काउंटर टेररिज्म ऑपरेशंस पर फोकस करेंगे भारत व कंबोडिया के जवान
नई दिल्ली, 3 मई (आईएएनएस)। भारत व कंबोडिया काउंटर टेररिज्म ऑपरेशंस पर फोकस करने जा रहे हैं। यह भारत की सैन्य कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक महत्वपूर्ण आयाम है। इसके तहत रविवार को भारतीय सैन्य दल, भारत–कंबोडिया संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास ‘सिनबैक्स–टी 2026’ के लिए कंबोडिया रवाना हुआ है।
यह युद्धाभ्यास कंबोडिया में आयोजित किया जाएगा। यहां दोनों देशों के जवान आतंकवाद-रोधी अभियानों, जंगल एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ऑपरेशन व समन्वित रणनीतियों पर मिलकर अभ्यास करेंगे। दोनों देशों का यह संयुक्त अभ्यास भारतीय सेना और रॉयल कंबोडियन आर्मी के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण प्रतीक है। सिनबैक्स का मुख्य उद्देश्य कंपनी स्तर पर संयुक्त प्रशिक्षण के माध्यम से सब-कन्वेंशनल (अपरंपरागत) वातावरण में सैन्य अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाना है।
इस अभ्यास के दौरान सैनिक एक-दूसरे के अनुभवों से सीखेंगे, आधुनिक तकनीकों और रणनीतियों का आदान-प्रदान करेंगे और जमीनी स्तर पर तालमेल को मजबूत करेंगे। खास बात यह है कि इसमें काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशंस पर विशेष जोर दिया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशंस आज के वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में बेहद महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि सिनबैक्स केवल एक सैन्य अभ्यास भर नहीं, बल्कि भारत की उस व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसमें वह क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
यह अभ्यास न केवल दोनों देशों के बीच सैन्य साझेदारी को सुदृढ़ करेगा, बल्कि आपसी विश्वास, समझ और सहयोग को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। दरअसल, भारत और कंबोडिया के बीच यह सहयोग यह दर्शाता है कि दोनों देश मिलकर न केवल अपनी सुरक्षा को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। यह अभ्यास 4 मई से प्रारंभ होगा और 17 मई 2026 तक कंबोडिया साम्राज्य के कंम्पोंग स्पेयू प्रांत स्थित टेको सेन फ्नोम थॉम म्रीस प्रॉव रॉयल कंबोडियन एयर फोर्स प्रशिक्षण केंद्र (कैंप बेसिल) में जारी रहेगा।
मित्र देशों के साथ चल रहे भारत के रक्षा सहयोग के अंतर्गत कंबोडिया के साथ यह द्विपक्षीय अभ्यास ‘सिनबैक्स-द्वितीय’ वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बदलते परिदृश्य के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। यह अभ्यास संयुक्त राष्ट्र के अधिदेश के अध्याय आठ के ढांचे के अंतर्गत आयोजित किया जाएगा। भारतीय सेना के दल में 120 सैन्यकर्मी शामिल हैं। इस सैन्य दल में अधिकांश जवान मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट की एक बटालियन से हैं। वहीं कंबोडियाई दल की बात करें तो यह 160 कार्मिकों का एक विशेष सैन्य दल है। ये सभी जवान रॉयल कंबोडियन आर्मी से हैं।
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह संयुक्त अभ्यास उन आतंकवाद-रोधी अभियानों की वर्तमान कार्य-प्रक्रिया के अनुरूप होगा, जिनका सामना संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों के दौरान शांति-रक्षक बलों द्वारा किया जाता है। सैन्य अभ्यास के अंतर्गत ड्रोन संचालन, मोर्टार तथा स्नाइपर रणनीतियों सहित विशेष कौशल प्रशिक्षण भी होगा। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के दलों के बीच अंतर-संचालन क्षमता, समन्वय तथा परिचालन तालमेल को सुदृढ़ करना है।
