डिहाइड्रेशन से बचाव का आसान उपाय 'ओआरएस', शरीर में बनाता है नमक-पानी का संतुलन
नई दिल्ली, 3 मई (आईएएनएस)। गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन की समस्या आम हो जाती है। खासकर दस्त या उल्टी होने पर शरीर में पानी और नमक की कमी तेजी से बढ़ जाती है, जिससे कमजोरी, चक्कर आना और गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट यानी ओआरएस को सबसे आसान, सस्ता और प्रभावी उपाय बताते हैं।
नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के अनुसार, ओआरएस गर्मियों में खास तौर पर लाभकारी है। यह शरीर में पानी और जरूरी नमक (इलेक्ट्रोलाइट्स) को तेजी से पूरा करता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है और कमजोरी से बचाता है। डॉक्टरों का कहना है कि दस्त शुरू होते ही पर्याप्त पानी पीने के साथ ओआरएस का सेवन शुरू कर देना चाहिए। इससे शरीर का पानी-नमक संतुलन बना रहता है और मरीज जल्दी ठीक हो जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ओआरएस दस्त के इलाज में सबसे प्रभावी और सुरक्षित तरीका है। दस्त होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और ओआरएस का सेवन शुरू करें। गर्मियों में ज्यादा पसीना आने, ज्यादा धूप में रहने या पेट खराब होने पर भी ओआरएस का इस्तेमाल फायदेमंद रहता है।
अब ये जानना जरूरी है कि शरीर के लिए गर्मियों में खास तौर पर ओआरएस क्यों है जरूरी? दस्त या उल्टी होने पर शरीर से पानी के साथ-साथ सोडियम, पोटैशियम जैसे महत्वपूर्ण तत्व भी निकल जाते हैं। साधारण पानी पीने से केवल प्यास बुझती है, लेकिन खोए गए नमक की भरपाई नहीं होती। ओआरएस ठीक यही काम करता है। यह घर पर भी आसानी से तैयार किया जा सकता है या बाजार में उपलब्ध पैकेट वाले ओआरएस का इस्तेमाल किया जा सकता है।
ओआरएस बनाने के लिए एक लीटर उबले और ठंडे पानी में ओआरएस पाउच मिलाकर अच्छी तरह घोल लें। दस्त या उल्टी के दौरान छोटे-छोटे घूंट लेकर पीते रहें। यह बच्चों, बड़ों और बुजुर्गों सभी के लिए यह सुरक्षित है।
नेशनल हेल्थ मिशन लोगों को जागरूक कर रहा है कि छोटी-छोटी लापरवाही भी डिहाइड्रेशन का रूप ले सकती है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों में यह समस्या गंभीर हो सकती है। इसलिए ओआरएस के समय रहते सेवन करना चाहिए, जिससे शरीर को कई फायदे मिते हैं। ओआरएस शरीर को तेजी से हाइड्रेट करता है। कमजोरी और थकान कम करता है। खास बात है कि यह अस्पताल जाने की जरूरत कम करता है और यह आसान और सस्ता उपाय है।
--आईएएनएस
एमटी/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
केंद्र कोयला गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए नए इंसेंटिव पैकेज देने की कर रहा तैयारी, आत्मनिर्भर बनने में मिलेगी मदद
नई दिल्ली, 3 मई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार देश में कोयला गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए नया इंसेंटिव पैकेज देने की तैयारी कर रहा है और इसका परिव्यय 35,000 करोड़ रुपए से अधिक होने का अनुमान है। यह जानकारी सूत्रों के हवाले से दी गई।
इसे कोयला मंत्रालय द्वारा जनवरी 2024 में शुरू किए गए 8,500 करोड़ रुपए के इंसेंटिव प्रोग्राम का की विस्तार माना जा रहा है, जिसने देश में कोयला गैसीफिकेशन की नींव रखी थी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा विचाराधीन प्रस्तावित योजना का उद्देश्य देशभर में सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं में तेजी लाना है, जिससे एलएनजी, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट और अमोनिया पर आयात निर्भरता कम करके आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना का लक्ष्य 2030 तक 10 करोड़ टन कोयला गैसीकरण क्षमता के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति को तेज करना भी है।
देश में कोल गैसीकरण को ऐसे समय पर बढ़ावा दिया जा रहा है, जब मध्य पूर्व संघर्ष के कारण एलएनजी, उर्वरक और उर्वरक कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला में बाधा बनी हुई है।
इस वर्ष फरवरी में कोयला मंत्रालय ने घोषणा की थी कि उसने देश के कार्बन उत्सर्जन को कम करने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई 8,500 करोड़ रुपए की कोयला गैसीकरण प्रोत्साहन योजना की श्रेणी II के तहत चयनित आवेदकों को लेटर ऑफ अवार्ड (एलओए) जारी कर दिए हैं।
योजना की श्रेणी II के तहत, निजी कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) को प्रति परियोजना 1,000 करोड़ रुपए या पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) का 15 प्रतिशत, जो भी कम हो, आवंटित किया गया है।
ओडिशा के अंगुल में जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड की 2 मिमीपीए कोयला गैसीकरण परियोजना को 569.05 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया है। 3,793 करोड़ रुपए की इस परियोजना में कोयला गैसीकरण के माध्यम से कोयले को डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (डीआरआई) में परिवर्तित किया जाएगा।
न्यू एरा क्लीनटेक सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के भद्रावती में स्थित अपने कोयला गैसीकरण परियोजना के लिए 1,000 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया है। 6,976 करोड़ रुपए की कुल परियोजना लागत वाली इस परियोजना का लक्ष्य प्रति वर्ष 0.33 मिलियन मीट्रिक टन अमोनियम नाइट्रेट और 0.1 मिलियन मीट्रिक टन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है।
इसी प्रकार, ग्रेटा एनर्जी लिमिटेड को महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के भद्रावती जिले के एमआईडीसी में स्थित अपने कोयला गैसीकरण परियोजना के लिए 414.01 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया है।
कोयला गैसीकरण पहल का उद्देश्य कोयला गैसीकरण में तकनीकी प्रगति को गति देना, कार्बन उत्सर्जन को काफी हद तक कम करना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और अधिक टिकाऊ ऊर्जा परिदृश्य की नींव रखना है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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