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दक्षिण कोरिया में एयरफोर्स पायलटों के नौकरी छोड़ने से सिलसिला बढ़ा, आखिर वजह क्या है?

सोल, 3 मई (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया में वायुसेना के प्रशिक्षित पायलट पिछले एक दशक में बेहतर वेतन वाली नागरिक एयरलाइंस में काम पाने के लिए स्वेच्छा से अपनी नौकरी छोड़ रहे हैं। पिछले एक दशक में 896 वायुसेना पायलटों ने बेहतर वेतन और अपेक्षाकृत कम जोखिम वाली कमर्शियल एयरलाइन्स की नौकरी ज्वाइन कर चुके हैं। रविवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई।

वायुसेना के एक अधिकारी ने बताया कि पायलटों के पलायन को रोकने के लिए नए कदम उठाए जा रहे हैं और उनके कल्याण में सुधार की कोशिश की जा रही है।वायुसेना द्वारा संसद की राष्ट्रीय रक्षा उपसमिति के सदस्य केंग डे सिक को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से मार्च 2026 तक 896 कुशल वायुसेना पायलटों ने स्वेच्छा से सेवा छोड़ी।

वायुसेना कुशल पायलट उन पायलटों को मानती है जिनके पास 8 से 17 वर्षों का अनुभव होता है और जो स्वयं ऑपरेशन संचालित करने के साथ-साथ जूनियर पायलटों को प्रशिक्षण देने में सक्षम होते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार वायुसेना पायलटों ने अपनी नौकरी छोड़ी, उनमें 730 फाइटर पायलट और 148 कार्गो पायलट और 18 हेलीकॉप्टर (रोटरी-विंग) पायलट शामिल हैं। इनमें से 622 पायलट ने कोरियन एयर की नौकरी ज्वाइन कर ली, जबकि 146 पायलटों ने एशियाना एयरलाइन्स की नौकरी ज्वाइन कर ली, जिसका विलय कोरियन एयर के साथ हो चुका है। इसके अलावा 103 पायलट लो कॉस्ट एयरलाइंस से जुड़ गए।

कोविड-19 महामारी से पहले हर साल लगभग 100 पायलट वायुसेना छोड़ते थे, लेकिन 2021 में वैश्विक हवाई यातायात में गिरावट के कारण केवल 7 पायलटों ने ही सेवा छोड़ी। इसके बाद संख्या फिर बढ़ने लगी और इस वर्ष मार्च तक 47 पायलट वायुसेना छोड़ चुके हैं।

हालांकि पायलटों के बड़े पैमाने पर पलायन को रोकने के लिए वायुसेना ने अनिवार्य सेवा अवधि तय की है, जो एयर फोर्स अकादमी से प्रशिक्षित फाइटर और कार्गो पायलटों के लिए 15 वर्ष, जबकि अन्य पायलटों के लिए 10 वर्ष है। ऐसे में अनिवार्य अवधि पूरी होते ही पायलटों ने वायुसेना की नौकरी को अलविदा कह दिया।

2025 के एक सर्वे के अनुसार, सैन्य और वाणिज्यिक पायलटों के वेतन में बड़े अंतर, सैन्य सेवा में अधिक जोखिम, लगातार इमरजेंसी ड्यूटी से तनाव वायुसेना छोड़ने के मुख्य कारण बने।

--आईएएनएस

वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Puducherry Exit Poll 2026: पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 के बाद एग्जिट पोल्स में NDA को बड़ी जीत दावा, कांग्रेस गठबंधन पीछे

Puducherry Exit Poll 2026: पुडुचेरी की 30 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में एग्जिट पोल अब एक साझा रुझान की ओर इशारा कर रहे हैं. पोल ऑफ पोल्स के समेकित विश्लेषण में NDA यहां पर स्पष्ट बढ़त के साथ उभरता दिख रहा है30 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 16 है. सभी सर्वे NDA को इस आंकड़े के पार ले जाते देखा जा रहा है. 

NDA के हालात मजबूत दिख रहे

तीन प्रमुख एजेंसियों- Axis My India, Peoples Pulse और Praja Poll - के आंकड़ों को देखें तो भाजपा गठबंधन NDA के हालात मजबूत दिख रहे हैं. Axis My India के अनुसार, NDA को 16 से 20 सीटें मिल सकती हैं, जो उसे बहुमत की रेखा पर या उससे ऊपर रखता है. Peoples Pulse भी NDA को 16 से 20 सीटों के दायरे में दिखाता है, जबकि Praja Poll सबसे आक्रामक अनुमान देते हुए NDA को 19 से 25 सीटों तक पहुंचता है. इन तीनों सर्वेक्षणों का औसत संकेत यही है कि NDA पुडुचेरी में सरकार बनाने की स्थिति में है.

निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में 0 से 3 सीटें 

इस चुनाव में एक दिलचस्प पहलू ये है कि TVK (तमिलगा वेत्री कझगम) की मौजूदगी भी है. Axis My India उसे 2 से 4 सीटें मिलने की उम्मीद है. Peoples Pulse और Praja Poll दोनों ही उसे किसी तरह की सीट देते नहीं दिख रहे हैंं. इसका मतलब है कि TVK की भूमिका सीमित रह जाती है. इसका प्रभाव कुछ चुनिंदा सीटों तक ही सिमट सकता है. अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों की बात की जाए तो उनके खाते में 0 से 3 सीटें जाने का अनुमान है. हालांकि, यह संख्या कम है, लेकिन करीबी मुकाबले के हालात में ये सीटें सरकार गठन के समीकरण को प्रभावित कर सकती हैं.