यह अभ्यास केवल वैश्विक शांति बनाए रखने के प्रति दोनों देशों की क्षमता को प्रदर्शित करेगा। इसके अलावा अर्ध-शहरी परिदृश्य में शत्रुतापूर्ण बलों के विरुद्ध सर्वोत्तम पद्धतियां साझा करने को भी प्रोत्साहित करेगा। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘सिनबैक्स-द्वितीय 2026’ भारत व कंबोडिया के द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करेगा।
--आईएएनएस
जीसीबी/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
नेपाल के पीएम बालेंद्र शाह सुर्खियों में, 1,594 राजनीतिक नियुक्तियां की गईं रद्द
काठमांडू, 3 मई (आईएएनएस)। नेपाल सरकार का एक फैसला चर्चा में है। शनिवार को राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने एक आदेश जारी किया, जिससे पिछले साल की गईं 1,594 राजनीतिक नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया।
द काठमांडू पोस्ट के अनुसार, इस कदम से नेपाल के प्रशासनिक महकमे में उथल-पुथल मच गई है। विश्वविद्यालयों, सरकारी कंपनियों, नियंत्रक इकाइयों, परिषद, बोर्ड्स, रिसर्च इंस्टीट्यूट और मीडिया संगठनों के अधिकारियों को निकाल दिया गया है, जिससे कई संस्थान बिना नेतृत्व के रह गए हैं।
हाल के सालों में सबसे बड़े प्रशासनिक बदलावों में से एक बताया गया, “ऑर्डिनेंस ऑन स्पेशल प्रोविजन्स रिलेटिंग टू द रिमूवल ऑफ पब्लिक ऑफिशियल्स फ्रॉम ऑफिस, 2026” का यह प्रावधान कहता है कि 26 मार्च से पहले की गई सभी नियुक्तियां स्वतः समाप्त हो जाएंगी, चाहे उनका समय, फायदे, या नियुक्तियों की शर्तें कुछ भी हों।
दस्तावेजों में कहा गया कि, “मौजूदा कानूनों में कहीं और लिखी किसी भी बात के बावजूद, 26 मार्च से पहले तय शेड्यूल के हिसाब से पब्लिक संस्थाओं में नियुक्त और अभी पद पर बैठे सरकारी अधिकारी इस ऑर्डिनेंस के लागू होने पर अपने-आप अपने पदों से हटा दिए जाएंगे।”
हालांकि, इतने सारे अधिकारियों को हटाने के इस बड़े कदम से, नए लीडरशिप की तुरंत नियुक्ति न होने पर इन संस्थाओं के कामकाज पर चिंता बढ़ गई है।
यह ऑर्डिनेंस प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की लीडरशिप वाली कैबिनेट की सिफारिश पर जारी किया गया था।
यह कदम 5 मार्च को हुए चुनावों के बाद आया है, जिसमें राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) निचले सदन यानी प्रतिनिधिमंडल में लगभग दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में आई थी। जब से इसके सीनियर लीडर, शाह को 26 मार्च को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है, नई सरकार ने एक के बाद एक अहम कदम उठाए हैं, जिससे कई लोग यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि सरकार कितने बड़े बदलाव कर सकती है। प्रेसिडेंट पौडेल ने पहले सरकार की सिफारिश पर 30 अप्रैल को बुलाए गए पार्लियामेंट्री सेशन को सस्पेंड कर दिया था, जिससे ऑर्डिनेंस जारी करने का रास्ता साफ हो गया।
नई सरकार के कुछ काम विवादित रहे हैं, खासकर काठमांडू की नदियों के किनारे से अवैध कब्जा करके बैठे लोगों को जबरदस्ती हटाना, जिसमें उन्होंने झोपड़ियां और इमारतें बनाई थीं; उन्हें तोड़ दिया गया।
सरकार के समर्थकों का कहना है कि नदियों के किनारे कब्जा किए हुए कई फर्जी लोगों को हटाना जरूरी था। सरकार ने असल भूस्वामियों को बसाने का वादा किया था।
कई असरदार और विवादित व्यवसायियों को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में जांच के लिए गिरफ्तार किया गया है। मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट में बदलाव के लिए एक और ऑर्डिनेंस भी जारी किया गया है, जिसका मकसद सत्ता में बैठे लोगों पर पहले से ज्यादा आसानी से केस चलाना है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, शेर बहादुर देउबा और पुष्प कमल दहल भी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का सामना कर रहे हैं।
--आईएएनएस
केआर/
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