेलू ईवी विनिर्माण को मजबूत बनाना है।
भारी उद्योग मंत्रालय के अनुसार, विस्तारित पीएम ई-ड्राइव योजना के लिए 11,900 करोड़ रुपए का कुल प्रावधान किया गया है। योजना का फोकस इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने, चार्जिंग नेटवर्क विकसित करने और भारत को ईवी निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने पर रहेगा।
नई व्यवस्था के तहत 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2028 के बीच खरीदे गए पंजीकृत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर खरीद प्रोत्साहन (इंसेंटिव) दिया जाएगा। सरकार ने यह प्रोत्साहन 2,500 रुपए प्रति किलोवाट-घंटा (केडब्ल्यूएच) निर्धारित किया है, जिसकी अधिकतम सीमा 5,000 रुपए प्रति वाहन होगी।
हालांकि, इस लाभ के लिए पात्र इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन की अधिकतम एक्स-फैक्ट्री कीमत 1.5 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए।
सरकार ने योजना के तहत अधिकतम 45.79 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को सहायता देने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए मंत्रालय द्वारा 2,767 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
हालांकि नई योजना में मिलने वाली सब्सिडी पहले की तुलना में कम है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर 5,000 रुपए प्रति केडब्ल्यूएच की दर से प्रोत्साहन दिया जाता था, जिसकी अधिकतम सीमा 10,000 रुपए प्रति वाहन थी।
मंत्रालय ने कहा है कि भविष्य में ईवी की लागत में कमी को देखते हुए प्रति केडब्ल्यूएच प्रोत्साहन राशि की समय-समय पर समीक्षा की जा सकती है।
इसके अलावा, सब्सिडी की राशि वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। यानी अधिकतम निर्धारित प्रोत्साहन या वाहन की कीमत का 15 प्रतिशत, दोनों में जो कम होगा, वही लाभ दिया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पीएम ई-ड्राइव एक फंड-सीमित योजना के रूप में संचालित होगी। इसका मतलब है कि कुल भुगतान 11,900 करोड़ रुपए के निर्धारित बजट तक ही सीमित रहेगा। यदि योजना के लिए निर्धारित राशि या किसी विशेष घटक के लिए आवंटित फंड पहले ही समाप्त हो जाते हैं, तो उस घटक को बंद किया जा सकता है और उसके बाद नए दावों पर विचार नहीं किया जाएगा।
योजना के तहत सभी श्रेणियों के लिए 31 मार्च 2028 अंतिम तारीख होगी, जबकि सब्सिडी दावों को जमा करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2027 निर्धारित की गई है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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महिला शक्ति को मजबूत बनाने पर जोर, सीएम धामी बोले- विकसित उत्तराखंड की मजबूत आधारशिला है मातृशक्ति
CM Dhami: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में आयोजित महिला संवाद एवं सम्मान समारोह में प्रदेश की महिलाओं से संवाद किया. इस दौरान उन्होंने महिलाओं की अपेक्षाओं और सुझावों को जाना और नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की मातृशक्ति राज्य के विकास की सबसे मजबूत आधारशिला है.
कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के आंदोलन से लेकर आज तक उत्तराखंड की महिलाओं ने कठिन परिस्थितियों में भी परिवार, समाज और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने महिलाओं के परिश्रम, साहस और आत्मविश्वास को उत्तराखंड की असली ताकत बताया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में महिलाओं ने लंबे समय से कई चुनौतियों का सामना करते हुए अपने परिवार और समाज को आगे बढ़ाने का काम किया है. खेती-बाड़ी, स्वरोजगार, छोटे व्यवसाय और सामाजिक कार्यों से लेकर शिक्षा और विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. ऐसे में महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है.
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महिलाओं को आगे बढ़ने के ज्यादा अवसर देने पर जोर
सीएम धामी ने कहा कि सरकार का लगातार प्रयास है कि प्रदेश की बेटियों और महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार और नेतृत्व के क्षेत्र में अधिक से अधिक अवसर मिलें. सरकार चाहती है कि महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और अपनी प्रतिभा व क्षमता के दम पर प्रदेश के विकास में बड़ी भूमिका निभाएं. उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने से न सिर्फ उनका जीवन बेहतर होता है, बल्कि इसका सकारात्मक असर पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है. महिला सशक्तिकरण के जरिए ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी जा सकती है.
‘उत्तराखंड का दशक’ बनाने में महिलाओं की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने बाबा केदार की पावन भूमि से कहा था कि 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संकल्प को पूरा करने में प्रदेश की महिलाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को विकसित और समृद्ध राज्य बनाने के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है. इसमें महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है. अगर प्रदेश की महिलाएं शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार और नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ेंगी, तो इसका सीधा फायदा राज्य की प्रगति को मिलेगा.
महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार की कोशिश
सीएम धामी ने कहा कि सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है. उनका उद्देश्य है कि प्रदेश की बेटियों को बेहतर शिक्षा मिले, महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलें और वे अपने फैसले खुद लेने में सक्षम बनें.
उन्होंने कहा कि महिलाओं के सुझाव और अनुभव सरकार के लिए महत्वपूर्ण हैं. महिला संवाद जैसे कार्यक्रमों के जरिए सरकार सीधे महिलाओं से उनकी समस्याएं, जरूरतें और अपेक्षाएं जानने का प्रयास कर रही है. इससे सरकार की योजनाओं को जमीन पर बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिल सकती है.
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राज्य आंदोलन से विकास तक महिलाओं का योगदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की मातृशक्ति ने हमेशा कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत दिखाई है. राज्य निर्माण के आंदोलन से लेकर आज तक महिलाओं ने प्रदेश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. अब जरूरत है कि उनकी इसी ऊर्जा और क्षमता को विकास के नए अवसरों से जोड़ा जाए.
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर और सशक्त महिलाएं ही आत्मनिर्भर परिवार और मजबूत समाज की नींव रखती हैं. सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड की महिलाएं न केवल अपने परिवार बल्कि प्रदेश के विकास में भी नेतृत्वकारी भूमिका निभाएं. इसी भागीदारी के साथ उत्तराखंड को विकसित और समृद्ध राज्य बनाने के संकल्प को आगे बढ़ाया जाएगा.
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