Explainer: Gen Z Rising अभियान आज क्यों खास? जानिए क्या है ये मुहिम और क्या होगा
Gen Z Rising 2026: देशभर के युवाओं और छात्रों के बीच 'Gen Z Rising' अभियान इस समय सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) द्वारा शुरू की गई यह मुहिम युवाओं के अधिकारों, शिक्षा सुधार और रोजगार की एक बड़ी राष्ट्रीय आवाज बनकर उभरी है.
'Gen Z Rising' अभियान आज क्यों खास है?
रांची इस आंदोलन का शुरुआती बिंदु रहा है, जहां 7 अगस्त 2026 को इस राष्ट्रव्यापी यात्रा का आगाज हुआ था. पिछले कई दिनों से रांची के छात्र JPSC और JSSC जैसी राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, धांधली और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ भारी बारिश और अनशन के बीच सड़कों पर डटे हुए हैं. हाल ही में वहां हुए तीखे छात्र प्रदर्शनों और पुलिसिया कार्रवाई (आंसू गैस के गोले) ने इसे पूरे देश के मीडिया का मुख्य केंद्र बना दिया है. रांची में छात्रों की आवाज बुलंद करने के बाद, आज यह कारवां कोलकाता में युवाओं को एकजुट करने और छात्र-युवा संवाद आयोजित करने के लिए आगे बढ़ चुका है.
क्या है यह 'Gen Z Rising' मुहिम?
यह ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) द्वारा देश के युवाओं को संगठित करने के लिए शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी जनसंपर्क और जागरूकता अभियान है. इसका नेतृत्व संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और उनके युवा साथी कर रहे हैं. यह आंदोलन मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दों पर केंद्रित है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को खत्म करने और हालिया NEET व अन्य पेपर लीक मामलों पर कड़ा एक्शन लेने की मांग. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को वापस लेने और सभी के लिए सस्ती व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना. युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करना और अधूरी पड़ी सरकारी भर्तियों को समय पर पूरा करना.
क्यों अलग है 'Gen Z' का यह अंदाज?
पारंपरिक आंदोलनों से अलग, आज की युवा पीढ़ी (Gen Z, जो डिजिटल युग में पली-बढ़ी है) इस लड़ाई को एक नए तेवर के साथ लड़ रही है. सोशल मीडिया पर मजबूत कैंपेनिंग के साथ-साथ ये छात्र जमीन पर भी मजबूती से डटे हैं. रांची के प्रदर्शनों में युवाओं ने 'स्पाइडर-मैन' की वेशभूषा जैसे रचनात्मक और अनूठे तरीकों से सरकार का ध्यान आकर्षित किया है. वहीं, इसमें किसी एक स्थापित राजनीतिक दल के बजाय आम छात्र अपनी मर्जी और अधिकारों के लिए स्वत: स्फूर्त होकर जुड़ रहे हैं.
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अब आगे क्या होगा?'
Gen Z Rising' का यह पहला चरण 7 अगस्त से 29 अगस्त 2026 तक देश के विभिन्न राज्यों में चलेगा. यह कोलकाता के बाद यह यात्रा जयपुर (14 अगस्त), महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा के प्रमुख शैक्षणिक परिसरों और शहरों तक जाएगी. हर शहर और यूनिवर्सिटी कैंपस में जाकर यह टीम छात्रों के साथ सीधे संवाद करेगी, 'युवा संसद' का आयोजन करेगी और उनकी स्थानीय समस्याओं (जैसे राज्यों के पेपर लीक) को एक बड़े राष्ट्रीय मंच पर जोड़कर सरकार पर दबाव बनाएगी. यह अभियान आने वाले समय में देश की राजनीति और छात्र अधिकारों की दिशा तय करने में एक 'गेम-चेंजर' साबित हो सकता है.
जोड़ों के दर्द से राहत दिलाएगा घुटना संचालन, आयुष मंत्रालय से जानिए सही विधि
नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। घुटना संचालन योग के उन व्यायामों में से एक है जिसे अभ्यास की शुरुआत में किया जाता है। यह अभ्यास विशेष रूप से घुटनों और कूल्हों के जोड़ों को मजबूत बनाने में सहायक होता है। आजकल की जीवनशैली में घंटों बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधि की कमी और उम्र के साथ जोड़ों में जकड़न की समस्या आम हो गई है। ऐसे में घुटना संचालन शरीर को अंदर से गर्म करता है, रक्त संचार को बेहतर बनाता है और मांसपेशियों को अगले योगाभ्यास के लिए तैयार करता है।
आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर घुटना संचालन योग करने की पूरी विधि बताई। इस अभ्यास को करने के लिए सबसे पहले किसी शांत और हवादार स्थान पर चटाई बिछाकर सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों के बीच लगभग एक फुट की दूरी रखें और रीढ़ को सीधा रखें। अब अभ्यास शुरू करें। श्वास लेते हुए दोनों भुजाओं को धीरे-धीरे कंधों के स्तर तक ऊपर उठाएं और ध्यान रखें कि हथेलियां नीचे की ओर रहें। भुजाएं कंधे की सीध में और जमीन के समानांतर होनी चाहिए। इसके बाद श्वास छोड़ते हुए घुटनों को धीरे-धीरे मोड़ें और शरीर को आधे बैठे हुए स्थिति में लाएं।
इस स्थिति में ऐसा महसूस होना चाहिए जैसे आप किसी कुर्सी पर बैठने जा रहे हैं। पीठ सीधी रखें, पेट अंदर और कंधे ढीले रखें। अंतिम स्थिति में पहुंचकर कुछ सेकंड रुकें। इस अवस्था में दोनों भुजाएं और दोनों घुटने जमीन के समानांतर रहने चाहिए। दृष्टि सामने और शरीर संतुलित रखें।
अब श्वास लेते हुए धीरे-धीरे शरीर को वापस सीधा करें और साथ ही भुजाओं को भी नीचे ले आएं। इस पूरी प्रक्रिया को एक चक्र माना जाता है। शुरुआत में इसे दो बार दोहराएं। धीरे-धीरे अपनी क्षमता के अनुसार आप इसे 3 से 5 बार तक बढ़ा सकते हैं। अभ्यास पूरा होने के बाद सामान्य स्थिति में वापस आकर कुछ देर विश्राम करें।
अभ्यास के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सबसे जरूरी है कि श्वास को सहज और सामान्य रखें। श्वास को न रोकें और न ही झटके से कोई गति करें। यह अभ्यास अपनी क्षमता के अनुसार ही करें। यदि अभ्यास के दौरान घुटनों या कमर में तेज दर्द महसूस हो तो तुरंत रुक जाएं। खासतौर पर आर्थराइटिस यानी गठिया के गंभीर दर्द, सूजन या हाल ही में हुई सर्जरी की स्थिति में इस अभ्यास को बिल्कुल न करें।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
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