Pasta Types: हर पास्ता मैकरोनी नहीं! जानिए 7 शेप के नाम, अगली बार मेन्यू देखकर नहीं होंगे कन्फ्यूज
Pasta Types: क्या आप भी रेस्टोरेंट जाकर मेन्यू में पास्ता की अलग-अलग शेप देखकर कन्फ्यूज हो जाते हैं? कई बार नाम समझ न आने पर बस अपनी पसंद का पास्ता ऑर्डर कर देते हैं और दोस्तों के सामने थोड़ी फजीहत भी हो जाती है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो यह जानकारी आपके काम की है। पास्ता की 7 पॉपुलर शेप के नाम जान लीजिए, ताकि अगली बार ऑर्डर करते समय कन्फ्यूजन न हो।
1.मैकरोनी (Macaroni)
मैकरोनी छोटी और मुड़ी हुई ट्यूब जैसी पास्ता शेप होती है। इसका इस्तेमाल सबसे ज्यादा चीज़ी पास्ता, मैकरोनी चीज़ और कई तरह की बेक्ड डिश बनाने में किया जाता है।
2.फारफाले (Farfalle)
फारफाले का आकार तितली या बो जैसा दिखाई देता है। इसका बीच का हिस्सा पतला और दोनों तरफ का हिस्सा फैला हुआ होता है। यही खास शेप इसे दूसरे पास्ता से अलग बनाती है।
3.कैवाटाप्पी (Cavatappi)
कैवाटाप्पी सर्पिल या कॉर्कस्क्रू जैसी घुमावदार शेप वाला पास्ता है। इसकी बनावट ऐसी होती है कि गाढ़ी और क्रीमी सॉस इसमें अच्छी तरह टिक जाती है।
4.पेन (Penne)
पेन पास्ता छोटी ट्यूब जैसा होता है, जिसके दोनों सिरे तिरछे कटे होते हैं। इसे टोमैटो सॉस, क्रीमी सॉस और चीज़ी सॉस के साथ बनाया जाता है।
5.टॉर्टिग्लियोनी (Tortiglioni)
टॉर्टिग्लियोनी देखने में मोटी ट्यूब जैसा होता है और इसकी बाहरी सतह पर गहरी धारियां होती हैं। इसकी बनावट सॉस को पास्ता की सतह पर अच्छी तरह पकड़ने में मदद करती है।
6.कैनेलोनी (Cannelloni)
कैनेलोनी बड़े आकार की खोखली ट्यूब जैसा पास्ता होता है। इसे आमतौर पर चीज़, सब्जियों या अन्य फिलिंग से भरकर सॉस के साथ बेक किया जाता है।
7.फुसिली (Fusilli)
फुसिली अपनी घुमावदार और स्पाइरल शेप के लिए पहचाना जाता है। इसकी बनावट के कारण सॉस घुमावदार हिस्सों में अच्छी तरह चिपक जाती है। इसे कई तरह की पास्ता रेसिपी में इस्तेमाल किया जाता है।
अलग शेप के साथ बदल जाता है पास्ता का स्वाद
पास्ता की अलग-अलग शेप सिर्फ देखने में ही अलग नहीं होतीं, बल्कि उनकी बनावट के हिसाब से सॉस और रेसिपी का चुनाव भी किया जाता है। कुछ शेप गाढ़ी सॉस को अच्छी तरह पकड़ती हैं, तो कुछ हल्की सॉस और सलाद के लिए बेहतर मानी जाती हैं।
अगर आप भी पास्ता के शौकीन हैं, तो अगली बार रेस्टोरेंट में अपनी पसंदीदा डिश ऑर्डर करते समय इन अलग-अलग पास्ता शेप के नाम जरूर पहचानने की कोशिश करें।
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बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ने की वजह सिर्फ बच्चे नहीं, नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा
नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। आज के समय में बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना माता-पिता के लिए आसान नहीं है। पढ़ाई, मनोरंजन से लेकर कभी-कभी बच्चे को शांत कराने तक, मोबाइल, टीवी या टैबलेट परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। इस बीच फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (एफआईयू) की एक नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
