मुफ्त में मिल रहे चूजे और दाना, झारखंड सरकार की इस नई योजना से ग्रामीण महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर!
Jharkhand Government: झारखंड सरकार की ओर से ग्रामीण इलाकों में आर्थिक खुशहाली लाने और लोगों को खुद के पैरों पर खड़ा करने के लिए एक बड़ी पहल की गई है. इसी कड़ी में प्रखंड मुख्यालय में पशुपालन विभाग के माध्यम से एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कुक्कुट पालन को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसरों को पैदा करना है. सरकार का मानना है कि खेती के साथ-साथ अगर ग्रामीण पशुपालन की ओर भी ध्यान दें, तो उनकी आमदनी में बड़ा इजाफा हो सकता है.
लाभार्थियों के बीच सामग्री का वितरण
पशुपालन विभाग के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान दर्जनों महिला और पुरुष लाभार्थियों को सहायता प्रदान की गई. प्रत्येक लाभार्थी को 500 पीस चूजे दिए गए. केवल चूजे ही नहीं, बल्कि उनके पालन-पोषण के लिए जरूरी दाना, दवाइयां और कीट सामग्री भी वितरित की गई. यह पूरी किट सरकार की ओर से इसलिए दी गई ताकि शुरुआत में पशुपालकों को अपनी जेब से अधिक खर्च न करना पड़े और वे बिना किसी आर्थिक तनाव के अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकें. लाभार्थियों के चेहरे पर इस मदद को पाकर काफी खुशी देखी गई.
जनप्रतिनिधियों ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के लिए प्रखंड प्रमुख पार्वती देवी और बीस सूत्री अध्यक्ष मनोहर राम मुख्य रूप से उपस्थित रहे. इनके अलावा डॉक्टर नकुल मोदी, युवा नेता गौतम कुमार और प्रियंका कुमारी ने भी कार्यक्रम में शिरकत की. इन सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से अपने हाथों से लाभार्थियों को चूजे और अन्य सामग्री प्रदान की. इस दौरान अतिथियों ने लोगों को समझाया कि सरकार की इन योजनाओं का सही लाभ कैसे लिया जा सकता है और कैसे छोटे स्तर से शुरू किया गया यह काम भविष्य में बड़ा मुनाफा दे सकता है.
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
इस अवसर पर प्रखंड प्रमुख पार्वती देवी ने कहा कि सरकार की यह पहल ग्रामीणों को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में एक सराहनीय कदम है. उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल खेती पर निर्भर रहकर परिवार का पालन-पोषण करना कठिन होता जा रहा है, इसलिए महिलाओं और पुरुषों को पशुपालन जैसे क्षेत्रों में आगे आना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि जब ग्रामीण आत्मनिर्भर होंगे, तभी राज्य और देश का विकास संभव है. यह योजना विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए वरदान है जो घर के कामकाज के साथ अपनी आय बढ़ाना चाहती हैं.
अन्य पशुपालन योजनाओं की मांग
बीस सूत्री अध्यक्ष मनोहर राम ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पशुपालन विभाग की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए. उन्होंने इस सफल आयोजन की सराहना की लेकिन साथ ही सरकार से एक विशेष मांग भी की. उन्होंने कहा कि कुक्कुट पालन की तरह ही गाय पालन, सूअर पालन और बकरी पालन को भी बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की जरूरत है. अगर सरकार इन क्षेत्रों में भी इसी तरह की सब्सिडी और सहायता प्रदान करे, तो झारखंड के गांवों से पलायन काफी हद तक रुक सकता है.