NDA बहुमत के करीब

अलग-अलग सर्वेक्षणों में सीटों के आंकड़ों में अंतर जरूर है, लेकिन दिशा एक ही है कि NDA बहुमत के करीब या उससे ज्यादा. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि और सीमित सीटों का गणिैत रिजल्ट को तेजी से प्रभावित करेगा. ऐसे में 2-3 सीटों का अंतर सत्ता का संतुलन बदल सकता है. फिलहाल, एग्जिट पोल के ये रुझान NDA के पक्ष में सरकार बनने की संभावना नजर आ रही है. वहीं कांग्रेस गठबंधन को नतीजों के दिन किसी उलटफेर की उम्मीद करनी होगी.

 

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  Sports

R Ashwin का MS Dhoni पर बड़ा बयान, 'स्पिनर्स के लिए उनसे बेहतर Keeper कोई नहीं'

 रविचंद्रन अश्विन ने महेंद्र सिंह धोनी की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने स्पिनरों के सामने विकेट के पीछे पूर्व भारतीय कप्तान की तरह विकेटकीपिंग करते हुए ‘‘किसी और’’ को नहीं देखा है। भारतीय टीम और चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) में लंबे समय तक साथ रहने वाले अश्विन ने याद किया कि कैसे धोनी की विकेटकीपिंग और स्पष्ट सोच उनकी शानदार कप्तानी से कहीं अधिक विशिष्ट थी।

अश्विन ने जियोस्टार से कहा, ‘‘उनकी विकेटकीपिंग ने मुझे हमेशा हैरान किया है। लोग उनकी कप्तानी की बहुत तारीफ करते हैं और यह सही भी है। उनकी सफलता ही सब कुछ बयां करती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘‘लेकिन मेरे लिए उनकी दो चीजें सबसे अलग हैं। पहला वह मध्य क्रम के बहुत अच्छे बल्लेबाज थे। एक ऐसा खिलाड़ी जो खेल को आखिर तक ले जा सकता था और उसे अनुकूल परिणाम के साथ खत्म कर सकता था।’’

अश्विन ने कहा, ‘‘और दूसरी बात स्पिनरों के सामने उनकी विकेटकीपिंग। मैंने उनके जैसा विकेटकीपर कोई और नहीं देखा है।’’ अश्विन ने इसके साथ ही कहा कि धोनी गेंदबाजों के मामले में किसी तरह से दखल नहीं देते थे। इस पूर्व स्पिनर ने कहा, ‘‘उन्होंने कभी मेरे लिए फील्डिंग नहीं सजाई। मैं अपने लिए फील्डिंग खुद सजाता था। वह बस इतना कहते थे, ‘दोहरा अनुमान मत लगाओ। पहले से अनुमान मत लगाओ।

अगर तुम्हारी गेंद पर बड़ा शॉट लग जाए तो कोई बात नहीं। अगर कोई जोखिम लेता है तो लेने दो। बस अपनी फील्डिंग के हिसाब से गेंदबाजी करो।’ उन्हें मुझ पर पूरा भरोसा था।’’ अश्विन ने 2011 के आईपीएल फाइनल में क्रिस गेल को शून्य पर आउट करने की घटना को याद किया और स्टंप के पीछे धोनी के शानदार कैच की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘‘आप मैच की रणनीति और विकेट गिरने के बारे में बात कर सकते हैं, लेकिन धोनी ने जिस तरह से कैच पकड़ा, वह लाजवाब था।’’

अश्विन आ ईपीएल में पांच फ्रेंचाइजी की तरफ से खेले। उन्होंने अपने आईपीएल करियर (2009-25) में 221 मैच में 187 विकेट लिए। अश्विन ने स्वीकार किया कि 2018-19 में पंजाब किंग्स की कप्तानी करने के बावजूद वह टीम को पूरी तरह से अपना नहीं बना सके, लेकिन उन्होंने राजस्थान रॉयल्स में बिताए अपने समय को सबसे संतोषजनक बताया। उन्होंने कहा, ‘‘पंजाब ने मुझे 2018 में चुना और ईमानदारी से कहूं तो मैंने अपना सब झोंक दिया था।

लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि मैं उस टीम को अपनी टीम नहीं बना पाया। कप्तान के तौर पर मैंने भले ही ज्यादा कुछ हासिल न किया हो, लेकिन मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला।’’ राजस्थान की टीम के साथ बिताए अपने समय के बारे में अश्विन ने कहा, ‘‘मैंने वहां तीन साल बिताए और उससे मुझे भारतीय टीम में वापसी करने में मदद मिली। राजस्थान ने जिस तरह से मेरा उपयोग किया वहशानदार था। मैंने वहां क्रिकेट का भरपूर आनंद लिया। मुझे बस यही अफसोस है कि मैं राजस्थान रॉयल्स के साथ कोई खिताब नहीं जीत सका।

Sun, 03 May 2026 15:38:12 +0530

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