एफआईयू के सेंटर फॉर चिल्ड्रन एंड फैमिलीज की इस रिसर्च में 4 से 8 साल की उम्र के बच्चों की देखभाल करने वाले 822 लोगों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि माता-पिता का तनाव बच्चों के स्क्रीन इस्तेमाल से किस तरह जुड़ा हुआ है। स्टडी के नतीजे फैमिली रिलेशन्स जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।
रिसर्च में सामने आया कि जिन माता-पिता में भावनात्मक तनाव ज्यादा था, वे बच्चों के स्क्रीन टाइम पर लगातार नियम लागू करने में अपेक्षाकृत कम सक्षम थे। वहीं, जिन माता-पिता को बच्चे के व्यवहार से ज्यादा परेशानी या दबाव महसूस होता था, वे मुश्किल परिस्थितियों में बच्चे को शांत कराने या व्यस्त रखने के लिए स्क्रीन का सहारा ज्यादा लेते थे।
स्टडी की प्रमुख लेखिका और एफआईयू की मनोविज्ञान की डॉक्टरेट छात्रा एनिड मोरेरा के मुताबिक, रिसर्च में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि बच्चों के मीडिया इस्तेमाल से जुड़े फैसलों पर माता-पिता का अपना तनाव भी असर डालता है। इसलिए बच्चों के साथ-साथ माता-पिता को भी सहयोग देना जरूरी है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि हर परिवार से सिर्फ यह कहना कि बच्चे का स्क्रीन टाइम कम कर दीजिए, हमेशा व्यावहारिक समाधान नहीं हो सकता। कई बार माता-पिता के लिए स्क्रीन किसी मुश्किल पल को संभालने का एक आसान जरिया होती है। ऐसे में सवाल यह होना चाहिए कि बच्चा स्क्रीन पर क्या देख रहा है और उसका असर कैसा है।
रिसर्चर्स का सुझाव है कि माता-पिता बच्चों की उम्र के हिसाब से ऐसा कंटेंट चुनें, जो उन्हें कुछ सिखाए, उनकी रुचि बढ़ाए और उनके विकास में मदद करे। साथ ही यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि स्क्रीन की वजह से बच्चे की नींद, खेलकूद, परिवार के साथ समय या पढ़ाई प्रभावित न हो।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स भी परिवारों को सिर्फ स्क्रीन के मिनट गिनने के बजाय कंटेंट की गुणवत्ता, रोजमर्रा की दिनचर्या और बच्चे के स्वस्थ विकास पर ध्यान देने की सलाह देती है।
विशेषज्ञों ने स्क्रीन इस्तेमाल को समझने के लिए 5 सी ऑफ मीडिया यूज पर ध्यान देने की भी सलाह दी है। पहला है चाइल्ड, यानी बच्चे की उम्र, स्वभाव और उसकी व्यक्तिगत जरूरतों को समझना। दूसरा है कंटेंट, यानी बच्चे के लिए उसकी उम्र के अनुसार सही, उपयोगी और दिलचस्प कंटेंट चुनना। तीसरा है काम, यानी यह देखना कि बच्चा हर बार परेशान या रोने पर स्क्रीन पर निर्भर तो नहीं हो रहा। चौथा है क्राउडिंग आउट, यानी स्क्रीन के कारण बच्चे की नींद, खेल-कूद, परिवार के साथ समय या दूसरी जरूरी गतिविधियां कम तो नहीं हो रही हैं। पांचवां है कम्युनिकेशन, यानी बच्चे से टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को लेकर खुलकर बात करना।
शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर किसी मुश्किल दिन में माता-पिता बच्चे को कुछ देर स्क्रीन दे देते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि उन्होंने कोई बड़ी गलती कर दी। असली जरूरत यह है कि ऐसे इस्तेमाल को थोड़ा ज्यादा सोच-समझकर किया जाए।
सीनियर रिसर्चर शायला ग्रिफिथ के मुताबिक, जब माता-पिता के पास जरूरी संसाधन और सहयोग होता है, तो वे बच्चों के लिए बेहतर सीमाएं तय कर पाते हैं और उनके साथ ज्यादा सकारात्मक तरीके से जुड़ पाते हैं।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
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