रोजगार का बेहतर विकल्प है पशुपालन
युवा नेता गौतम कुमार ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हमारे क्षेत्र में कृषि के अलावा रोजगार के साधन काफी सीमित हैं. ऐसे में युवाओं के लिए कुक्कुट, बकरी और गाय पालन रोजगार का एक शानदार विकल्प बनकर उभर सकता है. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सरकारी योजनाओं की जानकारी रखें और उनका लाभ उठाएं. उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन से छोटे स्तर का कुक्कुट पालन भी एक बड़े पोल्ट्री फार्म का रूप ले सकता है, जिससे न केवल परिवार बल्कि दूसरों को भी रोजगार दिया जा सकता है.
ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी
इस वितरण कार्यक्रम में इलाके की कई महिलाओं ने हिस्सा लिया. लाभार्थियों की सूची में मुख्य रूप से गायत्री देवी, सोनी कुमारी, खुशबू देवी, जमनी देवी और सुकनी देवी का नाम शामिल रहा. इन सभी महिलाओं ने सरकार की इस योजना के प्रति आभार जताया. कार्यक्रम के अंत में विभाग के अधिकारियों ने चूजों के रख-रखाव और बीमारियों से बचाव के तरीके भी बताए ताकि लाभार्थियों को आगे चलकर किसी तरह का नुकसान न उठाना पड़े. प्रशासन की इस सक्रियता से ग्रामीणों में उत्साह का माहौल बना हुआ है.
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ईरान : 'इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी' में जहां हुई थी बमबारी वहां बनेगा ‘वॉर म्यूजियम’
तेहरान, 3 मई (आईएएनएस)। ईरान ने इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में अमेरिकी-इजरायली हमलों से क्षतिग्रस्त हिस्से को ‘वॉर म्यूजियम’ में तब्दील करने की योजना बनाई है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम हालिया संघर्ष के दौरान वैज्ञानिक संस्थानों पर हुए हमले के दर्द को दर्शाने के लिए उठाया जा रहा है।
संस्थान के प्रमुख जफरोल्लाह कलांतरी ने बताया कि “मौजूदा क्षतिग्रस्त स्थल को संरक्षित किया जाएगा और इसे वॉर म्यूजियम के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि यह देश के वैज्ञानिक दमन का ऐतिहासिक दस्तावेज बन सके।”
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के अन्य हिस्सों में नए भवनों के निर्माण और उन्नत उपकरणों की व्यवस्था के लिए अलग से स्थान चिन्हित किया गया है। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, प्रारंभिक आकलन में विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे को करीब 1.1 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को ईरान के प्रमुख शहरों पर अमेरिका-इजरायल ने संयुक्त हमले किए थे। अगले 40 दिनों तक ये जारी रहा। मार्च माह में ही ईरान के एमआईटी (मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) माने जाने वाले इस संस्थान को निशाने पर लिया गया।
ईरानी अधिकारियों का दावा है कि देशभर में 30 से अधिक विश्वविद्यालयों को इन हमलों में नुकसान पहुंचा, जिनमें राजधानी तेहरान के संस्थान भी शामिल हैं। इसके अलावा रिहायशी इलाकों और अन्य नागरिक ढांचे को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है।
अमेरिका-इजरायल का मानना है कि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में केवल ज्ञान-विज्ञान की बातें नहीं होतीं बल्कि उन घातक बैलिस्टिक मिसाइलों और शाहेद ड्रोनों का ब्लूप्रिंट निकलता है जो पूरी दुनिया के लिए खतरनाक है।
1974 में जब इसकी नींव रखी गई, तो इसे अमेरिकी तकनीकी शिक्षा की तर्ज पर ईरान को आधुनिक बनाने के लिए बनाया गया था. लेकिन समय बदला और आज यही ‘ज्ञान का मंदिर’ ईरान के सैन्य-औद्योगिक परिसर का सबसे मजबूत स्तंभ बन चुका है.
इस स्थल को संग्रहालय में बदलने का फैसला न केवल हमलों के नतीजे को दर्शाने के लिए है, बल्कि इसे एक प्रतीकात्मक कदम के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिसके जरिए ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उजागर करना चाहता है।
--आईएएनएस
केआर/
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